क्या बांग्लादेश चुनाव में सभी प्रमुख पार्टियों की भागीदारी आवश्यक है?
सारांश
Key Takeaways
- सभी दलों की भागीदारी अनिवार्य है।
- चुनाव की प्रक्रिया लोकतांत्रिक होनी चाहिए।
- यूके ने बांग्लादेश के चुनावों में निष्पक्षता पर चिंता जताई।
- अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक की भागीदारी से पारदर्शिता बढ़ेगी।
- बांग्लादेश को बहु-दलीय प्रणाली को बढ़ावा देना चाहिए।
लंदन, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को प्रस्तावित आम चुनावों को लेकर यूके के सांसदों ने गहरी चिंता व्यक्त की है। मंगलवार को जारी एक साझा बयान में चार ब्रिटिश सांसदों - बॉब ब्लैकमैन, जिम शैनन, जस अटवाल और क्रिस लॉ ने कहा कि लोकतंत्र के लिए चुनाव में सभी महत्वपूर्ण राजनीतिक दलों की भागीदारी अनिवार्य है।
ब्रिटिश सांसदों ने यह भी कहा कि यूनुस की “गैर-निर्वाचित” अंतरिम सरकार को बांग्लादेशी मतदाताओं पर कोई रोक नहीं लगानी चाहिए थी और यदि बड़ी राजनीतिक पार्टियों का चुनाव में हिस्सा नहीं होता है, तो ऐसा चुनाव लोकतांत्रिक नहीं माना जाएगा।
उन्हें अवामी लीग पर लगे प्रतिबंध को चिंताजनक बताते हुए कहा कि यह प्रतिबंध 2024 में जुलाई विद्रोह के बाद लागू किया गया था। सांसदों ने कहा कि सभी दलों की भागीदारी के बिना लाखों बांग्लादेशी मतदाता वंचित रहेंगे और इस स्थिति में चुनाव को लोकतांत्रिक नहीं माना जा सकता। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और यूके सरकार से अपील की कि मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार पर चुनाव को स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी बनाने के लिए दबाव डालें।
सांसदों ने कहा, “सभी सही सोच वाले लोग यह आशा करते हैं कि ये चुनाव एक न्यायपूर्ण, स्थिर और खुशहाल बांग्लादेश बनाने में मदद करेंगे, लेकिन यह तभी संभव है जब चुनाव में सभी की भागीदारी हो और बेहतर होगा कि निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक भी इसमें शामिल हों।”
बयान में आगे कहा गया, “देश की राजनीति लंबे समय से बंटी हुई है। बांग्लादेश की सभी पार्टियां इसके लिए कुछ हद तक जिम्मेदार हैं। लेकिन बांग्लादेश को इन चुनावों का उपयोग बहु-दलीय प्रणाली की संस्कृति को विकसित करने के लिए करना चाहिए, जिसमें विपक्षी पार्टियां सकारात्मक भूमिका निभा सकें।”
यह बताते हुए कि यूके बांग्लादेश का एक प्रमुख व्यापार और विकास भागीदार है, सांसदों ने “राजनीति से प्रेरित हिरासत, व्यवस्थागत त्रुटियों और मीडियाकर्मियों की मनमानी गिरफ्तारी” की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की।
बयान के अंत में कहा गया, “हम ब्रिटिश सरकार के साथ-साथ यूएन जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से अपील करते हैं कि वे चुनावों को स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी बनाने के लिए अंतरिम सरकार पर दबाव डालें।”