वैश्विक संघर्षों का हल कूटनीति और संवाद में: पूर्व राजनयिक के.पी. फैबियन का विश्लेषण
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व राजनयिक के.पी. फैबियन ने 24 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि यूक्रेन से लेकर पश्चिम एशिया तक जारी संघर्षों को समाप्त करने का एकमात्र रास्ता कूटनीति और संवाद है — न कोई नया, न कोई पुराना विकल्प। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बार-बार यही रुख दोहरा चुके हैं कि बढ़ते वैश्विक संघर्षों का समाधान 'डिप्लोमेसी और डायलॉग' के ज़रिए ही संभव है।
संघर्षों का वैश्विक असर
फैबियन के अनुसार, मौजूदा संघर्षों का प्रभाव केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि इन युद्धों से जानमाल की हानि हो रही है, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है और अंततः किसी भी पक्ष को इससे कोई वास्तविक लाभ नहीं मिल रहा। यह ऐसे समय में आया है जब संयुक्त राष्ट्र महासभा का अधिवेशन चल रहा है और वैश्विक नेता शांति की अपीलें कर रहे हैं।
अमेरिका-ईरान तनाव और ट्रंप की भूमिका
अमेरिका-ईरान तनाव पर टिप्पणी करते हुए फैबियन ने कहा, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वीकार किया है कि सैन्य दबाव से ईरान को झुकाना अमेरिका के लिए संभव नहीं हो पाया। उनके शब्दों में, 'इसका मतलब यह नहीं कि ईरान ने अमेरिका को हरा दिया, बल्कि अमेरिका ईरान को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर नहीं कर सका।' फैबियन के अनुसार, ट्रंप अब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग पर दबाव डाल सकते हैं कि वह ईरान और हूती विद्रोहियों को हमले कम करने के लिए राजी करें।
उन्होंने सऊदी अरब की स्थिति का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि यदि हमले कम होते हैं तो यह अमेरिका और ईरान के बीच सीधे संवाद की नींव बन सकता है।
संयुक्त राष्ट्र की सीमाएँ और सुरक्षा परिषद की भूमिका
संयुक्त राष्ट्र पर युद्ध न रोक पाने की आलोचना के जवाब में फैबियन ने कहा कि इसके लिए संयुक्त राष्ट्र को दोष देना उचित नहीं है। असली समस्या सुरक्षा परिषद के पाँच स्थायी सदस्यों के बीच के मतभेद हैं, जो वीटो अधिकार के चलते किसी भी प्रभावी कार्रवाई को अवरुद्ध कर देते हैं। उन्होंने कहा, 'संयुक्त राष्ट्र की आलोचना करने के बजाय उन देशों की भूमिका पर सवाल उठना चाहिए जिनके पास सुरक्षा परिषद में निर्णायक शक्ति है।'
यूक्रेन युद्ध और बाइडेन नीति की विरासत
यूक्रेन संघर्ष पर फैबियन ने अमेरिका और रूस दोनों को परिस्थितियों के लिए ज़िम्मेदार ठहराया। उनके अनुसार, पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में अमेरिकी नीतियों ने ऐसे हालात पैदा किए, जिनमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए सैन्य हस्तक्षेप से बचना मुश्किल हो गया। गौरतलब है कि यूक्रेन युद्ध अब तीन वर्षों से अधिक समय से जारी है और इसकी मानवीय व आर्थिक कीमत दुनिया भर में महसूस की जा रही है।
भारत-अमेरिका व्यापार और रूबियो की प्रस्तावित यात्रा
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की प्रस्तावित भारत यात्रा पर फैबियन ने कहा कि भारत किसी भी उच्चस्तरीय अमेरिकी दौरे का स्वागत करता है, लेकिन यात्रा का उद्देश्य स्पष्ट होना ज़रूरी है। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा, 'यदि रूबियो 100 फीसदी टैरिफ की धमकी के साथ किसी अंतरिम व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कराने के लिए दबाव बनाने आते हैं, तो यह तरीका काम नहीं करेगा।' उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत तेल की खरीद का निर्णय बाज़ार की परिस्थितियों और अपने आर्थिक हितों के आधार पर करेगा — किसी बाहरी दबाव में नहीं। यह बयान ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है।