24 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

यूरोप के 854 शहरों में गर्मी से 50,391 मौतें, दो-तिहाई के लिए जलवायु परिवर्तन जिम्मेदार: नई स्टडी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
यूरोप के 854 शहरों में गर्मी से 50,391 मौतें, दो-तिहाई के लिए जलवायु परिवर्तन जिम्मेदार: नई स्टडी

सारांश

2026 की यूरोपीय गर्मी ने इतिहास का नया दुखद रिकॉर्ड बनाया — 854 शहरों में 50,391 अनुमानित मौतें, जिनमें से दो-तिहाई के लिए मानव-जनित जलवायु परिवर्तन को जिम्मेदार ठहराया गया है। 2003 और 2022 की भीषण लहरों को भी यह आँकड़ा पीछे छोड़ गया।

मुख्य बातें

यूरोप के 30 देशों के 854 शहरी क्षेत्रों में 2026 की गर्मियों में अनुमानित 50,391 अतिरिक्त मौतें दर्ज की गईं — वर्ष 2000 के बाद सर्वाधिक।
इनमें से करीब 32,600 मौतें मानव-जनित जलवायु परिवर्तन से जुड़ी हैं, जो कुल का लगभग दो-तिहाई है।
सबसे भीषण दौर 17 जून से 1 जुलाई के बीच रहा; तापमान मौसमी औसत से 12 डिग्री सेल्सियस तक ऊपर गया।
इटली, फ्रांस, स्पेन, जर्मनी और ब्रिटेन में अनुमानित मौतें सर्वाधिक; नेपल्स में प्रति 10 लाख पर 815 मौतें।
अध्ययन का नेतृत्व इंपीरियल कॉलेज लंदन के ग्रांथम इंस्टीट्यूट और लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन ने किया।
शोधकर्ताओं ने उत्सर्जन में कटौती के साथ-साथ शहरों में हरित क्षेत्र विस्तार और पूर्व-चेतावनी तंत्र की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया।

यूरोप के 30 देशों के 854 शहरी क्षेत्रों में 2026 की गर्मियों में गर्मी से होने वाली अनुमानित अतिरिक्त मौतों की संख्या 50,391 रही — जो वर्ष 2000 के बाद किसी भी गर्मी के मौसम में सबसे अधिक है। एक नए अध्ययन के अनुसार, इनमें से करीब 32,600 मौतें मानव-जनित जलवायु परिवर्तन से सीधे जुड़ी हैं, जो कुल अनुमानित मौतों का लगभग दो-तिहाई है। इंपीरियल कॉलेज लंदन के ग्रांथम इंस्टीट्यूट और लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए इस विश्लेषण ने यूरोपीय सार्वजनिक स्वास्थ्य पर बढ़ते तापमान के गहरे असर को उजागर किया है।

अध्ययन की कार्यप्रणाली और दायरा

यह अध्ययन जून से अगस्त 2026 के बीच यूरोपीय संघ के 27 देशों के अलावा ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड और नॉर्वे सहित कुल 30 देशों के 854 शहरी क्षेत्रों पर केंद्रित था। शोधकर्ताओं ने वास्तविक मृत्यु प्रमाणपत्रों की सीधी गिनती के बजाय तापमान डेटा, ऐतिहासिक मृत्यु दर और जलवायु मॉडलों के आधार पर अनुमानित अतिरिक्त मृत्यु दर की गणना की।

जलवायु परिवर्तन की भूमिका का आकलन करने के लिए शोधकर्ताओं ने मौजूदा जलवायु परिस्थितियों की तुलना उस काल्पनिक परिदृश्य से की, जिसमें मानव गतिविधियों के कारण वैश्विक तापमान में वृद्धि नहीं होती। दोनों स्थितियों में अनुमानित गर्मी-संबंधी मृत्यु दर के अंतर को ही जलवायु परिवर्तन का प्रभाव माना गया।

2026 की गर्मी: इतिहास का सबसे घातक मौसम

अध्ययन के अनुसार, गर्मी का सबसे भीषण दौर 17 जून से 1 जुलाई 2026 के बीच रहा, जब क्षेत्र का औसत दैनिक तापमान 1991 से 2020 के औसत से 5 डिग्री सेल्सियस से अधिक ऊपर चला गया। कुछ विशेष दिनों में तापमान मौसमी औसत से 12 डिग्री सेल्सियस तक ऊपर पहुँचा। कुल अनुमानित मौतों में से लगभग एक-तिहाई इसी तीन सप्ताह की अवधि में दर्ज की गईं।

तुलनात्मक रूप से देखें तो 2022 की गर्मियों में लगभग 29,000 और 2003 में करीब 28,000 मौतों का अनुमान लगाया गया था। यह ऐसे समय में आया है जब जलवायु वैज्ञानिक पहले ही चेतावनी दे चुके थे कि अत्यधिक गर्मी की घटनाएँ तीव्र और अधिक लगातार होती जा रही हैं।

सबसे अधिक प्रभावित देश और शहर

पश्चिमी और दक्षिणी यूरोप में तापमान और मृत्यु दर सबसे अधिक रही। पश्चिमी यूरोप का औसत तापमान 1991–2020 के स्तर से करीब 2.9 डिग्री सेल्सियस अधिक था। अनुमानित मौतों की संख्या के लिहाज़ से इटली, फ्रांस, स्पेन, जर्मनी और ब्रिटेन सबसे अधिक प्रभावित देश रहे।

आबादी के अनुपात में माल्टा, इटली और हंगरी सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में रहे। इटली के नेपल्स में आयु-समायोजित आकलन के अनुसार प्रति 10 लाख लोगों पर 815 मौतों का अनुमान सामने आया। ब्रिटेन के 135 शहरी क्षेत्रों में गर्मी से करीब 4,500 मौतें होने का अनुमान है।

स्वास्थ्य पर असर: बुजुर्ग ही नहीं, युवा भी चपेट में

अध्ययन ने इस धारणा को चुनौती दी कि अत्यधिक गर्मी का जोखिम केवल वृद्धों तक सीमित है — इसके दायरे में 65 वर्ष से कम आयु के लोग भी आए। शोधकर्ताओं के अनुसार, बुजुर्गों और पहले से हृदय या सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को अधिक खतरा होता है क्योंकि दिन के समय की अत्यधिक गर्मी शरीर पर दबाव बढ़ाती है, जबकि गर्म रातें शरीर को सामान्य स्थिति में लौटने का पर्याप्त अवसर नहीं देतीं।

गौरतलब है कि शहरी ऊष्मा द्वीप प्रभाव (Urban Heat Island Effect) के कारण शहरी क्षेत्र ग्रामीण इलाकों की तुलना में कहीं अधिक गर्म होते हैं, जिससे घनी आबादी वाले नगर विशेष रूप से संवेदनशील हो जाते हैं।

विशेषज्ञों की चेतावनी और आगे की राह

अध्ययन में शामिल शोधकर्ताओं ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव अब केवल तापमान बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर सीधा और गंभीर असर डाल रहा है। उनके अनुसार, इस जोखिम से निपटने के लिए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में तेज़ कटौती के साथ-साथ शहरों को बढ़ती गर्मी के अनुरूप ढालना अनिवार्य है।

इसके व्यावहारिक उपायों में हरित क्षेत्रों का विस्तार, बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ, तथा अत्यधिक गर्मी के दौरान संवेदनशील आबादी — विशेष रूप से बुजुर्गों और बीमारों — की सुरक्षा के लिए पूर्व-चेतावनी तंत्र और आपातकालीन योजनाएँ शामिल हैं। आने वाले वर्षों में यदि उत्सर्जन नियंत्रण और अनुकूलन नीतियाँ साथ-साथ आगे नहीं बढ़ीं, तो यूरोप के शहरों में गर्मी से होने वाली मौतों का यह आँकड़ा और बड़ा हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

391 का यह आँकड़ा महज एक सांख्यिकीय अनुमान नहीं है — यह उस नीतिगत विफलता का दर्पण है जिसमें यूरोप के शहर दशकों से जलवायु अनुकूलन को प्राथमिकता देने में पीछे रहे हैं। गौरतलब है कि 2003 की हीटवेव के बाद भी यूरोप ने बड़े पैमाने पर चेतावनी तंत्र बनाने का वादा किया था, लेकिन 2026 के आँकड़े बताते हैं कि वह अपर्याप्त रहा। असली सवाल यह है कि जब उत्सर्जन कटौती के लक्ष्य कागज़ पर हैं और शहरीकरण तेज़ हो रहा है, तो बुजुर्ग और कमज़ोर तबकों की सुरक्षा के लिए तत्काल अनुकूलन नीतियाँ कब आएंगी — क्योंकि जलवायु प्रतीक्षा नहीं करती।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 की यूरोपीय गर्मी में कितनी मौतें हुईं और इसका कारण क्या है?
अध्ययन के अनुसार, 2026 की गर्मियों में यूरोप के 854 शहरी क्षेत्रों में अनुमानित 50,391 अतिरिक्त मौतें हुईं, जिनमें से करीब 32,600 मौतों के लिए मानव-जनित जलवायु परिवर्तन को जिम्मेदार ठहराया गया है। यह वर्ष 2000 के बाद किसी भी गर्मी के मौसम में सबसे अधिक है।
यह अध्ययन किसने किया और इसकी पद्धति क्या थी?
यह अध्ययन इंपीरियल कॉलेज लंदन के ग्रांथम इंस्टीट्यूट और लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने किया। ये आँकड़े वास्तविक मृत्यु प्रमाणपत्रों की गिनती नहीं, बल्कि तापमान, ऐतिहासिक मृत्यु दर और जलवायु मॉडलों पर आधारित अनुमान हैं।
2026 की गर्मी 2003 और 2022 की हीटवेव से कितनी अलग थी?
2026 में अनुमानित 50,391 मौतें 2022 की लगभग 29,000 और 2003 की करीब 28,000 अनुमानित मौतों से काफी अधिक हैं। 17 जून से 1 जुलाई के बीच तापमान मौसमी औसत से 12 डिग्री सेल्सियस तक ऊपर पहुँचा, जो 2003 की हीटवेव से भी अधिक तीव्र था।
कौन से देश और शहर सबसे अधिक प्रभावित हुए?
अनुमानित मौतों की संख्या के आधार पर इटली, फ्रांस, स्पेन, जर्मनी और ब्रिटेन सबसे अधिक प्रभावित देश रहे। आबादी के अनुपात में माल्टा, इटली और हंगरी शीर्ष पर थे; इटली के नेपल्स में प्रति 10 लाख लोगों पर 815 मौतों का अनुमान लगाया गया।
गर्मी से होने वाली मौतों को कम करने के लिए क्या उपाय सुझाए गए हैं?
शोधकर्ताओं ने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में तेज़ कटौती के साथ-साथ शहरों में हरित क्षेत्रों का विस्तार, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ और अत्यधिक गर्मी के दौरान बुजुर्गों व संवेदनशील आबादी के लिए पूर्व-चेतावनी तंत्र विकसित करने की सिफारिश की है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 12 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले