नेपाल के गढ़ीमाई मंदिर में महाअष्टमी पर उमड़े भारत-नेपाल के श्रद्धालु, हर 5 साल में लगता है दक्षिण एशिया का विशाल मेला
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल के बारा जिले के बरियारपुर स्थित प्रसिद्ध गढ़ीमाई मंदिर में 18 अक्टूबर 2026 को नवरात्रि की महाअष्टमी के अवसर पर भारत और नेपाल के श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। श्रद्धालुओं की आस्था है कि इस मंदिर में सच्चे मन से माँगी गई मन्नतें पूरी होती हैं, और यहाँ हर पाँच साल में एक भव्य मेले का आयोजन होता है जो दक्षिण एशिया के सबसे बड़े मेलों में गिना जाता है।
श्रद्धालुओं की आस्था और अनुभव
मंदिर में दर्शन के लिए आए एक श्रद्धालु ने बताया, 'यहाँ पर धार्मिक मान्यता है। यहाँ हम हमेशा से बचपन से आते रहे हैं। जो भी इच्छाएँ अधूरी होती हैं, वह यहाँ आने से पूरी हो जाती हैं।' एक अन्य श्रद्धालु ने कहा, 'यह मंदिर दुनिया भर में प्रसिद्ध है और यहाँ आने से मन्नतें पूरी होती हैं।'
तीसरे श्रद्धालु ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, 'अष्टमी के दिन यहाँ आने वाले सभी श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होती है। मेले के समय यहाँ लाखों की भीड़ होती है और मैं हर साल आता हूँ।'
पुजारी ने बताई मंदिर की मान्यताएँ
मंदिर के एक पुजारी ने बताया, 'यह माता काली (गढ़ी माई) का स्थान है। यहाँ पाँच वर्ष में एक बार मेला लगता है और भव्य पूजा होती है। जब पाँच बरस में यहाँ माता का आगमन होता है, तो मंदिर में खुद-ब-खुद दीप जल जाता है।' स्थानीय मान्यताओं और पुजारियों के अनुसार, अनुष्ठान और झाँकी के दौरान वहाँ रखे एक मिट्टी के पात्र में स्वयं लौ प्रकट होती है, जिसके बाद ही सामूहिक बलि की प्रक्रिया आरंभ होती है।
गढ़ीमाई मेले का महत्त्व और इतिहास
गढ़ीमाई देवी को शक्ति, ऊर्जा और समृद्धि की देवी माना जाता है। नेपाल के बारा जिले में स्थित यह मंदिर ऐतिहासिक रूप से बड़े पैमाने पर होने वाली पशु बलि के लिए विश्व भर में चर्चित रहा है। इस मेले में नेपाल के साथ-साथ भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश से लाखों श्रद्धालु दर्शन और मन्नत माँगने पहुँचते हैं।
गौरतलब है कि यह आयोजन दक्षिण एशिया के सबसे विशाल धार्मिक जनसमागमों में से एक है, जहाँ विविध सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का संगम होता है। भारत-नेपाल की साझा आस्था का यह प्रतीक दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को भी रेखांकित करता है।
अगला मेला और भविष्य का कार्यक्रम
गढ़ी माई का भव्य मेला हर 5 साल में एक बार नवंबर-दिसंबर के महीने में आयोजित होता है। पिछला मेला 17 नवंबर से 16 दिसंबर 2024 के बीच संपन्न हुआ था। अब अगला गढ़ी माई मेला वर्ष 2029 में नवंबर-दिसंबर के दौरान आयोजित होगा। महाअष्टमी पर इस वर्ष श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़ इस बात का संकेत है कि मेले वाले वर्षों के बाहर भी मंदिर की आस्था और महत्ता अटूट बनी हुई है।