भारत-चीन जलवायु वार्ता: सीबी जॉर्ज ने लियू झेनमिन से की मुलाकात, वैश्विक जलवायु सहयोग पर हुई अहम चर्चा

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भारत-चीन जलवायु वार्ता: सीबी जॉर्ज ने लियू झेनमिन से की मुलाकात, वैश्विक जलवायु सहयोग पर हुई अहम चर्चा

सारांश

जलवायु और रक्षा — दोनों मोर्चों पर एक साथ हो रही भारत-चीन की उच्चस्तरीय वार्ता यह संकेत देती है कि 2020 की LAC झड़प के बाद से जमी बर्फ धीरे-धीरे पिघल रही है। सीबी जॉर्ज-लियू झेनमिन की जलवायु बैठक और राजनाथ-डोंग जुन की बिश्केक वार्ता एक ही दिन — यह महज़ संयोग नहीं लगता।

Key Takeaways

  • सेक्रेटरी (वेस्ट) राजदूत सीबी जॉर्ज ने 28 अप्रैल 2026 को चीन के विशेष दूत लियू झेनमिन से मिलकर वैश्विक जलवायु एजेंडे पर चर्चा की।
  • भारत ने UNFCCC और पेरिस समझौते के तहत बहुपक्षीय जलवायु प्रक्रिया में सक्रिय और रचनात्मक भूमिका की पुष्टि की।
  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और चीनी रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जुन की बिश्केक में द्विपक्षीय बैठक हुई, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा और सीमा समन्वय पर चर्चा हुई।
  • राजनाथ सिंह SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक में भाग लेने किर्गिस्तान पहुँचे हैं।
  • यह वार्ता 2020 की पूर्वी लद्दाख LAC झड़प के बाद से भारत-चीन संबंध सामान्यीकरण की कड़ी में नवीनतम कदम है।

भारत के सेक्रेटरी (वेस्ट) राजदूत सीबी जॉर्ज ने 28 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में जलवायु परिवर्तन के लिए चीन के विशेष दूत लियू झेनमिन से मुलाकात की और वैश्विक जलवायु एजेंडे पर विचारों का आदान-प्रदान किया। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब भारत और चीन के बीच कूटनीतिक संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में कई स्तरों पर प्रयास जारी हैं।

जलवायु वार्ता का विवरण

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि राजदूत सीबी जॉर्ज ने लियू झेनमिन से मुलाकात कर वैश्विक जलवायु एजेंडे पर विचार साझा किए। जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत पूरी तरह से जुड़ा हुआ है और वैश्विक जलवायु कार्रवाई को आगे बढ़ाने में एक रचनात्मक एवं सक्रिय भूमिका निभाता आ रहा है।

प्रवक्ता के अनुसार इस सहयोग में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) और उसके पेरिस समझौते के तहत बहुपक्षीय जलवायु प्रक्रिया भी शामिल है। गौरतलब है कि भारत और चीन — दुनिया के दो सबसे बड़े कार्बन उत्सर्जक देश — के बीच जलवायु नीति पर समन्वय वैश्विक जलवायु लक्ष्यों की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

राजनाथ-डोंग जुन की ऐतिहासिक मुलाकात

इसी क्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जुन के बीच किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई। इस उच्चस्तरीय वार्ता में एशिया की मौजूदा सुरक्षा स्थिति, क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के उपायों और भारत-चीन संवाद को मजबूत करने जैसे अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।

दोनों रक्षा मंत्रियों ने सीमा क्षेत्रों में बेहतर समन्वय और तनाव कम करने के लिए प्रभावी संचार तंत्र को और मजबूत बनाने पर भी जोर दिया। यह बैठक शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के रक्षा मंत्रियों की बैठक के इतर हुई, जिसमें राजनाथ सिंह भाग लेने के लिए बिश्केक पहुँचे थे।

SCO बैठक और क्षेत्रीय सुरक्षा

SCO की इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और सदस्य देशों के बीच रक्षा संबंधों को मजबूत करने जैसे विषयों पर चर्चा हो रही है। राजनाथ सिंह ने अपने दौरे के दौरान अन्य सदस्य देशों के रक्षा मंत्रियों के साथ भी द्विपक्षीय बैठकें करने की बात कही है।

भारत-चीन संबंधों की पृष्ठभूमि

यह कूटनीतिक सक्रियता ऐसे समय में हो रही है जब भारत और चीन के रिश्ते 2020 से तनावपूर्ण दौर से गुज़र रहे हैं। पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर दोनों देशों की सेनाओं के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद द्विपक्षीय संबंधों में गंभीर गिरावट आई थी और आपसी विश्वास में कमी देखी गई थी। हालाँकि बीते कुछ वर्षों में संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में कई बड़ी कूटनीतिक पहल की गई हैं।

जलवायु और रक्षा — दोनों मोर्चों पर एक साथ हो रही यह उच्चस्तरीय वार्ता संकेत देती है कि दोनों देश व्यापक द्विपक्षीय ढाँचे को धीरे-धीरे पुनर्स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।

Point of View

जब दोनों देश अभी भी LAC पर विश्वास-बहाली के शुरुआती चरण में हैं। इतिहास गवाह है कि भारत-चीन के बीच बहुपक्षीय मंचों पर सहमति और द्विपक्षीय ज़मीनी हकीकत में अक्सर बड़ा फ़र्क रहा है। जब तक सीमा पर स्थायी शांति नहीं होती, तब तक जलवायु जैसे वैश्विक मुद्दों पर सहयोग की गहराई सीमित ही रहेगी।
NationPress
28/04/2026

Frequently Asked Questions

सीबी जॉर्ज और लियू झेनमिन की मुलाकात में क्या हुआ?
भारत के सेक्रेटरी (वेस्ट) राजदूत सीबी जॉर्ज ने 28 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में चीन के जलवायु विशेष दूत लियू झेनमिन से मुलाकात की और UNFCCC तथा पेरिस समझौते के तहत वैश्विक जलवायु एजेंडे पर विचारों का आदान-प्रदान किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इसकी पुष्टि 'एक्स' पर की।
राजनाथ सिंह और चीनी रक्षा मंत्री की बिश्केक में क्यों मुलाकात हुई?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के रक्षा मंत्रियों की बैठक में भाग लेने पहुँचे थे। इसी दौरान उन्होंने चीनी रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जुन के साथ द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा, सीमा समन्वय और संवाद को मज़बूत करने पर चर्चा हुई।
भारत-चीन संबंध अभी किस स्थिति में हैं?
2020 में पूर्वी लद्दाख में LAC पर हुई हिंसक झड़प के बाद भारत-चीन संबंधों में गंभीर तनाव आया था। हालाँकि बीते कुछ वर्षों में दोनों देशों ने कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर संबंध सामान्य बनाने की दिशा में कई पहल की हैं, जिनमें यह ताज़ा वार्ताएँ भी शामिल हैं।
UNFCCC और पेरिस समझौते में भारत की क्या भूमिका है?
भारत UNFCCC का सक्रिय सदस्य है और पेरिस समझौते के तहत अपने राष्ट्रीय जलवायु लक्ष्य (NDC) प्रस्तुत कर चुका है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत वैश्विक जलवायु कार्रवाई में रचनात्मक और सक्रिय भूमिका निभाता आ रहा है।
SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हो रही है?
बिश्केक में हो रही SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और सदस्य देशों के बीच रक्षा संबंधों को मजबूत करना प्रमुख एजेंडा है। राजनाथ सिंह ने अन्य सदस्य देशों के रक्षा मंत्रियों के साथ भी द्विपक्षीय बैठकें करने की बात कही है।
Nation Press