क्या अमेरिका का ‘अविश्वसनीय’ सहयोगी और ‘बेहद समस्याग्रस्त’ साझेदार है पाकिस्तान?
सारांश
Key Takeaways
- पाकिस्तान अमेरिका के लिए अविश्वसनीय साझेदार है।
- ईरान को प्राथमिकता देने से अमेरिका की चिंताएँ बढ़ी हैं।
- दोनों देशों के बीच व्यापार का स्तर 2.8 अरब अमेरिकी डॉलर है।
- पाकिस्तान ने अब तक इज़रायल को मान्यता नहीं दी है।
- चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा एक महत्वपूर्ण परियोजना है।
वॉशिंगटन, 8 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका के साथ मेजर नॉन-नाटो एलाय (एमएनएनए) का दर्जा प्राप्त होने के बावजूद, पाकिस्तान लगातार एक अविश्वसनीय रणनीतिक साझेदार के रूप में उभरता रहा है। एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान को केवल भरोसेमंद सहयोगी के रूप में नहीं, बल्कि एक बेहद समस्याग्रस्त साझेदार के रूप में देखा जाना चाहिए, और उसे प्राप्त एमएनएनए विशेषाधिकारों पर गंभीरता से पुनर्विचार आवश्यक है।
न्यूयॉर्क स्थित थिंक टैंक गैटस्टोन इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान का नेतृत्व ईरान को अमेरिका और यहां तक कि इज़रायल से अधिक प्राथमिकता देता है, जो इस बात को उजागर करता है कि वॉशिंगटन इस्लामाबाद पर, खासकर गाजा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर, भरोसा क्यों नहीं कर सकता।
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि पाकिस्तान ने आज तक इज़रायल को मान्यता नहीं दी है। इसके विपरीत, 1979 में अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी द्वारा ईरान में इस्लामिक गणतंत्र की स्थापना के बाद, पाकिस्तान उसे मान्यता देने वाला पहला देश था। यह भी ध्यान देने योग्य है कि 1947 में पाकिस्तान के गठन के समय ईरान उसे मान्यता देने वाला पहला देश बना। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 2.8 अरब अमेरिकी डॉलर का है।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान आधिकारिक तौर पर ईरान के साथ अपने संबंधों को भाईचारे और साझा क्षेत्रीय हितों पर आधारित मानता है, और दोनों देशों की नीतियों में व्यापक समानता देखी जा रही है।
इस समानता का एक प्रमुख उदाहरण बलूचिस्तान के मुद्दे पर दोनों देशों का दृष्टिकोण है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान और पाकिस्तान दोनों ही बलूच राजनीतिक गतिविधियों को अपनी क्षेत्रीय अखंडता और राज्य सत्ता के लिए एक सीधा खतरा मानते हैं। नवंबर 2024 में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के तत्कालीन कमांडर मेजर जनरल हुसैन सलामी ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर से मुलाकात की थी। इस दौरान दोनों देशों ने बलूच स्वतंत्रता आंदोलनों के खिलाफ सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की थी।
रिपोर्ट के अनुसार, यह गठजोड़ चीन के साथ साझा आर्थिक हितों से और मजबूत होता है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा, चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव की प्रमुख परियोजनाओं में से एक है, जबकि ईरान भी इस परियोजना में शामिल होने की इच्छा रखता है।