क्वेइलिन में 'विश्व नहर सम्मेलन 2026' शुरू, 20 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल
सारांश
मुख्य बातें
चीन के क्वांग्शी च्वांग जातीय स्वायत्त प्रदेश के क्वेइलिन शहर में 'विश्व नहर सम्मेलन 2026' का आयोजन मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को शुरू हुआ। इस अंतर्राष्ट्रीय मंच पर दुनिया के 20 से अधिक देशों के नहर शहरों, शोध संस्थानों, विश्वविद्यालयों और उद्योग संगठनों के प्रतिनिधियों ने भागीदारी की। नहर विरासत के संरक्षण, जल परिवहन के आधुनिकीकरण और नदी बेसिन के समन्वित विकास जैसे वैश्विक महत्व के मुद्दों पर यहाँ विचार-विमर्श हुआ।
सम्मेलन का केंद्रीय विषय
सम्मेलन का मुख्य थीम 'नवाचार और दृढ़ता : महत्वपूर्ण विकल्प' रखा गया। इसके अंतर्गत दो प्रमुख एजेंडा बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया गया। पहला बिंदु ऐतिहासिक लिंगछ्यूए नहर (Lingqu Canal) के संरक्षण, जीर्णोद्धार और पुनरुपयोग से संबंधित था, जिसे प्राचीन विश्व की जल-संरक्षण वास्तुकला के एक अनमोल नमूने के रूप में माना जाता है।
दूसरा बिंदु फिंगलू नहर से जुड़ा था, जिसके माध्यम से आधुनिक जल परिवहन के उच्च-गुणवत्ता विकास की संभावनाएँ प्रस्तुत की गईं। इन दोनों नहरों के उदाहरण ऐतिहासिक और समकालीन जल-प्रबंधन के बीच की कड़ी को रेखांकित करते हैं।
फिंगलू नहर को अंतर्राष्ट्रीय हरित पुरस्कार
सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में विश्व हरित डिजाइन संगठन ने फिंगलू नहर परियोजना को दो प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाज़ा — अंतर्राष्ट्रीय हरित डिजाइन पुरस्कार और अंतर्राष्ट्रीय हरित डिजाइन योगदान पुरस्कार। यह मान्यता दर्शाती है कि इस परियोजना को वैश्विक स्तर पर टिकाऊ बुनियादी ढाँचे के एक प्रेरक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
फिंगलू नहर: आधुनिक जलमार्ग का नया अध्याय
गौरतलब है कि 16 सितंबर 2026 को नवनिर्मित फिंगलू नहर को आधिकारिक तौर पर खोला गया था। इसका निर्माण 28 अगस्त 2022 को आरंभ हुआ था और यह पश्चिमी भूमि-समुद्री नए कॉरिडोर की एक अहम परियोजना है।
नहर की कुल लंबाई 134.2 किलोमीटर है और इसे अंतर्देशीय श्रेणी-1 जलमार्ग के मानकों के अनुरूप विकसित किया गया है। इस पर 5,000 टन तक की क्षमता वाले जहाज परिचालन कर सकते हैं, जो चीन के अंतर्देशीय जलमार्गों के लिए निर्धारित सर्वोच्च मानकों में से एक है।
वैश्विक महत्व और आगे की राह
यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हुआ है जब दुनिया भर में जल परिवहन को जलवायु-अनुकूल और कुशल विकल्प के रूप में नए सिरे से देखा जा रहा है। नहर विरासत और आधुनिक बुनियादी ढाँचे के बीच संतुलन बनाने की चुनौती आज कई देशों के सामने है। क्वेइलिन सम्मेलन की चर्चाएँ नीति-निर्माताओं और विशेषज्ञों को एक साझा दिशा तय करने का अवसर प्रदान करती हैं।