क्या मुनीर गिलगित-बाल्टिस्तान की निराश जनता को झूठे सपने दिखा रहे हैं?

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क्या मुनीर गिलगित-बाल्टिस्तान की निराश जनता को झूठे सपने दिखा रहे हैं?

सारांश

गिलगित-बाल्टिस्तान में बढ़ते सैन्यीकरण के बीच पाकिस्तान की सेना प्रमुख जनरल मुनीर ने स्थानीय लोगों को 6 ट्रिलियन डॉलर के खनिज संसाधनों के सपने दिखाए हैं। हालाँकि, स्थानीय जनता में निराशा गहराती जा रही है। क्या यह सच में एक नया सपना है या फिर एक और धोखा?

Key Takeaways

  • संसाधनों का सैन्यीकरण स्थानीय प्रशासन को कमजोर कर रहा है।
  • जनरल मुनीर ने 6 ट्रिलियन डॉलर के खनिज संसाधनों की बात की है।
  • स्थानीय जनता में निराशा बढ़ती जा रही है।
  • विरोध प्रदर्शन आर्थिक मांगों से ज़्यादा हैं।
  • स्थानीय मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

इस्लामाबाद, 9 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान के नियंत्रण में गिलगित-बाल्टिस्तान (पीओजीबी) में संसाधनों का बढ़ता सैन्यीकरण यह दर्शाता है कि इस्लामाबाद आर्थिक केंद्रीकरण की नीति पर निरंतर आगे बढ़ रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र को सामाजिक-आर्थिक रूप से मुख्यधारा से जोड़ने के बजाय एक रणनीतिक बफर ज़ोन के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) विकास का आश्वासन लेकर आया था, लेकिन इसके चलते स्थानीय लोगों में निराशा और अधिक गहरी होती जा रही है।

अफगान डायस्पोरा नेटवर्क की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने एक बार फिर यह दावा किया है कि देश की समृद्धि उसकी ज़मीन के नीचे छिपी हुई है। उन्होंने लगभग 6 ट्रिलियन डॉलर के खनिज संसाधनों के दोहन की योजना का खाका प्रस्तुत करते हुए कहा है कि पीओजीबी और खैबर पख्तूनख्वा (केपी) में दुर्लभ खनिजों की खोज पाकिस्तान को आर्थिक संकट से उबार सकती है।

रिपोर्ट में बताया गया है, “यह कथानक निराश जनता को उम्मीद बेचता है, लेकिन इस बयानबाजी के पीछे संस्थागत अतिक्रमण, संसाधनों का सैन्यीकरण और पाकिस्तान के सीमांत क्षेत्रों की लगातार उपेक्षा का गहरा पैटर्न छिपा हुआ है।” रिपोर्ट के अनुसार, इस नए खनन अभियान का केंद्र स्पेशल फैसिलिटेशन इन्वेस्टमेंट काउंसिल है, जो एक सैन्य-प्रभावित निकाय है और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के नाम पर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए बनाई गई थी।

हालांकि, रिपोर्ट का दावा है कि वास्तविकता में एसआईएफसी रणनीतिक क्षेत्रों, खासकर खनिज और ऊर्जा संसाधनों पर सेना के नियंत्रण को मजबूत करने का माध्यम बन गया है।

रिपोर्ट में बताया गया कि 25 अप्रैल, 2025 को एसआईएफसी ने माइनिंग एंड मिनरल संशोधन अधिनियम 2025 का मसौदा तैयार कर उसे लागू किया, जिससे खनन से जुड़े अधिकार संघीय सरकार के पास केंद्रित हो गए। यह संघीय ढांचा अब सीधे तौर पर सेना के प्रभाव में काम कर रहा है, जिससे क्षेत्रीय प्रशासन को हाशिये पर धकेल दिया गया और मौजूदा नियंत्रण व संतुलन की व्यवस्था कमजोर हो गई।

इसके अलावा, पाकिस्तान की संघीय सरकार ने 15 अगस्त, 2024 को अधिसूचित पीओजीबी माइनिंग कंसेशन रूल्स 2024 में संशोधन किया, जिससे इस्लामाबाद का नियंत्रण और मजबूत हुआ और पीओजीबी की प्रशासनिक स्वायत्तता सीमित हो गई। इस निर्णय से पूरे क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया।

रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2025 में शिगर घाटी में वर्षों का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला, जिसका नेतृत्व के-2 एक्शन कमेटी ने किया। स्थानीय निवासियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और व्यापारियों ने सड़कों पर उतरकर “कब्जे पर कब्जा नामंजूर” जैसे नारे लगाए।

रिपोर्ट में कहा गया कि यह विरोध केवल आर्थिक मांगों तक सीमित नहीं था, बल्कि दशकों से चले आ रहे शोषण, उपेक्षा और राजनीतिक हाशियाकरण के खिलाफ एक व्यापक प्रतिरोध का प्रतीक था।

Point of View

हमारा दृष्टिकोण यह है कि स्थानीय जनता की आवाज़ को समझना और उनकी समस्याओं को प्राथमिकता देना आवश्यक है। संसाधनों का सैन्यीकरण और राजनीतिक हाशियाकरण से लोगों की समस्याएं और बढ़ रही हैं। हमें एक संतुलित और न्यायपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।
NationPress
10/01/2026

Frequently Asked Questions

गिलगित-बाल्टिस्तान में सैन्यीकरण का क्या प्रभाव है?
सैन्यीकरण के कारण स्थानीय प्रशासन की शक्ति कम हो रही है और संसाधनों का नियंत्रण सेना के हाथों में जा रहा है।
क्या जनरल मुनीर के दावे सच हैं?
उनके दावे में खनिज संसाधनों की संभावनाएं हैं, लेकिन स्थानीय जनता की असंतोष और निराशा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
स्थानीय जनता का विरोध क्यों हो रहा है?
स्थानीय जनता का विरोध दशकों से चले आ रहे शोषण और उपेक्षा के खिलाफ है।
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