मिस्र के दक्षिण सिनाई में बस पलटी: 16 की मौत, 28 घायल; सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
सारांश
मुख्य बातें
मिस्र के दक्षिण सिनाई प्रांत में बुधवार, 2 सितंबर को एक यात्री बस के पलट जाने से 16 लोगों की मौत हो गई और 28 अन्य घायल हो गए। मिस्र के स्वास्थ्य एवं जनसंख्या मंत्रालय के हवाले से स्थानीय मीडिया ने यह जानकारी दी।
हादसे का घटनाक्रम
'इजिप्ट टुडे' की रिपोर्ट के अनुसार, यह दुर्घटना अल-सादा इलाके से पहले उस समय हुई जब बस दहाब-नुवेइबा मार्ग पर नुवेइबा की दिशा में जा रही थी। सूचना मिलते ही 20 एंबुलेंस तत्काल घटनास्थल पर भेजी गईं। एंबुलेंस कर्मियों ने मौके पर ही घायलों को प्राथमिक उपचार दिया और उन्हें नज़दीकी अस्पतालों में भर्ती कराया।
सरकार की प्रतिक्रिया
मिस्र के स्वास्थ्य मंत्री खालिद अब्देल गफ्फार ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि घायलों को बेहतर से बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही सामाजिक एकजुटता मंत्री माया मोर्सी ने हादसे से प्रभावित लोगों के लिए तत्काल राहत सहायता जारी करने और ज़रूरी कदम उठाने के आदेश दिए।
मिस्र में सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती चिंता
यह ऐसे समय में आया है जब मिस्र में सड़क हादसे लगातार गंभीर चिंता का विषय बने हुए हैं। गौरतलब है कि इससे पहले अगस्त में इस्माइलिया प्रांत के अल-दवाविस लिंक रोड पर अल-शबाब बिजली स्टेशन के पास कामगारों को ले जा रहे दो वाहनों की आमने-सामने की टक्कर में 18 लोगों की जान गई थी और 30 लोग घायल हुए थे। उस हादसे में घायलों को कसासीन सेंट्रल अस्पताल में भर्ती कराया गया था और अधिकारियों ने दुर्घटना के कारणों की जाँच शुरू की थी।
आँकड़ों की भयावह तस्वीर
केंद्रीय एजेंसी फॉर पब्लिक मोबिलाइजेशन एंड स्टैटिस्टिक्स (CAPMAS) के आँकड़ों के अनुसार, 2025 में मिस्र में सड़क दुर्घटनाओं में मौतों की संख्या 10.8 प्रतिशत बढ़कर 5,829 हो गई। इसी अवधि में घायलों की संख्या भी 10.7 प्रतिशत बढ़कर 84,553 दर्ज की गई। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों में सड़क हादसों से होने वाली मौतें सर्वाधिक रहीं — इस आयु वर्ग में 1,580 बच्चों की जान गई, जबकि 29,101 बच्चे घायल हुए।
आगे क्या
दक्षिण सिनाई के ताज़ा हादसे ने मिस्र में यातायात नियमों के पालन, सड़क बुनियादी ढाँचे की गुणवत्ता और दुर्घटना रोकथाम नीतियों की प्रभावशीलता को लेकर एक बार फिर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना ठोस क्रियान्वयन के केवल आँकड़े जारी करना इस संकट का समाधान नहीं है।