क्या सुप्रीम कोर्ट नेपाली कांग्रेस की वैधता विवाद पर फैसला करेगा?
सारांश
Key Takeaways
- नेपाली कांग्रेस में दो गुटों के बीच वैधता का विवाद चल रहा है।
- पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा का गुट सुप्रीम कोर्ट में जा सकता है।
- चुनाव आयोग ने गगन थापा के नेतृत्व को मान्यता दी है।
- सुप्रीम कोर्ट का फैसला आगामी चुनावों पर प्रभाव डाल सकता है।
- राजनीतिक एकता के लिए पार्टी के भीतर संवाद आवश्यक है।
काठमांडू, १७ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। नेपाली कांग्रेस के दो गुटों के बीच चल रहे वैधता विवाद का निर्णय अब नेपाल के सुप्रीम कोर्ट में होने की संभावना है। पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के नेतृत्व वाले गुट ने शनिवार को चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख करने का निर्णय लिया।
यह निर्णय ऐसे समय में आया है, जब एक दिन पहले ही चुनाव आयोग ने गगन थापा के नेतृत्व में हाल ही में आयोजित विशेष महासभा (स्पेशल जनरल कन्वेंशन—एसजीसी) से चुने गए नेतृत्व को नेपाली कांग्रेस के वैध नेतृत्व के रूप में मान्यता दे दी थी।
वास्तव में, दोनों गुटों ने खुद को नेपाली कांग्रेस का असली प्रतिनिधि बताते हुए चुनाव आयोग का रुख किया था। आयोग ने शुक्रवार को ११ से १४ जनवरी के बीच आयोजित एसजीसी में चुनी गई केंद्रीय कार्यसमिति को मान्यता दे दी। यह महासभा देउबा गुट की मंजूरी के बिना आयोजित की गई थी।
चुनाव आयोग द्वारा वैध नेतृत्व के रूप में खारिज किए जाने के बाद, देउबा गुट ने निर्णय लिया कि वह जल्द से जल्द, संभवतः रविवार को ही, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेगा।
देउबा गुट की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया, “बैठक में कार्यवाहक अध्यक्ष पूर्ण बहादुर खड़का को यह अधिकार दिया गया है कि वे चुनाव आयोग के शुक्रवार के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मामला दायर करें और अन्य कानूनी कदम उठाएं। यह फैसला नेपाल के संविधान, प्रचलित कानूनों और नेपाली कांग्रेस के विधान का उल्लंघन है।”
गुट ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने उनके द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों पर विचार किए बिना एकतरफा निर्णय लिया।
वहीं, गगन थापा के नेतृत्व वाले नेपाली कांग्रेस धड़े ने भी शनिवार को बैठक की और ५ मार्च को होने वाले संसदीय चुनावों से पहले पार्टी में एकता बनाए रखने की अपील करने का फैसला किया।
पार्टी के प्रवक्ता देवराज चालिसे ने मीडिया को बताया कि नवनिर्वाचित केंद्रीय कार्यसमिति की बैठक में आगामी चुनावों को देखते हुए नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच एकता पर जोर दिया गया है।
इस गुट ने यह भी निर्णय लिया कि देउबा, जो फिलहाल अलग धड़े का नेतृत्व कर रहे हैं, से अनुरोध किया जाएगा कि वे थापा के नेतृत्व वाली पार्टी में संरक्षक जैसी भूमिका निभाएं।
चुनाव आयोग द्वारा थापा गुट को मान्यता दिए जाने के बाद देउबा गुट के लिए समय बेहद अहम हो गया है, क्योंकि फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट (एफपीटीपी) प्रणाली के तहत उम्मीदवारों के नामांकन की अंतिम तिथि २० जनवरी है।
यदि सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग के फैसले पर अंतरिम रोक नहीं लगाता है, तो थापा के नेतृत्व वाली नेपाली कांग्रेस ही एफपीटीपी प्रणाली के तहत उम्मीदवारों का नामांकन करेगी, जो देउबा गुट के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
हालांकि, आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत उम्मीदवारों की बंद सूची पहले ही चुनाव आयोग को सौंपी जा चुकी है।
नेपाल की प्रतिनिधि सभा में कुल २७५ सदस्य होते हैं, जिनमें से १६५ का चुनाव एफपीटीपी प्रणाली से और ११० का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के जरिए होता है।