WTO प्रमुख न्गोजी ओकोन्जो इवेला का बयान: टैरिफ, ईरान संघर्ष के बावजूद वैश्विक व्यापार अपेक्षा से मज़बूत
सारांश
मुख्य बातें
विश्व व्यापार संगठन (WTO) की महानिदेशक न्गोजी ओकोन्जो इवेला ने 5 अक्टूबर 2026 को स्वीकार किया कि अमेरिकी टैरिफ की कड़ाई, ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा बाज़ारों में व्यवधान, ऊर्जा की ऊँची कीमतों और नियम आधारित व्यापार प्रणाली पर बढ़ते दबाव के बावजूद वैश्विक व्यापार उनकी अपनी संस्था के अनुमानों से कहीं बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़े उत्पादों की माँग इस अप्रत्याशित मज़बूती की प्रमुख वजहों में से एक है, साथ ही उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि यह प्रणाली अभी भी असुरक्षित बनी हुई है।
वैश्विक व्यापार की मौजूदा स्थिति
ओकोन्जो इवेला ने एक साक्षात्कार में बताया कि दुनिया के कुल वस्तु व्यापार का 72 प्रतिशत अब भी WTO की 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' (MFN) शर्तों के अंतर्गत संचालित हो रहा है। यह आँकड़ा इस मायने में महत्वपूर्ण है क्योंकि यह कारोबारियों को अनिश्चित भू राजनीतिक माहौल में भी पूर्वानुमान और स्थिरता प्रदान करता है। उन्होंने कहा, "हम बिजनेस से बात करते हैं, और उन्हें अपने व्यापार के तरीके में कुछ स्थिरता और निश्चितता की जरूरत होती है।"
उन्होंने इसे 'प्रेडिक्टेबल स्टेबल' — यानी भरोसेमंद और स्थिर — की संज्ञा दी और कहा कि कंपनियाँ बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली पर अपना भरोसा इसीलिए बनाए रखती हैं।
AI उत्पादों की भूमिका
ओकोन्जो इवेला के अनुसार, पिछले वर्ष वैश्विक वस्तु व्यापार में हुई कुल बढ़ोतरी में AI से जुड़े उत्पादों का हिस्सा 42 प्रतिशत रहा। यह तथ्य इस बात का संकेत है कि पारंपरिक क्षेत्रों में अनिश्चितता के बावजूद तकनीकी उत्पादों की माँग वैश्विक व्यापार को थामे हुए है। उन्होंने कहा, "शायद सबसे हैरान करने वाली बात असल व्यापार में हुई बढ़ोतरी की मजबूती रही है।"
जिस परिस्थिति में आया यह बयान
यह बयान ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अगुआई में अमेरिकी व्यापार नीति में बुनियादी बदलाव हुए हैं। वाशिंगटन और बीजिंग के बीच व्यापार तनाव बढ़ा है, ईरान संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों को अस्थिर किया है और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों पर भी दबाव बना हुआ है। गौरतलब है कि इन सभी कारकों को आमतौर पर व्यापार संकुचन के संकेत माना जाता है।
ओकोन्जो इवेला ने खुद माना, "मैं पूरी ईमानदारी से कहूँगी कि हम भी इस मजबूती से हैरान हैं और इसके लिए आभारी हैं।"
चेतावनी और आगे की राह
हालाँकि WTO महानिदेशक ने राहत की साँस लेते हुए भी सतर्क रवैया अपनाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'दुनिया वैसी नहीं रही जैसी पहले थी' और वैश्विक व्यापार नियम अभी भी भारी दबाव में हैं। उनका कहना था कि नियम आधारित बहुपक्षीय प्रणाली की कमज़ोरियाँ बरकरार हैं और किसी भी बड़े भू राजनीतिक झटके से यह तस्वीर बदल सकती है।
आने वाले महीनों में WTO के अनुमान और अमेरिकी टैरिफ नीति की दिशा यह तय करेगी कि यह मज़बूती टिकाऊ है या केवल एक अल्पकालिक राहत।