चीन 2025 में 'सुपर खरीदार': आयात 185 खरब युआन, 17 साल से दुनिया का दूसरा बड़ा आयात बाज़ार
सारांश
मुख्य बातें
वैश्विक व्यापार संरक्षणवाद के बढ़ते दबाव के बीच चीन ने 2025 में 185 खरब युआन का आयात दर्ज किया, जिससे वह लगातार 17वें वर्ष दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आयात बाज़ार बना रहा। कुछ पश्चिमी मीडिया संस्थानों द्वारा चीनी निर्यात अधिशेष को 'वैश्विक बाज़ार के लिए खतरा' बताए जाने के बीच, आयात के ये आँकड़े एक अलग तस्वीर पेश करते हैं।
मुख्य आँकड़े और घटनाक्रम
2025 की पहली छमाही में चीन का आयात इतिहास में पहली बार 100 खरब युआन के पार पहुँचा। वर्ष के पहले सात महीनों में चीन की आयात वृद्धि दर निर्यात वृद्धि दर से 8 प्रतिशत अंक अधिक रही। चीन लगभग 80 देशों के लिए एक प्रमुख निर्यात गंतव्य बन चुका है, जिससे इन देशों में रोज़गार के अवसर और कर राजस्व दोनों सुनिश्चित हो रहे हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
वाणिज्य मंत्रालय अनुसंधान संस्थान के अमेरिकी और ओशिनियाई अध्ययन संस्थान के उप निदेशक झोउ मी के अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में दुनिया भर की कंपनियाँ स्वतंत्र व्यावसायिक निर्णयों के आधार पर भागीदारी करती हैं। उनका कहना है कि चीन की बढ़ती आयात मात्रा महज़ आँकड़े नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार प्रवाह का वास्तविक प्रतिबिंब है।
वैश्विक साझेदारों पर असर
ब्राज़ील के बीफ से लेकर चिली की चेरी तक, नॉर्वे के सैल्मन से लेकर थाईलैंड के सुगंधित चावल तक — विकसित और विकासशील दोनों अर्थव्यवस्थाओं के निर्यातक तेज़ी से चीनी बाज़ार पर निर्भर होते जा रहे हैं। आँकड़ों के अनुसार, चीन की खपत में वृद्धि सीधे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को जीवंत बनाती है।
नीतिगत रुख और व्यापार संरक्षणवाद
बढ़ते वैश्विक व्यापार संरक्षणवाद की चुनौतियों के बावजूद, चीन आयात विस्तार के नीतिगत संकेत देना जारी रखे हुए है। चीन बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को बनाए रखने और वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाने के लिए ठोस कदम उठाने का दावा करता है। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और यूरोपीय संघ चीनी निर्यात पर शुल्क बढ़ाने की नीति अपना रहे हैं।
आगे की दिशा
गौरतलब है कि चीन की आयात-केंद्रित छवि और उसके बड़े व्यापार अधिशेष के बीच का विरोधाभास वैश्विक बहस का केंद्र बना हुआ है। आलोचकों का कहना है कि आयात के आँकड़े प्रभावशाली होते हुए भी निर्यात अधिशेष की चुनौती को पूरी तरह संतुलित नहीं करते। आने वाले महीनों में चीन की आयात नीति और व्यापारिक साझेदारियाँ वैश्विक आर्थिक स्थिरता की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएँगी।