ढाका बना दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर, AQI 213; कुआलालंपुर और सिंगापुर भी टॉप 3 में
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश की राजधानी ढाका मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शीर्ष पर पहुँच गई, जब सुबह 11 बजकर 10 मिनट पर शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 213 दर्ज किया गया। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह स्तर AQI पैमाने पर 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चेतावनी है।
वैश्विक प्रदूषण सूची में शीर्ष शहर
उसी समय मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर 208 AQI के साथ दूसरे और सिंगापुर 179 AQI के साथ तीसरे स्थान पर रहा। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण-पूर्व और दक्षिण एशिया के कई शहरों में मानसून के बाद वायु गुणवत्ता में गिरावट दर्ज की जाती है।
AQI मानकों के अनुसार, 301 से ऊपर की रीडिंग को 'खतरनाक', 201-300 के बीच को 'बहुत खराब', 151-200 को 'खराब' और 101-150 को 'संवेदनशील समूहों के लिए अस्वस्थ' माना जाता है।
ढाका का वायु प्रदूषण: पुरानी और गहरी समस्या
रिपोर्टों के अनुसार, ढाका लंबे समय से वायु प्रदूषण की समस्या से जूझ रहा है। आमतौर पर सर्दियों के मौसम में हवा की गुणवत्ता सबसे खराब हो जाती है और मानसून के दौरान इसमें आंशिक सुधार देखा जाता है। AQI की गणना पाँच प्रमुख प्रदूषकों के आधार पर होती है — पार्टिकुलेट मैटर (PM10 और PM2.5), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2), कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) और ओजोन।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब ढाका इस तरह की किसी सूची में शीर्ष पर आया हो। शहर का औद्योगिक विस्तार, बेतरतीब वाहन उत्सर्जन और ईंट-भट्टों से निकलने वाला धुआँ इसकी हवा को बारहमासी रूप से दूषित करते हैं।
शोध: बांग्लादेश में हर दिन 242 मौतें, ₹1.93 लाख करोड़ का नुकसान
'द डेली स्टार' की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई में जहांगीरनगर यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की एक स्टडी में पता चला कि PM2.5 से होने वाले वायु प्रदूषण के कारण बांग्लादेश के छह बड़े शहरों में प्रतिदिन लगभग 242 लोगों की मौत होती है। इन छह शहरों में ढाका, चट्टोग्राम, राजशाही, खुलना, सिलहट और बारिशाल शामिल हैं।
स्टडी के अनुसार, PM2.5 प्रदूषण के कारण इन शहरों में हर साल लगभग 88,240 लोगों की समय से पहले मौत होती है — यानी प्रति 1,00,000 लोगों पर लगभग 260 मौतें। इसके अलावा, इस प्रदूषण से बांग्लादेश को सालाना लगभग 23 अरब डॉलर (लगभग ₹1.93 लाख करोड़) का आर्थिक नुकसान होने का अनुमान लगाया गया है। इस अध्ययन में जहांगीरनगर यूनिवर्सिटी के पब्लिक हेल्थ और इंफॉर्मेटिक्स विभाग के अंतर्गत 'क्लाइमेट चेंज, एयर क्वालिटी एंड हेल्थ रिसर्च (C2AHR) यूनिट' ने 2013 से 2021 तक के आँकड़ों का विश्लेषण किया।
वैश्विक स्वास्थ्य संकट: WHO के आँकड़े
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आँकड़ों के अनुसार, वायु प्रदूषण के कारण दुनिया भर में हर साल लगभग 70 लाख लोगों की मौत होती है। इन मौतों के प्रमुख कारणों में हृदय रोग, स्ट्रोक, क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD), फेफड़ों का कैंसर और गंभीर श्वसन संक्रमण शामिल हैं।
WHO के आँकड़ों से यह भी पता चलता है कि दुनिया की लगभग 99 प्रतिशत आबादी WHO दिशानिर्देशों की सीमा से अधिक प्रदूषित हवा में साँस लेती है। कम और मध्यम आय वाले देश इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित हैं।
आगे क्या होगा
वायु गुणवत्ता विशेषज्ञों के अनुसार, ढाका में अगले कुछ महीनों में — जब सर्दियाँ और गहरी होंगी — AQI स्तर और अधिक बिगड़ सकता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि जब तक औद्योगिक उत्सर्जन, वाहन प्रदूषण और ईंट-भट्टों पर सख्त नियंत्रण नहीं होता, तब तक स्थिति में टिकाऊ सुधार संभव नहीं है।