8 अक्टूबर 2026
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आईएमएफ ने पाकिस्तान को $1.21 अरब की वित्तीय सहायता पर सहमति दी, भू-राजनीतिक जोखिमों की चेतावनी

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आईएमएफ ने पाकिस्तान को $1.21 अरब की वित्तीय सहायता पर सहमति दी, भू-राजनीतिक जोखिमों की चेतावनी

सारांश

आईएमएफ और पाकिस्तान के बीच स्टाफ-लेवल समझौता हुआ है जिससे $1.21 अरब की नई सहायता का मार्ग खुल सकता है — लेकिन एग्जीक्यूटिव बोर्ड की मंजूरी बाकी है और भू-राजनीतिक तनाव बड़ा जोखिम बना हुआ है।

मुख्य बातें

आईएमएफ ने 8 अक्टूबर 2026 को पाकिस्तान के साथ स्टाफ-लेवल समझौते पर सहमति जताई।
पाकिस्तान को ईएफएफ के तहत करीब एक अरब डॉलर और आरएसएफ के तहत करीब 21 करोड़ डॉलर मिल सकते हैं।
मंजूरी के बाद दोनों कार्यक्रमों के तहत पाकिस्तान को मिलने वाली कुल राशि 5.7 अरब डॉलर हो जाएगी।
पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार सितंबर 2026 के अंत तक 21.5 अरब डॉलर पर पहुँचा।
वित्त वर्ष 2025-26 में जीडीपी वृद्धि अनुमानित 3.6 प्रतिशत ; सितंबर में महंगाई 10.3 प्रतिशत ।
आईएमएफ ने भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा कीमतों और व्यापार बाधाओं को आर्थिक सुधार के लिए बड़ा खतरा बताया।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने 8 अक्टूबर 2026 को पाकिस्तान के साथ स्टाफ-लेवल समझौते पर सहमति जताई, जिससे पाकिस्तान को करीब 1.21 अरब डॉलर की अतिरिक्त वित्तीय सहायता मिलने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। हालाँकि, आईएमएफ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा की ऊँची कीमतें और वैश्विक व्यापार में रुकावटें पाकिस्तान की आर्थिक रिकवरी के लिए अब भी गंभीर खतरा बनी हुई हैं।

समझौते का स्वरूप और दायरा

यह समझौता पाकिस्तान के 37 महीने के 'एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी' (ईएफएफ) की चौथी समीक्षा और 28 महीने की 'रेजिलिएंस एंड सस्टेनेबिलिटी फैसिलिटी' (आरएसएफ) की तीसरी समीक्षा से जुड़ा है। पाकिस्तान को यह राशि तब प्राप्त होगी, जब आईएमएफ के एग्जीक्यूटिव बोर्ड इस स्टाफ-लेवल समझौते को औपचारिक मंजूरी देंगे।

मंजूरी मिलने के बाद पाकिस्तान को ईएफएफ के तहत करीब एक अरब डॉलर और आरएसएफ के तहत करीब 21 करोड़ डॉलर प्राप्त होंगे। इसके बाद दोनों कार्यक्रमों के तहत पाकिस्तान को मिलने वाली कुल संचयी राशि बढ़कर करीब 5.7 अरब डॉलर हो जाएगी।

आईएमएफ टीम की समीक्षा यात्रा

इवा पेट्रोवा के नेतृत्व में आईएमएफ की एक दल ने 23 सितंबर से 7 अक्टूबर 2026 तक कराची और इस्लामाबाद में पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ विस्तृत बातचीत की। यह बातचीत पाकिस्तान की वार्षिक आर्थिक समीक्षा और आईएमएफ कार्यक्रमों की समीक्षा के अंतर्गत आयोजित की गई।

पेट्रोवा ने कहा, 'इसके बावजूद जोखिम काफी ज़्यादा हैं। खासतौर पर भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव, वैश्विक स्तर पर सख्त वित्तीय हालात और व्यापार में रुकावटें बड़े जोखिम बने हुए हैं।'

पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2025-26 में अनुमानित 3.6 प्रतिशत बढ़ी, जबकि पहली तीन तिमाहियों में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 4 प्रतिशत रही। मई में महंगाई चरम पर पहुँचने के बाद राहत मिली और सितंबर में यह 10.3 प्रतिशत पर आ गई।

मज़बूत विदेशी रेमिटेंस की बदौलत चालू खाते की स्थिति लगभग संतुलित रही। सितंबर 2026 के अंत तक पाकिस्तान का कुल विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर करीब 21.5 अरब डॉलर हो गया। आईएमएफ ने कहा कि पाकिस्तान की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग में सुधार और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाज़ारों तक दोबारा पहुँच से आर्थिक नीतियों पर बढ़ते भरोसे का संकेत मिलता है।

आईएमएफ की प्रमुख शर्तें और सिफारिशें

आईएमएफ ने पाकिस्तान से वित्तीय अनुशासन बनाए रखने और वित्त वर्ष 2026-27 के बजट को लागू करने को कहा है, जिसमें जीडीपी के 2 प्रतिशत के मूल प्राथमिक सरप्लस का लक्ष्य शामिल है। टैक्स वसूली व्यवस्था में सुधार — जोखिम-आधारित ऑडिट, डिजिटल इनवॉइस और थर्ड-पार्टी डेटा के उपयोग — पर भी ज़ोर दिया गया है।

सामाजिक खर्च के मोर्चे पर पाकिस्तान ने स्वास्थ्य और शिक्षा पर व्यय वित्त वर्ष 2023-24 के जीडीपी के 2.2 प्रतिशत से बढ़ाकर वित्त वर्ष 2025-26 में 2.5 प्रतिशत किया है, और वित्त वर्ष 2026-27 में इसे 2.8 प्रतिशत तक ले जाने की योजना है। आईएमएफ ने जरूरतमंदों को सीधी नकद सहायता बढ़ाने का स्वागत किया, लेकिन मौजूदा 'फ्यूल सपोर्ट स्कीम' को उसकी उच्च लागत और व्यापक दायरे के कारण जल्द समाप्त करने की सलाह दी।

ऊर्जा क्षेत्र में स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान को ब्याज दरों में तब तक आवश्यक सख्ती बनाए रखने को कहा गया है, जब तक महंगाई लगातार निर्धारित लक्ष्य के दायरे में नहीं आ जाती। सर्कुलर डेट को दोबारा बढ़ने से रोकना, बिजली वितरण में प्रतिस्पर्धा लाना और कामकाज की क्षमता सुधारना भी आईएमएफ की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान पर बाहरी कर्ज का बोझ भारी बना हुआ है और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएँ उसकी रिकवरी को जटिल बना रही हैं। एग्जीक्यूटिव बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद ही पाकिस्तान को यह राशि वास्तव में हासिल होगी — तब तक यह समझौता सशर्त बना रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा एग्जीक्यूटिव बोर्ड की मंजूरी के बाद शुरू होगी। गौरतलब है कि पाकिस्तान पिछले कई वर्षों से आईएमएफ के बेलआउट कार्यक्रमों पर निर्भर रहा है, और हर बार सुधारों की शर्तें लागू करने में चुनौतियाँ सामने आई हैं। इवा पेट्रोवा की भू-राजनीतिक जोखिम पर चेतावनी इस बात का संकेत है कि भारत-पाकिस्तान तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाज़ार की अस्थिरता किसी भी वक्त इस रिकवरी की रफ्तार को पलट सकती है। फ्यूल सब्सिडी खत्म करने और टैक्स सुधार जैसी शर्तें राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील हैं — और पाकिस्तान का इतिहास बताता है कि इन्हें लागू करना जितना आसान कागज़ पर दिखता है, ज़मीन पर उतना नहीं होता।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईएमएफ और पाकिस्तान के बीच क्या समझौता हुआ है?
आईएमएफ और पाकिस्तान के बीच 8 अक्टूबर 2026 को स्टाफ-लेवल समझौता हुआ है, जिससे पाकिस्तान को करीब 1.21 अरब डॉलर की अतिरिक्त वित्तीय सहायता मिलने का रास्ता खुल सकता है। यह समझौता ईएफएफ की चौथी और आरएसएफ की तीसरी समीक्षा से जुड़ा है।
पाकिस्तान को आईएमएफ से कुल कितनी रकम मिलेगी?
एग्जीक्यूटिव बोर्ड की मंजूरी के बाद पाकिस्तान को ईएफएफ के तहत करीब एक अरब डॉलर और आरएसएफ के तहत करीब 21 करोड़ डॉलर मिलेंगे। इसके बाद दोनों कार्यक्रमों के तहत पाकिस्तान को मिलने वाली कुल संचयी राशि करीब 5.7 अरब डॉलर हो जाएगी।
आईएमएफ ने पाकिस्तान को किन जोखिमों के बारे में चेतावनी दी है?
आईएमएफ ने कहा है कि भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव, वैश्विक स्तर पर सख्त वित्तीय हालात और व्यापार में रुकावटें पाकिस्तान की आर्थिक रिकवरी के लिए बड़े जोखिम बने हुए हैं। आईएमएफ टीम प्रमुख इवा पेट्रोवा ने इन्हें 'काफी ज़्यादा जोखिम' बताया।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति क्या है?
वित्त वर्ष 2025-26 में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था अनुमानित 3.6 प्रतिशत बढ़ी और सितंबर 2026 में महंगाई दर 10.3 प्रतिशत रही। देश का विदेशी मुद्रा भंडार सितंबर के अंत तक बढ़कर करीब 21.5 अरब डॉलर हो गया।
पाकिस्तान को आईएमएफ सहायता पाने के लिए क्या शर्तें पूरी करनी होंगी?
आईएमएफ ने पाकिस्तान से वित्तीय अनुशासन बनाए रखने, जीडीपी के 2 प्रतिशत के मूल प्राथमिक सरप्लस का लक्ष्य हासिल करने, टैक्स सुधार लागू करने और ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव करने की शर्तें रखी हैं। इसके अलावा फ्यूल सपोर्ट स्कीम को जल्द समाप्त करने और मौद्रिक सख्ती बनाए रखने की भी सलाह दी गई है।
राष्ट्र प्रेस
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