भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर ईरानी वाणिज्य दूत का बयान, अमेरिकी प्रतिबंधों को बताया 'आर्थिक आतंकवाद'
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई में तैनात ईरान के महावाणिज्य दूत सईद रजा मोसायेब मोतलघ ने 22 अगस्त को स्पष्ट किया कि ईरान भारतीय नागरिकों — विशेष रूप से समुद्री क्षेत्र में कार्यरत नाविकों — की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। उन्होंने ट्रंप प्रशासन के नवीनतम प्रतिबंधों को 'आर्थिक आतंकवाद' की संज्ञा दी और कहा कि 47 वर्षों से बाहरी दबाव झेलता ईरान इस संकट से भी उबर जाएगा।
भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर ईरान का रुख
मोतलघ ने कहा कि संघर्ष के पहले दिन से ईरानी सशस्त्र बलों का उद्देश्य हताहतों की संख्या को न्यूनतम रखना रहा है — यहाँ तक कि विरोधी पक्ष में भी। उन्होंने बताया कि ईरानी और भारतीय अधिकारियों के बीच परामर्श और समन्वय के बाद एडवाइजरी जारी की गई, जिसमें भारतीय नागरिकों से आग्रह किया गया कि वे प्रभावित क्षेत्रों में यात्रा या संचालन से यथासंभव बचें। उन्होंने कहा, 'जैसे हम अपने नागरिकों के जीवन की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, वैसे ही हम भारतीय नागरिकों के जीवन को लेकर भी उतने ही चिंतित हैं।'
वैश्विक व्यापार और ईरानी अर्थव्यवस्था पर असर
मोतलघ ने स्वीकार किया कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने ईरान, क्षेत्र और वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि भारत भी इस युद्ध के प्रतिकूल परिणामों से अछूता नहीं रहा, विशेष रूप से यह देखते हुए कि ईरान पर हमला बातचीत के बीच में हुआ था। उनके अनुसार, अमेरिका में भी आम नागरिक अपने नेताओं के निर्णयों के नकारात्मक परिणाम भुगत रहे हैं, जहाँ कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
अमेरिकी प्रतिबंध: 'आर्थिक आतंकवाद' का आरोप
ट्रंप प्रशासन द्वारा तेहरान पर बड़े प्रतिबंध लगाने की योजना पर मोतलघ ने कहा कि अमेरिका की ईरान-विरोधी कार्रवाइयाँ सत्तर वर्ष से भी अधिक पहले शुरू हुई थीं। उन्होंने ईरानी कैलेंडर के अनुसार 1332 के 28 मोर्दाद की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सैन्य माध्यमों से ईरान को नष्ट करने में विफल रहने के बाद अमेरिका ने अब 'आर्थिक आतंकवाद' का रास्ता अपनाया है। उन्होंने कहा कि पिछले 47 वर्षों में ईरानी जनता ऐसे दबावों का सामना करती आई है और इस बार भी करेगी।
होर्मुज स्ट्रेट पर ट्रंप के बयान: 'भ्रमित मानसिकता'
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों पर मोतलघ ने कहा कि यह उनकी 'भ्रमित और शत्रुतापूर्ण सोच' का प्रतिबिंब है, जो ग्रीनलैंड, मैक्सिको की खाड़ी और दुनिया के अन्य हिस्सों को लेकर उनके रवैये में भी झलकती है। उन्होंने एक ईरानी कहावत का हवाला देते हुए कहा — 'ऊंट बिनौले का सपना देखता है, कभी-कभी उन्हें पूरा निगल जाता है' — और जोर देकर कहा कि ट्रंप की महत्वाकांक्षाएँ सपने से अधिक कुछ नहीं हैं।
आगे क्या
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है और भारत की कूटनीतिक सक्रियता — अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए — जारी है। ईरानी वाणिज्य दूत का यह संदेश भारत-ईरान संबंधों की निरंतरता और संकट के बीच राजनयिक संवाद की अहमियत को रेखांकित करता है।