22 अगस्त 2026
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भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर ईरानी वाणिज्य दूत का बयान, अमेरिकी प्रतिबंधों को बताया 'आर्थिक आतंकवाद'

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भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर ईरानी वाणिज्य दूत का बयान, अमेरिकी प्रतिबंधों को बताया 'आर्थिक आतंकवाद'

सारांश

मुंबई में ईरान के महावाणिज्य दूत का दो-टूक बयान — भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए एडवाइजरी जारी, अमेरिकी प्रतिबंधों को 'आर्थिक आतंकवाद' करार और ट्रंप की होर्मुज महत्वाकांक्षाओं को 'ऊंट का सपना' बताया। 47 साल के दबाव के बाद भी ईरान झुकने से इनकार।

मुख्य बातें

ईरानी महावाणिज्य दूत सईद रजा मोसायेब मोतलघ ने 22 अगस्त को मुंबई में भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर ईरान का पक्ष रखा।
ईरानी और भारतीय अधिकारियों के बीच समन्वय के बाद एडवाइजरी जारी की गई, जिसमें भारतीयों से प्रभावित क्षेत्रों से दूर रहने का आग्रह किया गया।
मोतलघ ने ट्रंप प्रशासन के प्रतिबंधों को 'आर्थिक आतंकवाद' बताया और कहा कि ईरान 47 वर्षों से ऐसे दबाव झेलता आया है।
होर्मुज स्ट्रेट पर ट्रंप के बयानों को उन्होंने 'भ्रमित मानसिकता' और महज एक सपना करार दिया।
उन्होंने माना कि जारी संघर्ष ने वैश्विक व्यापार और भारत की अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित किया है।

मुंबई में तैनात ईरान के महावाणिज्य दूत सईद रजा मोसायेब मोतलघ ने 22 अगस्त को स्पष्ट किया कि ईरान भारतीय नागरिकों — विशेष रूप से समुद्री क्षेत्र में कार्यरत नाविकों — की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। उन्होंने ट्रंप प्रशासन के नवीनतम प्रतिबंधों को 'आर्थिक आतंकवाद' की संज्ञा दी और कहा कि 47 वर्षों से बाहरी दबाव झेलता ईरान इस संकट से भी उबर जाएगा।

भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर ईरान का रुख

मोतलघ ने कहा कि संघर्ष के पहले दिन से ईरानी सशस्त्र बलों का उद्देश्य हताहतों की संख्या को न्यूनतम रखना रहा है — यहाँ तक कि विरोधी पक्ष में भी। उन्होंने बताया कि ईरानी और भारतीय अधिकारियों के बीच परामर्श और समन्वय के बाद एडवाइजरी जारी की गई, जिसमें भारतीय नागरिकों से आग्रह किया गया कि वे प्रभावित क्षेत्रों में यात्रा या संचालन से यथासंभव बचें। उन्होंने कहा, 'जैसे हम अपने नागरिकों के जीवन की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, वैसे ही हम भारतीय नागरिकों के जीवन को लेकर भी उतने ही चिंतित हैं।'

वैश्विक व्यापार और ईरानी अर्थव्यवस्था पर असर

मोतलघ ने स्वीकार किया कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने ईरान, क्षेत्र और वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि भारत भी इस युद्ध के प्रतिकूल परिणामों से अछूता नहीं रहा, विशेष रूप से यह देखते हुए कि ईरान पर हमला बातचीत के बीच में हुआ था। उनके अनुसार, अमेरिका में भी आम नागरिक अपने नेताओं के निर्णयों के नकारात्मक परिणाम भुगत रहे हैं, जहाँ कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।

अमेरिकी प्रतिबंध: 'आर्थिक आतंकवाद' का आरोप

ट्रंप प्रशासन द्वारा तेहरान पर बड़े प्रतिबंध लगाने की योजना पर मोतलघ ने कहा कि अमेरिका की ईरान-विरोधी कार्रवाइयाँ सत्तर वर्ष से भी अधिक पहले शुरू हुई थीं। उन्होंने ईरानी कैलेंडर के अनुसार 1332 के 28 मोर्दाद की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सैन्य माध्यमों से ईरान को नष्ट करने में विफल रहने के बाद अमेरिका ने अब 'आर्थिक आतंकवाद' का रास्ता अपनाया है। उन्होंने कहा कि पिछले 47 वर्षों में ईरानी जनता ऐसे दबावों का सामना करती आई है और इस बार भी करेगी।

होर्मुज स्ट्रेट पर ट्रंप के बयान: 'भ्रमित मानसिकता'

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों पर मोतलघ ने कहा कि यह उनकी 'भ्रमित और शत्रुतापूर्ण सोच' का प्रतिबिंब है, जो ग्रीनलैंड, मैक्सिको की खाड़ी और दुनिया के अन्य हिस्सों को लेकर उनके रवैये में भी झलकती है। उन्होंने एक ईरानी कहावत का हवाला देते हुए कहा — 'ऊंट बिनौले का सपना देखता है, कभी-कभी उन्हें पूरा निगल जाता है' — और जोर देकर कहा कि ट्रंप की महत्वाकांक्षाएँ सपने से अधिक कुछ नहीं हैं।

आगे क्या

गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है और भारत की कूटनीतिक सक्रियता — अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए — जारी है। ईरानी वाणिज्य दूत का यह संदेश भारत-ईरान संबंधों की निरंतरता और संकट के बीच राजनयिक संवाद की अहमियत को रेखांकित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

खासकर तब जब पश्चिमी दबाव चरम पर है। 'आर्थिक आतंकवाद' जैसे तीखे शब्दों का चुनाव आकस्मिक नहीं है; यह भारत की संवेदनशीलता को भाँपते हुए अमेरिकी एकपक्षीयता के विरुद्ध साझा आख्यान गढ़ने की कोशिश है। हालाँकि, भारत की स्थिति सूक्ष्म है — वह न तो ईरान-विरोधी गठबंधन में है, न ही खुलकर तेहरान के साथ। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है, वह यह है कि इस बयान के पीछे चाबहार बंदरगाह, ऊर्जा आपूर्ति और भारतीय नाविकों की वापसी जैसे ठोस हित हैं — जो महज राजनयिक शिष्टाचार से कहीं अधिक हैं।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरानी महावाणिज्य दूत ने भारतीय नाविकों की सुरक्षा के बारे में क्या कहा?
मुंबई में तैनात ईरानी महावाणिज्य दूत सईद रजा मोसायेब मोतलघ ने कहा कि ईरानी और भारतीय अधिकारियों के बीच समन्वय के बाद एडवाइजरी जारी की गई है, जिसमें भारतीय नागरिकों से प्रभावित क्षेत्रों में यात्रा या संचालन से बचने का आग्रह किया गया है। उन्होंने कहा कि ईरान भारतीय नागरिकों के जीवन की सुरक्षा को उतनी ही गंभीरता से लेता है जितनी अपने नागरिकों की।
ईरान ने अमेरिकी प्रतिबंधों को 'आर्थिक आतंकवाद' क्यों कहा?
मोतलघ के अनुसार, सैन्य माध्यमों से ईरान को नष्ट करने में विफल रहने के बाद अमेरिका ने आर्थिक नाकेबंदी और दबाव का रास्ता अपनाया है, जिसे उन्होंने 'आर्थिक आतंकवाद' कहा। उन्होंने कहा कि अमेरिका की ईरान-विरोधी कार्रवाइयाँ सत्तर वर्ष से भी अधिक पहले से जारी हैं और ईरान 47 वर्षों से ऐसे दबावों का सामना करता आया है।
होर्मुज स्ट्रेट पर ट्रंप के बयानों पर ईरान का क्या कहना है?
ईरानी वाणिज्य दूत ने ट्रंप के होर्मुज स्ट्रेट संबंधी बयानों को 'भ्रमित और शत्रुतापूर्ण सोच' का हिस्सा बताया। उन्होंने एक ईरानी कहावत का हवाला देते हुए कहा कि ट्रंप की महत्वाकांक्षाएँ सपने से अधिक कुछ नहीं हैं और ये पूरी नहीं होंगी।
क्या इस संघर्ष से भारत की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हुई है?
मोतलघ ने स्वीकार किया कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के प्रतिकूल परिणाम भारत के लोगों को भी प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से इस बात का उल्लेख किया कि ईरान पर हमला बातचीत के बीच में हुआ, जिससे वैश्विक व्यापार और आपूर्ति शृंखलाएँ बाधित हुईं।
ईरान और भारत के बीच इस संकट के दौरान किस स्तर पर संपर्क हो रहा है?
ईरानी वाणिज्य दूत के अनुसार, दोनों देशों के अधिकारी सीधे संपर्क में हैं और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए परामर्श एवं समन्वय जारी है। उन्होंने उन भारतीय अधिकारियों का आभार भी व्यक्त किया जो इन चिंताओं को लेकर अपने ईरानी समकक्षों से सीधे बात कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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