चीनी राजदूत शू फेइहोंग ने विजयवाड़ा सरस मेला-2026 का दौरा किया, महिला उद्यमियों के उत्पाद खरीदे
सारांश
मुख्य बातें
भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने 18 अक्टूबर 2026 को विजयवाड़ा के पुनामी घाट पर आयोजित राष्ट्रीय सरस मेला-2026 का दौरा किया और देशभर के स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी ग्रामीण महिला उद्यमियों के उत्पादों की सराहना की। राजदूत अपनी पत्नी तान युक्सिउ और एक पाँच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ 16 से 18 अक्टूबर तक एनटीआर जिले के निर्धारित दौरे पर थे।
प्रतिनिधिमंडल की संरचना और दौरे का विवरण
चीनी प्रतिनिधिमंडल में राजदूत शू फेइहोंग, उनकी पत्नी तान युक्सिउ, मंत्री सलाहकार झोउ गुओहुई, द्वितीय सचिव गुओ डोंगडोंग और राजदूत के सचिव ली अन्नान शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने मेले में लगे विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण किया, जहाँ देश के कोने-कोने से आई महिला उद्यमियों ने अपने हस्तनिर्मित उत्पाद प्रदर्शित किए हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने महिला उद्यमियों से सीधी बातचीत की और उनके उत्पाद खरीदकर उनका उत्साहवर्धन किया। राजदूत शू ने ग्रामीण महिलाओं की उल्लेखनीय प्रगति और उनके उद्यमशीलता कौशल पर प्रसन्नता व्यक्त की।
राजदूत की प्रतिक्रिया और सराहना
राजदूत शू फेइहोंग ने उत्पादों के विकास और विपणन में महिलाओं की पहल, रचनात्मकता और परिश्रम की विशेष सराहना की। उन्होंने इसे स्वयं सहायता समूह आंदोलन के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के बढ़ते आर्थिक सशक्तीकरण का प्रत्यक्ष प्रमाण बताया। यह दौरा ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत-चीन द्विपक्षीय संबंध नई गति पकड़ने की कोशिश में हैं।
राष्ट्रीय सरस मेला-2026: मंच और महत्व
राष्ट्रीय सरस मेला-2026 का आयोजन 17 से 30 अक्टूबर 2026 तक विजयवाड़ा के पुनामी घाट पर किया जा रहा है। मेले में देशभर के स्वयं सहायता समूहों की महिला उद्यमियों के 600 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं। यह मेला ग्रामीण महिलाओं को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने, ग्राहकों से सीधा जुड़ने और नए व्यावसायिक अवसर तलाशने का राष्ट्रीय मंच प्रदान करता है।
गौरतलब है कि 15 अक्टूबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने इस मेले का विधिवत उद्घाटन किया था। सरस मेला (सेल ऑफ आर्टिकल्स ऑफ रूरल आर्टिसन सोसाइटी) का आयोजन केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय और आंध्र प्रदेश सरकार संयुक्त रूप से कर रहे हैं।
आम जनता और उद्यमियों पर असर
चीनी राजदूत के इस दौरे ने सरस मेले को एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। इससे देशभर की ग्रामीण महिला उद्यमियों का मनोबल बढ़ा है और पारंपरिक शिल्प तथा स्थानीय उत्पादों को वैश्विक मंच पर नई दृश्यता मिली है। मेले में भाग लेने वाली महिला उद्यमियों को उम्मीद है कि इस तरह के उच्चस्तरीय दौरे उनके व्यापार के लिए नए रास्ते खोलेंगे।
आने वाले दिनों में 30 अक्टूबर तक चलने वाले इस मेले में देश-विदेश के और अधिक प्रतिनिधियों के आने की संभावना है, जो ग्रामीण महिलाओं के स्वावलंबन की इस पहल को और व्यापक पहचान दिला सकता है।