क्या व्यापार तनाव से शांति स्थापना संभव है? डब्ल्यूईएफ 2026 में महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा
सारांश
Key Takeaways
- दुनिया के नेताओं ने वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा की।
- व्यापारिक मतभेदों से वैश्विक व्यापार व्यवस्था को खतरा है।
- धर्मों के बीच संवाद से स्थिरता की संभावना बढ़ी।
- अर्थव्यवस्था में मजबूती के संकेत मिले हैं।
- एआई का श्रम बाजार पर प्रभाव बढ़ रहा है।
दावोस, 24 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। 19 से 23 जनवरी तक स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) 2026 की 56वीं वार्षिक बैठक में दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। नीति निर्माताओं और महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाले नेताओं ने मिलकर ऐसे मुद्दों पर विचार किया, जो दुनिया के भविष्य को प्रभावित करते हैं।
डब्ल्यूईएफ के अनुसार, इस बैठक में 130 देशों से लगभग 3,000 नेता शामिल हुए, जिनमें 400 प्रमुख राजनीतिक नेता, करीब 65 राष्ट्राध्यक्ष और सरकार के प्रमुख, जी-7 देशों के अधिकांश नेता, और दुनिया की 830 से अधिक बड़ी कंपनियों के सीईओ और अध्यक्ष शामिल थे।
विश्व आर्थिक मंच के अध्यक्ष और सीईओ बोर्गे ब्रेंडे ने कहा कि यह समय अनिश्चितताओं से भरा है, लेकिन साथ ही यह नए अवसरों का भी समय है। उन्होंने कहा कि यह पीछे हटने का नहीं, बल्कि एक-दूसरे से जुड़कर आगे बढ़ने का समय है।
एक सत्र में, विशेषज्ञों ने अमेरिका-चीन व्यापार समझौते के बाद दोनों देशों के रिश्तों पर चर्चा की, यह समझने की कोशिश की कि इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर क्या असर पड़ेगा।
एक अन्य चर्चा में, पश्चिमी तट और गाजा में आर्थिक दबावों के बीच वित्तीय व्यवस्था को मजबूत करने के उपायों पर बात की गई।
धार्मिक नेताओं ने चर्चा की कि धर्मों के बीच संवाद गाजा में स्थिरता लाने और अन्य संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में शांति स्थापित करने में कैसे मदद कर सकता है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मानव इतिहास में पहले कभी इतने बड़े और शानदार अवसर नहीं थे, जितने आज मौजूद हैं।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि हमें अपने मित्र देशों के साथ ही नहीं, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर विरोधियों के साथ भी संवाद करना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया स्थायी रूप से बदल चुकी है और हमें भी उसी के अनुसार खुद को बदलना होगा।
डब्ल्यूईएफ की 'मुख्य अर्थशास्त्रियों की रिपोर्ट' में आने वाले वर्ष के लिए वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति का आकलन किया गया, जिसमें बताया गया कि कई मुश्किलों के बावजूद अर्थव्यवस्था में कुछ हद तक मजबूती बनी हुई है। रिपोर्ट में संपत्ति की कीमतों, सरकारी कर्ज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते उपयोग को लेकर अनिश्चितताओं पर भी चर्चा की गई।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा कि एआई का असर श्रम बाजार पर सुनामी की तरह पड़ रहा है और सबसे तैयार देश भी इसके लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं।
एनवीडिया के संस्थापक और सीईओ जेंसन हुआंग ने विकासशील देशों से अपील की कि वे अपना इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करें और एआई को अपनाएं। उन्होंने कहा कि एआई से तकनीकी अंतर कम किया जा सकता है।
डब्ल्यूईएफ के अनुसार, अर्थशास्त्र के पांच नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने भी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अपने नए शोध और विचार साझा किए। नेताओं ने चेतावनी दी कि दुनिया के बड़े देशों के बीच व्यापारिक मतभेद बढ़ने से वैश्विक व्यापार व्यवस्था को नुकसान हो सकता है। उन्होंने जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार से सभी देशों को आपसी फायदा होता है।