गगन थापा 6,584 वोटों से नेपाली कांग्रेस के दोबारा अध्यक्ष, देउबा गुट दिसंबर में करेगा अलग महाधिवेशन
सारांश
मुख्य बातें
नेपाली कांग्रेस के 15वें महाधिवेशन में गगन थापा ने 6,584 वोट हासिल कर भारी बहुमत से दोबारा पार्टी अध्यक्ष पद जीत लिया है। 10 अक्टूबर 2026 को काठमांडू में घोषित इस नतीजे ने पार्टी के भीतर थापा गुट की पकड़ को और मजबूत किया है, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के नेतृत्व वाला विरोधी धड़ा 7 से 9 दिसंबर 2026 के बीच अपना अलग महाधिवेशन आयोजित करने की तैयारी में है।
चुनाव का ब्यौरा
पार्टी की केंद्रीय निर्वाचन समिति के अनुसार, कुल 7,013 वोट डाले गए, जिनमें से 54 वोट अमान्य घोषित किए गए। थापा के प्रतिद्वंद्वी श्याम कृष्ण खड्गी को मात्र 375 वोट मिले। इस जीत के साथ विश्व प्रकाश शर्मा वरिष्ठ उपाध्यक्ष चुने गए हैं। दोनों नेताओं ने कहा है कि वे युवा ऊर्जा और नई सोच के ज़रिये पार्टी में बदलाव लाना चाहते हैं।
गौरतलब है कि जनवरी 2026 में थापा गुट द्वारा आयोजित विशेष महाधिवेशन के ज़रिये वे पहली बार अध्यक्ष बने थे। उस समय से ही पार्टी में दोहरे नेतृत्व की स्थिति बनी हुई है।
देउबा गुट की चुनौती
देउबा के नेतृत्व वाला गुट 7 से 9 दिसंबर 2026 के बीच अपना अलग 15वाँ महाधिवेशन आयोजित करने की योजना बना रहा है। यह गुट दावा करता है कि वही असली नेपाली कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करता है। दोनों गुटों की वैधता का मामला फिलहाल नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
हालांकि, 5 मार्च 2026 के आम चुनाव से पहले नेपाल के चुनाव आयोग ने थापा गुट को ही आधिकारिक नेपाली कांग्रेस के रूप में मान्यता दी थी, और उसी आधार पर पार्टी ने चुनाव लड़ा था।
चुनावी झटके के बाद की स्थिति
थापा की यह जीत ऐसे कठिन दौर में आई है जब पार्टी 5 मार्च 2026 के संसदीय चुनाव में दूसरे स्थान पर रही। खुद थापा भी अपनी सीट गँवा बैठे थे। तुलनात्मक रूप से नई राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (RSP) 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में लगभग दो-तिहाई बहुमत के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।
यह ऐसे समय में आया है जब नेपाली कांग्रेस की जड़ें कमज़ोर पड़ रही हैं और नई पीढ़ी के मतदाता वैकल्पिक राजनीतिक विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।
गगन थापा: एक राजनीतिक सफ़र
50 वर्षीय गगन थापा 2006 के जनआंदोलन के दौरान नेपाल छात्र संघ के अध्यक्ष के रूप में चर्चित हुए थे। उस समय जब नेपाली कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व गणतंत्र की माँग पर अधिक मुखर नहीं था, थापा ने राजशाही के विरुद्ध खुलकर आवाज़ उठाई।
जनआंदोलन की सफलता के बाद वे 2008 के संविधान सभा चुनाव में समानुपातिक प्रतिनिधित्व सूची के ज़रिये पहली बार संविधान सभा पहुँचे। 2013 में उन्होंने काठमांडू-4 सीट से प्रत्यक्ष चुनाव जीता और 2017 तथा 2022 में यही सीट बरकरार रखी। 2016 के 13वें महाधिवेशन में महासचिव पद का पहला प्रयास असफल रहा, परंतु 2021 के 14वें महाधिवेशन में वे इसी पद पर निर्वाचित हुए।
आगे की राह
थापा के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी में औपचारिक विभाजन रोकना है। सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय पार्टी के भविष्य की दिशा तय करेगा। विश्लेषकों का मानना है कि यदि देउबा गुट अपना अलग महाधिवेशन करता है, तो नेपाली कांग्रेस की छवि को और नुकसान पहुँच सकता है और पार्टी के लिए 2030 के चुनावों में वापसी और मुश्किल हो जाएगी।