आईएमएफ ने पाकिस्तान को $1.21 अरब की वित्तीय सहायता पर सहमति दी, भू-राजनीतिक जोखिमों की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने 8 अक्टूबर 2026 को पाकिस्तान के साथ स्टाफ-लेवल समझौते पर सहमति जताई, जिससे पाकिस्तान को करीब 1.21 अरब डॉलर की अतिरिक्त वित्तीय सहायता मिलने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। हालाँकि, आईएमएफ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा की ऊँची कीमतें और वैश्विक व्यापार में रुकावटें पाकिस्तान की आर्थिक रिकवरी के लिए अब भी गंभीर खतरा बनी हुई हैं।
समझौते का स्वरूप और दायरा
यह समझौता पाकिस्तान के 37 महीने के 'एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी' (ईएफएफ) की चौथी समीक्षा और 28 महीने की 'रेजिलिएंस एंड सस्टेनेबिलिटी फैसिलिटी' (आरएसएफ) की तीसरी समीक्षा से जुड़ा है। पाकिस्तान को यह राशि तब प्राप्त होगी, जब आईएमएफ के एग्जीक्यूटिव बोर्ड इस स्टाफ-लेवल समझौते को औपचारिक मंजूरी देंगे।
मंजूरी मिलने के बाद पाकिस्तान को ईएफएफ के तहत करीब एक अरब डॉलर और आरएसएफ के तहत करीब 21 करोड़ डॉलर प्राप्त होंगे। इसके बाद दोनों कार्यक्रमों के तहत पाकिस्तान को मिलने वाली कुल संचयी राशि बढ़कर करीब 5.7 अरब डॉलर हो जाएगी।
आईएमएफ टीम की समीक्षा यात्रा
इवा पेट्रोवा के नेतृत्व में आईएमएफ की एक दल ने 23 सितंबर से 7 अक्टूबर 2026 तक कराची और इस्लामाबाद में पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ विस्तृत बातचीत की। यह बातचीत पाकिस्तान की वार्षिक आर्थिक समीक्षा और आईएमएफ कार्यक्रमों की समीक्षा के अंतर्गत आयोजित की गई।
पेट्रोवा ने कहा, 'इसके बावजूद जोखिम काफी ज़्यादा हैं। खासतौर पर भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव, वैश्विक स्तर पर सख्त वित्तीय हालात और व्यापार में रुकावटें बड़े जोखिम बने हुए हैं।'
पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2025-26 में अनुमानित 3.6 प्रतिशत बढ़ी, जबकि पहली तीन तिमाहियों में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 4 प्रतिशत रही। मई में महंगाई चरम पर पहुँचने के बाद राहत मिली और सितंबर में यह 10.3 प्रतिशत पर आ गई।
मज़बूत विदेशी रेमिटेंस की बदौलत चालू खाते की स्थिति लगभग संतुलित रही। सितंबर 2026 के अंत तक पाकिस्तान का कुल विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर करीब 21.5 अरब डॉलर हो गया। आईएमएफ ने कहा कि पाकिस्तान की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग में सुधार और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाज़ारों तक दोबारा पहुँच से आर्थिक नीतियों पर बढ़ते भरोसे का संकेत मिलता है।
आईएमएफ की प्रमुख शर्तें और सिफारिशें
आईएमएफ ने पाकिस्तान से वित्तीय अनुशासन बनाए रखने और वित्त वर्ष 2026-27 के बजट को लागू करने को कहा है, जिसमें जीडीपी के 2 प्रतिशत के मूल प्राथमिक सरप्लस का लक्ष्य शामिल है। टैक्स वसूली व्यवस्था में सुधार — जोखिम-आधारित ऑडिट, डिजिटल इनवॉइस और थर्ड-पार्टी डेटा के उपयोग — पर भी ज़ोर दिया गया है।
सामाजिक खर्च के मोर्चे पर पाकिस्तान ने स्वास्थ्य और शिक्षा पर व्यय वित्त वर्ष 2023-24 के जीडीपी के 2.2 प्रतिशत से बढ़ाकर वित्त वर्ष 2025-26 में 2.5 प्रतिशत किया है, और वित्त वर्ष 2026-27 में इसे 2.8 प्रतिशत तक ले जाने की योजना है। आईएमएफ ने जरूरतमंदों को सीधी नकद सहायता बढ़ाने का स्वागत किया, लेकिन मौजूदा 'फ्यूल सपोर्ट स्कीम' को उसकी उच्च लागत और व्यापक दायरे के कारण जल्द समाप्त करने की सलाह दी।
ऊर्जा क्षेत्र में स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान को ब्याज दरों में तब तक आवश्यक सख्ती बनाए रखने को कहा गया है, जब तक महंगाई लगातार निर्धारित लक्ष्य के दायरे में नहीं आ जाती। सर्कुलर डेट को दोबारा बढ़ने से रोकना, बिजली वितरण में प्रतिस्पर्धा लाना और कामकाज की क्षमता सुधारना भी आईएमएफ की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान पर बाहरी कर्ज का बोझ भारी बना हुआ है और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएँ उसकी रिकवरी को जटिल बना रही हैं। एग्जीक्यूटिव बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद ही पाकिस्तान को यह राशि वास्तव में हासिल होगी — तब तक यह समझौता सशर्त बना रहेगा।