क्या बलूचिस्तान में सरकार ने धारा 144 को 15 दिनों के लिए बढ़ाया?

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क्या बलूचिस्तान में सरकार ने धारा 144 को 15 दिनों के लिए बढ़ाया?

सारांश

बलूचिस्तान की प्रांतीय सरकार ने धारा 144 को 15 दिनों के लिए बढ़ा दिया है। यह निर्णय कानून-व्यवस्था की स्थिति के कारण लिया गया है। स्थानीय नेता इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन मानते हैं। जानें, इस विषय में और क्या हो रहा है।

Key Takeaways

  • धारा 144 की अवधि 15 दिनों के लिए बढ़ाई गई है।
  • कानून-व्यवस्था की स्थिति को बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।
  • स्थानीय नेता इसे असंवैधानिक मानते हैं।
  • खुजदार में विरोध प्रदर्शन जारी है।
  • सुरक्षा बलों के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं।

क्वेटा, 30 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। बलूचिस्तान की प्रांतीय सरकार ने कानून-व्यवस्था की मौजूदा स्थिति को देखते हुए पूरे प्रांत में धारा 144 की अवधि 15 दिनों के लिए और बढ़ा दी है। गृह विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इस अवधि में हथियारों का प्रदर्शन और उपयोग, मोटरसाइकिल पर डबल सवारी, काली शीशे वाली गाड़ियां, बिना पंजीकरण वाली मोटरसाइकिलें, और पांच या अधिक लोगों के जमावड़े, धरना, जुलूस और रैली पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

निर्देश में यह भी कहा गया है कि सार्वजनिक स्थानों पर चेहरा ढकना, विशेषकर मफलर, मास्क या किसी अन्य तरीके से पहचान छिपाना भी पूरी तरह वर्जित होगा।

क्वेटा प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए नेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी (एनडीपी) के केंद्रीय प्रवक्ता शाहजेब बलोच ने इन प्रतिबंधों को असंवैधानिक करार दिया और कहा कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों का गला घोंटने जैसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बलूचिस्तान और देशभर के अन्य वंचित समूहों के कार्यकर्ताओं को न केवल परेशान किया जा रहा है, बल्कि उन्हें जबरन गायब करने जैसी गंभीर रणनीतियों का भी सामना करना पड़ रहा है।

शाहजेब ने कहा कि सरकार को चाहिए कि सभी लापता बलोच और अन्य पीड़ितों को वापस लाने की व्यवस्था करे। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी राजनीतिक कार्यकर्ता पर आरोप है तो उसे अदालत में पेश किया जाना चाहिए, लेकिन पूरे समुदाय को सामूहिक सजा देना जातीय और राष्ट्रीय शुद्धिकरण की तरह है और यह औपनिवेशिक मानसिकता को दर्शाता है।

इस बीच खुजदार जिले के जवाह और जहरी इलाकों में तनाव बढ़ गया है, जहां क्वेटा-कराची राजमार्ग को प्रदर्शनकारियों ने दूसरे दिन भी जाम रखा। यह विरोध तब शुरू हुआ जब हब चौकी से खुजदार जा रही एक वैन से यात्रियों को अगवा कर लिया गया।

स्थानीय नेताओं का आरोप है कि हाल ही में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने एक वैन को रोका, जिसमें से महिलाओं और बच्चों को उतारने के बाद पुरुष यात्रियों और वाहन को अज्ञात स्थान पर ले जाया गया।

स्थानीय नेता बाबा फतेह जहरी ने फोन पर पत्रकारों को बताया कि खुजदार प्रशासन ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन को खत्म करने के लिए बल प्रयोग किया। लवीज बलों ने गोलीबारी और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जिससे दो यात्री घायल हो गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बलों ने महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया और युवाओं को पीटा।

फतेह ने जहरी क्षेत्र के लोगों से बड़ी संख्या में धरने में शामिल होने की अपील की ताकि खुजदार प्रशासन की "ज्यादतियों" को रोका जा सके।

Point of View

सरकार का निर्णय कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए आवश्यक बताया गया है, जबकि स्थानीय नेता इसे असंवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन मानते हैं। एक राष्ट्रीय संपादक के रूप में, यह महत्वपूर्ण है कि हम हमेशा मानवाधिकारों और नागरिक स्वतंत्रताओं का सम्मान करें।
NationPress
31/08/2025

Frequently Asked Questions

धारा 144 क्या है?
धारा 144 एक कानूनी प्रावधान है जो किसी विशेष क्षेत्र में जनसामान्य के एकत्र होने पर प्रतिबंध लगाता है।
इस निर्णय का उद्देश क्या है?
यह निर्णय कानून-व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए लिया गया है।
क्या यह निर्णय असंवैधानिक है?
स्थानीय नेताओं का मानना है कि यह निर्णय लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
क्या इस निर्णय के खिलाफ कोई विरोध हो रहा है?
हाँ, खुजदार जिले में प्रदर्शनकारी इस निर्णय का विरोध कर रहे हैं।
क्या इस प्रकार के प्रतिबंध सामान्य हैं?
ऐसे प्रतिबंध आमतौर पर संकट के समय में लागू होते हैं, लेकिन यह विवाद का विषय हो सकता है।