लाहौर बना दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर, AQI 530 के पार; WHO सीमा से 22 गुना ज़्यादा ज़हरीली हवा
सारांश
मुख्य बातें
लाहौर को 2 नवंबर 2026 को विश्व का सबसे प्रदूषित शहर दर्ज किया गया, जहाँ वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 530 तक पहुँच गया और हवा में बारीक कणों (पीएम2.5) की सांद्रता 343 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज की गई। वैश्विक वायु-गुणवत्ता मॉनिटरिंग संस्था आईक्यूएयर की सोमवार सुबह 9 बजे से 10 बजे IST के बीच जारी रैंकिंग में लाहौर शीर्ष पर रहा — दूसरे स्थान पर काहिरा था, जिसका एक्यूआई 226 था।
मुख्य घटनाक्रम
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के कई शहर एक साथ इस संकट की चपेट में हैं। आईक्यूएयर की रैंकिंग के अनुसार, लाहौर (530) के बाद गुजरांवाला (475), फैसलाबाद (435), मुल्तान (280), सियालकोट (241) और बहावलपुर (180) का स्थान रहा। यानी पाकिस्तान के शीर्ष सात प्रदूषित शहरों में से अधिकांश पंजाब में ही स्थित हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार पंजाब में कृषि पराली जलाने की घटनाओं में तेज़ वृद्धि इस संकट को और गहरा कर रही है। सर्दियों की शुरुआत के साथ वातावरण में ठंडी हवा की परत प्रदूषकों को नीचे रोके रखती है, जिससे स्थिति और ख़तरनाक हो जाती है।
स्वास्थ्य पर असर
पाकिस्तान वायु गुणवत्ता पहल (PAQI) की रिपोर्ट 'Unveiling Pakistan Air Pollution: A National Landscape Report on Health Risks, Sources, and Solutions' के अनुसार, वायु प्रदूषण पाकिस्तान में जीवन प्रत्याशा को औसतन 3.9 वर्ष तक घटा देता है और हर साल लगभग 1,28,000 असमय मौतों का कारण बनता है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि लाहौर में लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से वहाँ के निवासियों की जीवन प्रत्याशा सात वर्ष तक कम हो सकती है।
गौरतलब है कि लाहौर में पीएम2.5 का वार्षिक औसत स्तर 110 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से अधिक है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के वार्षिक दिशानिर्देश — 5 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर — से 22 गुना से भी ज़्यादा है।
प्रदूषण के मुख्य स्रोत
रिपोर्ट के अनुसार लाहौर में प्राथमिक पीएम2.5 उत्सर्जन का सबसे बड़ा स्रोत परिवहन है। इसके बाद उद्योगों का योगदान 28 प्रतिशत और ईंट भट्टों का 17 प्रतिशत है। रिपोर्ट में कार्बन डाइऑक्साइड, सूक्ष्म कण (पीएम2.5), नाइट्रोजन ऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड का चार शहरी क्षेत्रों में विश्लेषण किया गया है।
यह ऐसे समय में आया है जब कराची, इस्लामाबाद, रावलपिंडी और पेशावर जैसे अन्य बड़े शहर भी प्रदूषण की गंभीर चुनौती से जूझ रहे हैं। रिपोर्ट पाकिस्तान में पहली व्यवस्थित एवं बहुक्षेत्रीय उत्सर्जन सूची प्रस्तुत करती है।
आर्थिक एवं नीतिगत आयाम
PAQI की रिपोर्ट के अनुसार, वायु प्रदूषण पाकिस्तान की GDP पर 6.5 प्रतिशत का आर्थिक बोझ डालता है। रिपोर्ट में सुझाया गया है कि उचित उपायों से उत्सर्जन को 50 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि पाकिस्तानी प्रशासन हर सर्दी में इसी संकट से जूझता है, फिर भी दीर्घकालिक नीतिगत बदलाव अब तक नहीं हो पाए हैं।
क्या होगा आगे
पंजाब में पराली जलाने का मौसम आमतौर पर नवंबर के मध्य तक चरम पर रहता है, जिसका अर्थ है कि निकट भविष्य में वायु गुणवत्ता में सुधार की संभावना सीमित है। यह स्थिति पाकिस्तान की सरकार पर अधिक कठोर प्रवर्तन और वैकल्पिक फसल-अवशेष प्रबंधन नीतियों को लागू करने का दबाव बढ़ाती है।