मां कालिका मंदिर: नवरात्रि में शारीरिक और मानसिक विकारों से मुक्ति का अद्भुत स्थल

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मां कालिका मंदिर: नवरात्रि में शारीरिक और मानसिक विकारों से मुक्ति का अद्भुत स्थल

सारांश

मां कालिका का मंदिर, गुजरात में, नवरात्रि के दौरान भक्तों के लिए एक अद्भुत स्थान है। यहां की पौराणिक कथाएं और अलौकिक ऊर्जा लोगों को शारीरिक एवं मानसिक विकारों से मुक्ति दिलाती हैं।

मुख्य बातें

मां कालिका मंदिर गुजरात के पंचमहल जिले में स्थित है।
यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में शामिल है।
भक्त यहां 800 मीटर ऊंचाई पर चढ़कर दर्शन करते हैं।
नवरात्रि के समय लाखों भक्त विशेष पूजा में भाग लेते हैं।
यहां की पौराणिक कथाएं इसे अद्वितीय बनाती हैं।

नई दिल्ली, 9 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। हमारे देश के हर मंदिर का इतिहास प्राचीन पुराणों से जुड़ा हुआ है। हर मंदिर की अनोखी कथा और महत्व उन्हें अन्य मंदिरों से अलग बनाती है।

गुजरात के पंचमहल जिले में स्थित मां कालिका का मंदिर विशेष रूप से प्रसिद्ध है। नवरात्रि के दौरान, भक्त यहां 800 मीटर ऊंचाई पर पैदल चलकर मां के दर्शन के लिए चढ़ते हैं।

पावागढ़ में मौजूद कालिका मंदिर की मान्यता पूरे गुजरात में फैली हुई है। यह मंदिर भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है, जहां भक्तों की हर मन्नत पूरी होती है। तंत्र समस्याओं से जूझ रहे लोग भी मां कालिका के दर्शन कर अपनी समस्याओं से निजात पाते हैं। मां काली शारीरिक और मानसिक विकारों से मुक्ति दिलाने में मददगार मानी जाती हैं, इसलिए परेशानी में रहने वाले लोग यहां अधिक आते हैं।

चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान, लाखों भक्त मां भवानी से कष्टों से राहत पाने की प्रार्थना करने आते हैं। हालांकि, मंदिर तक पहुंचने का मार्ग बहुत कठिन नहीं है। भक्तों के लिए लगभग 1800 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, जबकि उनकी सुविधा के लिए रोपवे की व्यवस्था भी की गई है। नवरात्रि के समय यहां विशेष पूजा, संकीर्तन और यज्ञ का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त शामिल होते हैं।

मां काली का यह मंदिर पहाड़ी पर 800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, जहां से पावागढ़ का अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है। मंदिर की संरचना में दक्षिण भारतीय शैली की झलक दिखाई देती है। मान्यता है कि जब भगवान शिव माता सती के शव को लेकर तांडव कर रहे थे, तब भगवान विष्णु ने सृष्टि के संरक्षण के लिए सती के शरीर के टुकड़े कर दिए थे।

कहा जाता है कि यही वह स्थान है, जहां माता सती का दाहिना पैर गिरा था। कई अन्य स्थानों पर वक्षस्थल गिरने की भी बातें की जाती हैं। यही कारण है कि इसे ऊर्जा का सबसे शक्तिशाली स्थान माना जाता है। मंदिर के प्रवेश करते ही भक्तों को अलौकिक शक्तियों का अनुभव होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो न केवल भक्तों के लिए आस्था का केंद्र है, बल्कि यहां की पौराणिक कथाएं और अलौकिक ऊर्जा इसे अद्वितीय बनाती हैं। भक्तजन यहां शारीरिक और मानसिक विकारों से मुक्ति की तलाश में आते हैं, जो इस मंदिर की महत्वता को और भी बढ़ाते हैं।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मां कालिका मंदिर कहां स्थित है?
मां कालिका का मंदिर गुजरात के पंचमहल जिले के पावागढ़ में स्थित है।
क्या मां कालिका के दर्शन से मानसिक विकारों से मुक्ति मिलती है?
हां, मां कालिका को शारीरिक और मानसिक विकारों से मुक्ति दिलाने वाली देवी माना जाता है।
नवरात्रि में कितने भक्त यहां आते हैं?
नवरात्रि के दौरान लाखों भक्त यहां मां भवानी से कष्टों से मुक्ति पाने की प्रार्थना करने आते हैं।
मंदिर तक पहुंचने का रास्ता कैसा है?
मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 1800 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, इसके अलावा रोपवे की भी सुविधा है।
मंदिर का निर्माण किस शैली में किया गया है?
मंदिर की संरचना में दक्षिण भारतीय शैली की झलक दिखाई देती है।
राष्ट्र प्रेस
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