चीन की हवाई माल ढुलाई में ऐतिहासिक उछाल: 2025 में 214 नई अंतरराष्ट्रीय कार्गो उड़ानें शुरू
सारांश
मुख्य बातें
चीन की 2025 राष्ट्रीय नई कार्गो उड़ान विश्लेषण रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में चीन की हवाई माल ढुलाई ने मात्रा और गुणवत्ता — दोनों मोर्चों पर उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की। वार्षिक माल और डाक परिवहन मात्रा पहली बार 1 करोड़ 1 लाख 72 हजार टन के स्तर को पार कर गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 13.3 प्रतिशत की वृद्धि है। यह चीन के नागरिक उड्डयन क्षेत्र के इतिहास में एक नया मील का पत्थर माना जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बनीं विकास की मुख्य चालक
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में चीन से कुल 214 नई अंतरराष्ट्रीय कार्गो उड़ानें शुरू की गईं, जो दुनिया के छह महाद्वीपों को कवर करती हैं। यह आँकड़ा दर्शाता है कि चीन का उड़ान नेटवर्क तेज़ी से वैश्विक विस्तार की दिशा में बढ़ रहा है। नई उड़ानों में सबसे अधिक हिस्सेदारी एशिया (104 उड़ानें) और यूरोप (83 उड़ानें) की रही, जिनका संयुक्त हिस्सा कुल नई उड़ानों का 87 प्रतिशत से अधिक है।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में पुनर्गठन जारी है और एशिया-यूरोप व्यापार मार्गों पर माल की माँग लगातार बढ़ रही है। गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय कार्गो उड़ानों की यह संख्या चीन की वैश्विक लॉजिस्टिक्स महत्वाकांक्षाओं को स्पष्ट रूप से रेखांकित करती है।
परिवहन क्षमता में संरचनात्मक सुधार
केवल उड़ानों की संख्या ही नहीं, बल्कि परिवहन क्षमता की संरचना में भी सुधार दर्ज किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में पंजीकृत पूर्ण कार्गो विमानों (फुल-फ्रेटर) की कुल संख्या बढ़कर 272 हो गई है। इनमें लंबी दूरी के वाइड-बॉडी मालवाहक विमानों की संख्या 60 तक पहुँच गई है, जो अंतर्महाद्वीपीय ट्रंक मार्गों पर मुख्य भार वाहक की भूमिका निभा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि वाइड-बॉडी विमानों की बढ़ती संख्या चीन को लंबी दूरी के मार्गों पर प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त दिलाती है, विशेष रूप से यूरोप और अमेरिका को जोड़ने वाले ट्रांस-कॉन्टिनेंटल मार्गों पर।
वैश्विक संदर्भ में महत्व
आँकड़ों के अनुसार, चीन का यह विस्तार ऐसे वैश्विक परिदृश्य में हो रहा है जब कई देश अपनी एयर कार्गो क्षमता बढ़ाने में संघर्ष कर रहे हैं। चीन द्वारा एक ही वर्ष में 214 नई अंतरराष्ट्रीय कार्गो उड़ानें जोड़ना वैश्विक हवाई माल ढुलाई बाज़ार में उसकी बढ़ती पकड़ को दर्शाता है। यह प्रवृत्ति भारत सहित अन्य एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के लिए भी व्यापार और लॉजिस्टिक्स रणनीति के संदर्भ में प्रासंगिक है।
आगे की दिशा
रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि उड़ान नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय विस्तार की यह प्रवृत्ति आने वाले वर्षों में और प्रबल होने की संभावना है। कार्गो विमानों के बेड़े में विस्तार और नए मार्गों के जुड़ने से चीन की वैश्विक एयर फ्रेट हिस्सेदारी में और वृद्धि अपेक्षित है।