फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब का भारत दौरा: एक नया अध्याय

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फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब का भारत दौरा: एक नया अध्याय

सारांश

फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने भारत में अपने दौरे को सफलतापूर्वक पूरा किया, जहाँ उन्होंने तकनीकी सहयोग और रणनीतिक साझेदारी पर जोर दिया। जानें इस दौरे के महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में।

Key Takeaways

  • अलेक्जेंडर स्टब का दौरा भारत-फिनलैंड संबंधों के लिए महत्वपूर्ण है।
  • डिजिटलाइजेशन और स्थायित्व में रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाया गया।
  • तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
  • ग्लोबल साउथ के लिए नई संभावनाएं विकसित करने का मौका।

मुंबई, 8 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने रविवार को भारत का अपना राजकीय दौरा सफलतापूर्वक पूरा किया, जहाँ ग्रामीण विकास और संचार राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने उन्हें गर्मजोशी से विदाई दी।

विदेश मंत्रालय (एमईए) ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस यात्रा के समापन पर लिखा, "फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब का भारत दौरा एक लाभकारी अनुभव रहा। एयरपोर्ट पर उन्हें चंद्रशेखर पेम्मासानी द्वारा तहे दिल से विदाई दी गई।"

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि "भारत-फिनलैंड संबंधों में यह एक मील का पत्थर है क्योंकि यह 'डिजिटलाइजेशन और स्थायित्व में रणनीतिक साझेदारी' की दिशा में बढ़ रहा है, जो दोनों देशों के बीच संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ करेगा।"

स्टब ने अपने भारत दौरे के दौरान भारत और ग्लोबल साउथ की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया, विशेषकर सहयोगात्मक, न्यायसंगत और प्रतिनिधित्वात्मक बहुपक्षीय विश्व व्यवस्था के निर्माण में।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और फिनलैंड के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 5जी और 6जी टेलीकम्युनिकेशन, एडवांस्ड डेटा एनालिटिक्स और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। स्टब के साथ वार्ता के दौरान, दोनों पक्षों ने अनुसंधान में सहयोग को मजबूत करने और नवाचार को बढ़ावा देने पर सहमति जताई।

भारत के विज्ञान और तकनीक विभाग और फिनलैंड की नवाचार फंडिंग एजेंसी बिजनेस फिनलैंड के बीच संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं नवीकरणीय ऊर्जा, स्मार्ट शहरों, हाइड्रोजन प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रिक वाहनों और अपशिष्ट प्रबंधन जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित होंगी।

5 मार्च को नई दिल्ली में रायसीना डायलॉग में अपने संबोधन में, स्टब ने कहा था कि शक्ति संतुलन में बदलाव आया है और ग्लोबल साउथ के पास भौगोलिक और आर्थिक दोनों ताकतें हैं।

उन्होंने कहा था, "हम एक ऐसे देश में हैं जो 7 प्रतिशत की ग्रोथ रेट दिखा रहा है, और शायद 2047 तक यह जारी रहेगा। यह दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। लेकिन मेरा तर्क है कि पश्चिमी देशों के प्रभाव वाली दुनिया का युग समाप्त हो गया है; यही एक लंबे समय से चली आ रही प्रक्रिया में व्यवधान है।"

यह स्पष्ट है, लेकिन पूरे पश्चिम में इसे समझने में कुछ समय लगेगा। अतीत हमें सबक दे सकता है, लेकिन यह हमें शायद ही कभी समाधान देता है। इसलिए, मुझे लगता है कि किसी भी विश्लेषण के लिए एक अच्छा प्रारंभिक बिंदु यह है कि दुनिया जैसी है, उसके साथ वैसा ही व्यवहार किया जाए, न कि ऐसी दुनिया के साथ जैसा हम चाहते हैं कि वह हो।"

स्टब ने कहा कि दुनिया भर में हिंसा का उपयोग विदेश नीति के एक उपकरण के रूप में किया जा रहा है। उन्होंने यूक्रेन, पश्चिम एशिया और सूडान में चल रहे संघर्षों का उल्लेख किया और प्रधानमंत्री मोदी, यूएई के राष्ट्रपति और कतर के अमीर के साथ अपनी बातचीत का भी जिक्र किया।

उन्होंने विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर की बातें दोहराते हुए कहा, "यूरोप को इस सोच से बाहर निकलना होगा कि यूरोप की समस्याएं दुनिया की समस्याएं हैं, लेकिन दुनिया की समस्याएं यूरोप की समस्याएं नहीं हैं।"

"मैं आपसे पूरी तरह सहमत हूं, जयशंकर। हमें यह समझने की जरूरत है कि मैंने जिन तीन उदाहरणों का उल्लेख किया, यूक्रेन, मध्य पूर्व और सूडान, ये सभी हमारी समस्याएं हैं।"

Point of View

वे वैश्विक राजनीति और तकनीकी सहयोग में एक नई दिशा प्रदान करते हैं।
NationPress
09/03/2026

Frequently Asked Questions

भारत और फिनलैंड के बीच तकनीकी सहयोग के क्या क्षेत्र हैं?
भारत और फिनलैंड के बीच सहयोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 5जी, 6जी टेलीकम्युनिकेशन, और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में बढ़ाने की योजना है।
राष्ट्रपति स्टब ने किस महत्वपूर्ण मुद्दे पर बात की?
राष्ट्रपति स्टब ने ग्लोबल साउथ की बढ़ती भूमिका और शक्ति संतुलन में बदलाव के बारे में बात की।
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