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ईंधन संकट: भूटान ने भारत का जताया आभार, कीमतें हुईं बढ़ी

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ईंधन संकट: भूटान ने भारत का जताया आभार, कीमतें हुईं बढ़ी

सारांश

भूटान में ईंधन संकट गहरा रहा है, जहां सरकार ने भारत का आभार व्यक्त किया है। हालात नियंत्रण से बाहर होते जा रहे हैं, जिससे ईंधन की कीमतों में वृद्धि हो रही है। इस स्थिति में नागरिकों से सावधानी बरतने की अपील की गई है।

मुख्य बातें

पश्चिम एशिया संघर्ष का भूटान पर प्रभाव ईंधन की कीमतों में 60% से अधिक की वृद्धि भारत का समर्थन और आभार सरकार द्वारा फ्यूल सब्सिडी की शुरुआत नागरिकों से यात्रा कम करने की अपील

थिंपू, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का प्रभाव हिमालयी देश भूटान पर भी पड़ रहा है। सरकार का मानना है कि हालात अब "नियंत्रण से बाहर हो रहे हैं," जिसके चलते उन्हें ईंधन की कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं। इसी बीच, सरकार ने पीओएल-एलपीजी आपूर्ति के लिए पड़ोसी देश भारत का आभार व्यक्त किया है।

प्रधानमंत्री दाशो शेरिंग तोबगे के कार्यालय से 1 अप्रैल को एक बयान जारी कर जनता को बढ़ी कीमतों का कारण बताया गया। इस बयान के माध्यम से कार्बन-नेगेटिव भूटान ने नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे लंबी यात्रा से बचें।

सरकारी सब्सिडी के बावजूद, 28 फरवरी को मध्य पूर्व संघर्ष के आरंभ होने के बाद से पेट्रोल की कीमत में 60 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। फरवरी में यह लगभग 65 न्गुलट्रम (एनयू) (0.70 अमेरिकी डॉलर) थी, जो 1 अप्रैल को नई सरकारी सब्सिडी वाली कीमत तक 95 न्गुलट्रम हो गई है।

नए सरकारी आदेश के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 की आधी रात से थिंपू में पेट्रोल की खुदरा कीमतें 114.31 एनयू प्रति लीटर और डीजल के लिए 174.13 एनयू प्रति लीटर हो गई हैं। हालांकि, फ्यूल सब्सिडी के साथ, पेट्रोल की कीमतें 98.00 एनयू प्रति लीटर और डीजल की 98.31 एनयू प्रति लीटर निर्धारित की गई हैं।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने बयान में कहा, “हाल के हफ्तों में विश्वभर में फ्यूल की कीमतों में काफी वृद्धि हुई है और यह हमारे नियंत्रण से बाहर है।”

भारत और चीन जैसे बड़े देशों के बीच स्थित भूटान ने 21 मार्च को “घरों और अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को कम करने” के लिए सरकारी फ्यूल सब्सिडी की शुरुआत की थी। सरकार ने कहा, "घरों और अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को कम करने के लिए 21 मार्च 2026 को नेशनल फ्यूल प्राइस स्मूथनिंग फ्रेमवर्क (एनएफपीएसएफ) के तहत फ्यूल सब्सिडी शुरू की गई थी।"

फ्यूल की कीमतों में वृद्धि के बाद, सरकार ने नागरिकों से मदद की अपील की है।

सरकार ने आगे कहा, “देश के खजाने पर पड़ रहे भारी बोझ को देखते हुए, सभी सार्वजनिक सेवा एजेंसियों को फ्यूल की खपत कम करने के उपाय करने का निर्देश दिया गया है, जैसे कि काम पर पैदल जाना, गैर-जरूरी यात्रा से बचना और वर्क फ्रॉम होम को प्राथमिकता देना।”

इसके साथ ही, सरकार ने भारत का आभार व्यक्त करते हुए कहा, "भूटान सरकार, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में रुकावटों के बावजूद पीओएल और एलपीजी की बिना रुकावट आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार को धन्यवाद करना चाहती है।"

यह ध्यान देने योग्य है कि लगभग 800,000 की आबादी वाला यह देश भारत के माध्यम से अपना फ्यूल आयात करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो कि वैश्विक स्तर पर चल रहे संघर्षों का परिणाम है। सरकार ने इस स्थिति का सामना करने के लिए उपाय किए हैं और भारत से मिले समर्थन को सराहा है। यह स्थिति न केवल भूटान की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव डाल रही है, बल्कि नागरिकों के जीवन को भी प्रभावित कर रही है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भूटान में ईंधन की कीमतें क्यों बढ़ी हैं?
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण भूटान में ईंधन की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे सरकार को सब्सिडी में बदलाव करना पड़ा।
क्या भूटान भारत से ईंधन आयात करता है?
हां, लगभग 800,000 की आबादी वाला भूटान भारत के माध्यम से अपना फ्यूल आयात करता है।
सरकार ने नागरिकों से क्या अपील की है?
सरकार ने नागरिकों से लंबी यात्राओं से बचने और फ्यूल की खपत कम करने की अपील की है।
राष्ट्र प्रेस
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