क्या आईएमएफ लोन पर निर्भरता से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था सुरक्षित रह पाएगी?

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क्या आईएमएफ लोन पर निर्भरता से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था सुरक्षित रह पाएगी?

सारांश

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था आईएमएफ के लोन के सहारे चल रही है। हालांकि, देश में कमजोर विकास और राजनीतिक अस्थिरता के कारण, यह स्थिरता लंबे समय तक नहीं टिक सकती। क्या ये चुनौतियाँ पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति को और बिगाड़ेंगी?

Key Takeaways

  • आईएमएफ लोन ने पाकिस्तान को तत्काल आर्थिक संकट से बचाया है।
  • कमजोर आर्थिक वृद्धि और राजनीतिक अस्थिरता स्थायी समाधान की कमी को दर्शाती है।
  • पाकिस्तान का आईएमएफ के साथ लंबा इतिहास भरोसा नहीं देता।
  • शर्तों का पालन न होने पर असंतुलन फिर से उभर सकता है।
  • आर्थिक सुधारों की कमी से जीवन स्तर में सुधार नहीं हो रहा है।

नई दिल्ली, 22 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। आईएमएफ के लोन ने मौजूदा समय में पाकिस्तान को आर्थिक संकट से तो बचा लिया है, लेकिन कमजोर विकास और घरेलू राजनीति में अस्थिरता यह दर्शाती है कि इस स्थिरता को मध्यम अवधि में बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

एक रिपोर्ट में बताया गया है कि सितंबर 2024 में आईएमएफ ने सात अरब डॉलर की एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी को मंजूरी दी, जिसका उद्देश्य व्यापक आर्थिक स्थिरता को बहाल करना और नीतिगत विश्वसनीयता का पुनर्निर्माण करना था। अब तक, पाकिस्तान को इस कार्यक्रम के तहत लगभग 3.3 अरब डॉलर मिल चुके हैं। शेष 3.7 अरब डॉलर 2027 के अंत तक अर्ध-वार्षिक किश्तों में जारी किए जाने का अनुमान है, बशर्ते समीक्षा सफल रहे और आईएमएफ की शर्तों का निरंतर पालन किया जाए।

इस लेख के अनुसार, यह ढांचा नीतिगत अनुशासन को मजबूत करने के लिए बनाया गया है। आईएमएफ की स्वीकृति खाड़ी क्षेत्र के सहयोगियों के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता का संकेत भी देती है।

इसके बदले में, अधिकारियों ने पारंपरिक व्यापक आर्थिक प्रबंधन में निर्णायक बदलाव का वादा किया है, जिसमें राजकोषीय सख्ती और मौद्रिक नीति का कड़ा रुख शामिल है। हालांकि, इसका परिणाम धीमी वृद्धि के रूप में सामने आया है।

2024 में वास्तविक जीडीपी केवल 2.4 प्रतिशत बढ़ी और 2025 में इसके लगभग 3.5 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। लेख में बताया गया है कि बढ़ती जनसंख्या के चलते प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि सीमित रही है, जिससे जीवन स्तर में बहुत कम सुधार हुआ है।

यह कमजोर पृष्ठभूमि सरकार के सुधार एजेंडे को कठिन बनाती है। आईएमएफ समर्थित नीति, जिसे आलोचक अक्सर एंटी-ग्रोथ कहते हैं, का विरोध बढ़ रहा है। ऊर्जा क्षेत्र में सुधार के लिए प्रस्तावित बिजली दरों में वृद्धि निकट अवधि में महंगाई को लगभग एक प्रतिशत बढ़ा सकती है, जिससे कार्यक्रम के प्रति जन समर्थन कमजोर हो सकता है।

इसके अलावा, आईएमएफ के साथ पाकिस्तान का लंबा इतिहास भी भरोसा नहीं देता। 1958 के बाद से यह अब उसका 24वां प्रोग्राम है, जो किसी अन्य देश से ज्यादा है। अक्सर यह देखा गया है कि बड़े संकटों के दौरान नियमों का पालन किया जाता है, लेकिन जैसे ही दबाव कम होता है, नीतियों में ढील आ जाती है, जिससे कुछ वर्षों बाद वही असंतुलन फिर से उभर आते हैं।

इस लेख में कहा गया है कि हालाँकि पिछले समझौतों ने आमतौर पर तात्कालिक स्थिरता बहाल की है, लेकिन उन्होंने शायद ही कभी टिकाऊ संरचनात्मक सुधार या दीर्घकालिक वृद्धि की संभावनाओं में कोई महत्वपूर्ण सुधार किया हो।

इस तरह, कुछ राजनीतिक आवाजें पहले ही मौजूदा कार्यक्रम से जल्दी बाहर निकलने की मांग कर चुकी हैं। हालांकि, ऐसी मांगों को अभी ज्यादा समर्थन मिलने की संभावना नहीं है, क्योंकि पाकिस्तान की बाहरी वित्तीय आवश्यकताएँ बहुत अधिक हैं और अगला आम चुनाव 2029 तक नहीं होने के कारण, सरकार के पास नीतिगत अनुशासन बनाए रखने के लिए कुछ हद तक राजनीतिक स्पेस है।

कार्यक्रम 2027 के अंत तक चलेगा और जब तक आईएमएफ की निगरानी जारी रहेगी, तब तक पारंपरिक राजकोषीय और मौद्रिक नीतियों का पालन होने की संभावना है। हालांकि, शर्तों के समाप्त होने के बाद नीति में ढील देने या राजनीतिक रूप से महंगे सुधारों को टालने का प्रलोभन फिर उभर सकता है, जैसा कि अतीत में हुआ है, विशेषकर यदि चुनाव नजदीक आते हैं और आर्थिक वृद्धि निराशाजनक रहती है।

-- राष्ट्र प्रेस

अर्पित याज्ञनिक/डीएससी

Point of View

लेकिन क्या यह दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करेगा? हमें यह देखना होगा कि सरकार कैसे नीतियों का पालन करती है और सुधारों को कैसे लागू करती है।
NationPress
18/04/2026

Frequently Asked Questions

आईएमएफ लोन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
आईएमएफ लोन का मुख्य उद्देश्य व्यापक आर्थिक स्थिरता बहाल करना और नीतिगत विश्वसनीयता का पुनर्निर्माण करना है।
पाकिस्तान की जीडीपी वृद्धि का क्या हाल है?
2024 में पाकिस्तान की वास्तविक जीडीपी केवल 2.4 प्रतिशत बढ़ी है और 2025 में इसके लगभग 3.5 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है।
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