18 अक्टूबर 2026
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नेपाल के गढ़ीमाई मंदिर में महाअष्टमी पर उमड़े भारत-नेपाल के श्रद्धालु, हर 5 साल में लगता है दक्षिण एशिया का विशाल मेला

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नेपाल के गढ़ीमाई मंदिर में महाअष्टमी पर उमड़े भारत-नेपाल के श्रद्धालु, हर 5 साल में लगता है दक्षिण एशिया का विशाल मेला

सारांश

नवरात्रि की महाअष्टमी पर नेपाल के बारा जिले के गढ़ीमाई मंदिर में भारत और नेपाल के श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। हर पाँच साल में लगने वाला यह मेला दक्षिण एशिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है, जिसमें बिहार और उत्तर प्रदेश से लाखों भक्त शामिल होते हैं। अगला मेला 2029 में होगा।

मुख्य बातें

18 अक्टूबर 2026 को नवरात्रि की महाअष्टमी पर गढ़ीमाई मंदिर, बारा (नेपाल) में भारत और नेपाल के श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।
गढ़ीमाई का भव्य मेला हर 5 साल में एक बार नवंबर-दिसंबर में आयोजित होता है; पिछला मेला 17 नवंबर से 16 दिसंबर 2024 के बीच हुआ था।
अगला गढ़ी माई मेला 2029 में नवंबर-दिसंबर के दौरान लगेगा।
इस मेले में नेपाल के अलावा बिहार और उत्तर प्रदेश से लाखों श्रद्धालु आते हैं; यह दक्षिण एशिया के सबसे बड़े मेलों में से एक है।
पुजारियों के अनुसार, अनुष्ठान के दौरान मिट्टी के पात्र में स्वयं लौ प्रकट होने की मान्यता है, जिसके बाद सामूहिक बलि की प्रक्रिया शुरू होती है।

नेपाल के बारा जिले के बरियारपुर स्थित प्रसिद्ध गढ़ीमाई मंदिर में 18 अक्टूबर 2026 को नवरात्रि की महाअष्टमी के अवसर पर भारत और नेपाल के श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। श्रद्धालुओं की आस्था है कि इस मंदिर में सच्चे मन से माँगी गई मन्नतें पूरी होती हैं, और यहाँ हर पाँच साल में एक भव्य मेले का आयोजन होता है जो दक्षिण एशिया के सबसे बड़े मेलों में गिना जाता है।

श्रद्धालुओं की आस्था और अनुभव

मंदिर में दर्शन के लिए आए एक श्रद्धालु ने बताया, 'यहाँ पर धार्मिक मान्यता है। यहाँ हम हमेशा से बचपन से आते रहे हैं। जो भी इच्छाएँ अधूरी होती हैं, वह यहाँ आने से पूरी हो जाती हैं।' एक अन्य श्रद्धालु ने कहा, 'यह मंदिर दुनिया भर में प्रसिद्ध है और यहाँ आने से मन्नतें पूरी होती हैं।'

तीसरे श्रद्धालु ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, 'अष्टमी के दिन यहाँ आने वाले सभी श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होती है। मेले के समय यहाँ लाखों की भीड़ होती है और मैं हर साल आता हूँ।'

पुजारी ने बताई मंदिर की मान्यताएँ

मंदिर के एक पुजारी ने बताया, 'यह माता काली (गढ़ी माई) का स्थान है। यहाँ पाँच वर्ष में एक बार मेला लगता है और भव्य पूजा होती है। जब पाँच बरस में यहाँ माता का आगमन होता है, तो मंदिर में खुद-ब-खुद दीप जल जाता है।' स्थानीय मान्यताओं और पुजारियों के अनुसार, अनुष्ठान और झाँकी के दौरान वहाँ रखे एक मिट्टी के पात्र में स्वयं लौ प्रकट होती है, जिसके बाद ही सामूहिक बलि की प्रक्रिया आरंभ होती है।

गढ़ीमाई मेले का महत्त्व और इतिहास

गढ़ीमाई देवी को शक्ति, ऊर्जा और समृद्धि की देवी माना जाता है। नेपाल के बारा जिले में स्थित यह मंदिर ऐतिहासिक रूप से बड़े पैमाने पर होने वाली पशु बलि के लिए विश्व भर में चर्चित रहा है। इस मेले में नेपाल के साथ-साथ भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश से लाखों श्रद्धालु दर्शन और मन्नत माँगने पहुँचते हैं।

गौरतलब है कि यह आयोजन दक्षिण एशिया के सबसे विशाल धार्मिक जनसमागमों में से एक है, जहाँ विविध सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का संगम होता है। भारत-नेपाल की साझा आस्था का यह प्रतीक दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को भी रेखांकित करता है।

अगला मेला और भविष्य का कार्यक्रम

गढ़ी माई का भव्य मेला हर 5 साल में एक बार नवंबर-दिसंबर के महीने में आयोजित होता है। पिछला मेला 17 नवंबर से 16 दिसंबर 2024 के बीच संपन्न हुआ था। अब अगला गढ़ी माई मेला वर्ष 2029 में नवंबर-दिसंबर के दौरान आयोजित होगा। महाअष्टमी पर इस वर्ष श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़ इस बात का संकेत है कि मेले वाले वर्षों के बाहर भी मंदिर की आस्था और महत्ता अटूट बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारत-नेपाल के गहरे सांस्कृतिक संबंधों की जीवंत अभिव्यक्ति भी है। यह मंदिर दशकों से पशु बलि के कारण अंतरराष्ट्रीय पशु अधिकार संगठनों के निशाने पर रहा है, फिर भी श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई — यह परंपरा और आधुनिकता के बीच जारी तनाव को दर्शाता है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर केवल बलि-प्रसंग पर केंद्रित हो जाती है, जबकि इस आयोजन की विशालता और सीमापारीय सांस्कृतिक एकता उतनी ही महत्त्वपूर्ण कहानी है जो अनकही रह जाती है।
RashtraPress
18 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गढ़ीमाई मंदिर नेपाल में कहाँ स्थित है?
गढ़ीमाई मंदिर नेपाल के बारा जिले के बरियारपुर में स्थित है। यह भारत-नेपाल सीमा के निकट है, जिसके कारण बिहार और उत्तर प्रदेश के श्रद्धालु बड़ी संख्या में यहाँ आते हैं।
गढ़ी माई मेला कब-कब लगता है और अगला मेला कब होगा?
गढ़ी माई मेला हर 5 साल में एक बार नवंबर-दिसंबर के महीने में लगता है। पिछला मेला 17 नवंबर से 16 दिसंबर 2024 के बीच हुआ था, और अगला मेला 2029 में नवंबर-दिसंबर के दौरान आयोजित होगा।
गढ़ीमाई देवी कौन हैं और इनका क्या महत्त्व है?
गढ़ीमाई देवी को शक्ति, ऊर्जा और समृद्धि की देवी माना जाता है। भक्तों की आस्था है कि सच्चे मन से प्रार्थना करने पर देवी हर मनोकामना पूरी करती हैं, जिसके कारण यह मंदिर दक्षिण एशिया में विशेष धार्मिक महत्त्व रखता है।
गढ़ीमाई मेले में दीप स्वयं जलने की मान्यता क्या है?
मंदिर के पुजारियों और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, पाँच साल में होने वाले मेले के अनुष्ठान के दौरान मंदिर में रखे एक मिट्टी के पात्र में स्वयं लौ प्रकट होती है। इसी को माता के आगमन का संकेत माना जाता है, जिसके बाद सामूहिक बलि की प्रक्रिया आरंभ होती है।
गढ़ीमाई मेले में कौन-कौन से देशों और राज्यों से श्रद्धालु आते हैं?
गढ़ीमाई मेले में मुख्य रूप से नेपाल, भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश से लाखों श्रद्धालु दर्शन और मन्नत माँगने पहुँचते हैं। यह मेला दक्षिण एशिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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