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क्या कंगाल पाकिस्तान पर आईएमएफ की मेहरबानी है, शर्तें तोड़ने के बावजूद मिला बेलआउट पैकेज?

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क्या कंगाल पाकिस्तान पर आईएमएफ की मेहरबानी है, शर्तें तोड़ने के बावजूद मिला बेलआउट पैकेज?

सारांश

पाकिस्तान के लिए आईएमएफ से 25वां बेलआउट पैकेज प्राप्त करना एक नई आर्थिक चुनौती का संकेत है। यह पैकेज शर्तों के उल्लंघन के बावजूद मिला है, जो पाकिस्तान की वित्तीय स्थिरता के लिए गंभीर प्रश्न उठाता है। क्या यह अस्थायी राहत है या वास्तविक सुधार की कमी का संकेत?

मुख्य बातें

पाकिस्तान को 25वां आईएमएफ बेलआउट पैकेज मिला है।
आईएमएफ की शर्तों का उल्लंघन लगातार हो रहा है।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में दीर्घकालिक सुधार की आवश्यकता है।
महंगाई और सामाजिक असमानता बढ़ती जा रही है।
बाहरी सहायता पर निर्भरता बढ़ रही है।

नई दिल्ली, 26 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान लगातार आर्थिक संकटों के जाल में फंसता जा रहा है और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के बेलआउट पैकेजों पर उसकी निर्भरता बढ़ती जा रही है। यह अचंभित करने वाली बात है कि आईएमएफ की शर्तों का बार-बार उल्लंघन करने के बावजूद पाकिस्तान को कर्ज मिलता रहा है। अब पाकिस्तान अपने 25वें आईएमएफ ऋण कार्यक्रम की ओर बढ़ चुका है।

हाल के समझौते के अंतर्गत पाकिस्तान को 7 अरब डॉलर का एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी (ईएफएफ) पैकेज 37 महीनों के लिए दिया गया है, जिसमें 1.4 अरब डॉलर का रेज़िलिएंस एंड सस्टेनेबिलिटी फंड (आरएसएफ) भी शामिल है। अक्टूबर में हुए स्टाफ-लेवल एग्रीमेंट के अनुसार, पाकिस्तान को ईएफएफ के तहत 1 अरब डॉलर और आरएसएफ के तहत 20 करोड़ डॉलर मिलेंगे। इस प्रकार दोनों व्यवस्थाओं के तहत अब तक कुल 3.3 अरब डॉलर का वितरण हो चुका है।

एशियन लाइट अखबार में छपे एक लेख के अनुसार, यह वित्तीय सहायता अस्थायी राहत देती है, लेकिन यह पाकिस्तान की बाहरी बेलआउट पर बढ़ती निर्भरता को भी उजागर करती है। आईएमएफ के कार्यक्रमों का उद्देश्य आर्थिक स्थिरता और अनुशासन लाना होता है, लेकिन पाकिस्तान अब तक दीर्घकालिक सुधार लागू करने में असफल रहा है।

आईएमएफ का कार्य घरेलू नीतियों का सूक्ष्म प्रबंधन नहीं, बल्कि राजकोषीय घाटा कम करना, राजस्व बढ़ाना और सब्सिडी को तर्कसंगत बनाना है। इसके बावजूद, पाकिस्तान की सरकारें राजनीतिक रूप से सुविधाजनक लेकिन सामाजिक रूप से प्रतिगामी फैसले लेती रहीं। इसका परिणाम यह है कि वेतनभोगी वर्ग और आम उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ता गया, जबकि कृषि, रियल एस्टेट और रिटेल जैसे शक्तिशाली क्षेत्रों को कर के दायरे से बाहर रखा गया। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में केवल लगभग 2 प्रतिशत लोग ही आयकर देते हैं, जो कर प्रणाली की गंभीर असमानता को दर्शाता है।

नवंबर 2025 में जारी आईएमएफ की एक रिपोर्ट में पाकिस्तान में भ्रष्टाचार की निरंतर समस्या को रेखांकित करते हुए पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए 15-सूत्रीय सुधार एजेंडा तुरंत लागू करने की मांग की गई थी। आईएमएफ की गवर्नेंस एंड करप्शन डायग्नोस्टिक असेसमेंट रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान का बजट विश्वसनीय नहीं है। कई परियोजनाओं को स्वीकृति मिलने के बावजूद उन्हें पूरे कार्यकाल में पर्याप्त धन नहीं मिल पाता, जिससे देरी और लागत में भारी वृद्धि होती है।

वर्ष 2024-25 में पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने 9.4 ट्रिलियन रुपये के अतिरिक्त खर्च को मंजूरी दी, जो पिछले वर्ष की तुलना में पांच गुना अधिक है। सांसदों के प्रत्यक्ष नियंत्रण वाले निर्वाचन क्षेत्र विकास कोष भी पूंजी निवेश को प्रभावित करते हैं और निगरानी को कमजोर बनाते हैं, जिससे सार्वजनिक संसाधनों के दुरुपयोग की संभावना बढ़ जाती है।

आईएमएफ भले ही वित्तीय अनुशासन पर जोर देता हो, लेकिन असली समस्या पाकिस्तान के शासक वर्ग की राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है। सरकारी संस्थानों के विलासितापूर्ण खर्च जारी हैं, सब्सिडी का गलत दिशा में उपयोग हो रहा है और अभिजात वर्ग के विशेषाधिकार बने हुए हैं। वहीं पेंशनरों को कटौती झेलनी पड़ रही है और गरीब उपभोक्ताओं पर गैस के फिक्स्ड चार्ज का बोझ डाला जा रहा है।

ऊर्जा क्षेत्र में यह असमानता साफ दिखती है। खपत आधारित बिलिंग के बजाय फिक्स्ड चार्ज लागू किए गए हैं, जिससे कम आय वाले परिवारों पर बेमेल असर पड़ता है। आईएमएफ लागत वसूली की बात करता है, लेकिन प्रगतिशील टैरिफ और लाइफलाइन स्लैब लागू करना पूरी तरह पाकिस्तान सरकार के हाथ में है।

आईएमएफ और पेरिस स्थित फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) दोनों ने डेटा आधारित सुरक्षा उपायों, भ्रष्टाचार-रोधी दिशानिर्देशों और उचित जांच की आवश्यकता पर जोर दिया है, लेकिन इन सिफारिशों को लागू करने में प्रगति बेहद धीमी रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

हमें यह समझना चाहिए कि पाकिस्तान की स्थिति केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक भी है। यहां की सरकारों को दीर्घकालिक सुधारों पर ध्यान केंद्रित करना होगा, ताकि वे अपने लोगों के लिए स्थायी समाधान प्रदान कर सकें।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाकिस्तान को कब और कितना बेलआउट पैकेज मिला है?
पाकिस्तान को हाल ही में 7 अरब डॉलर का बेलआउट पैकेज मिला है, जिसमें 1.4 अरब डॉलर का अतिरिक्त फंड शामिल है।
आईएमएफ की शर्तों का उल्लंघन पाकिस्तान पर क्या प्रभाव डालता है?
आईएमएफ की शर्तों का उल्लंघन पाकिस्तान की वित्तीय स्थिरता को खतरे में डालता है और इसकी बाहरी सहायता पर निर्भरता बढ़ाता है।
राष्ट्र प्रेस
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