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योगी सरकार की कुष्ठावस्था पेंशन योजना: 13,734 दिव्यांगजन को ₹12.31 करोड़ की सहायता

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योगी सरकार की कुष्ठावस्था पेंशन योजना: 13,734 दिव्यांगजन को ₹12.31 करोड़ की सहायता

सारांश

योगी सरकार की कुष्ठावस्था पेंशन योजना ने 2026-27 की पहली तिमाही में 13,734 कुष्ठजनित दिव्यांगजन को ₹12.31 करोड़ की सहायता दी। ₹3,000 मासिक पेंशन के ज़रिये यह योजना आर्थिक सहारे के साथ-साथ सामाजिक पुनर्वास का भी माध्यम बन रही है।

मुख्य बातें

वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 13,734 कुष्ठजनित दिव्यांगजन को योजना का लाभ मिला।
इस अवधि में ₹12.31 करोड़ (₹1,231.17 लाख) की राशि व्यय की गई।
पात्र लाभार्थियों को ₹3,000 प्रतिमाह की दर से पेंशन दी जा रही है।
दिव्यांगता का प्रतिशत पात्रता में बाधक नहीं — कुष्ठ रोग से किसी भी स्तर की दिव्यांगता पर लाभ मिलेगा।
परिवार की वार्षिक आय ₹2 लाख से अधिक न हो और आवेदक उत्तर प्रदेश का मूल निवासी होना आवश्यक।

उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कुष्ठावस्था पेंशन योजना के तहत 13,734 कुष्ठजनित दिव्यांगजन को आर्थिक सहायता प्रदान की है, जिस पर ₹12.31 करोड़ (₹1,231.17 लाख) की राशि व्यय की गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित यह योजना कुष्ठ रोग के उपचार के बाद दिव्यांगता झेल रहे उन लोगों के लिए जीवन-रेखा बन रही है, जिनके परिवार की आय उनके भरण-पोषण के लिए पर्याप्त नहीं है।

योजना का स्वरूप और लाभ

दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा संचालित इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक पात्र लाभार्थी को ₹3,000 प्रतिमाह की दर से पेंशन सीधे उनके खाते में अंतरित की जाती है। यह योजना केवल आर्थिक अनुदान तक सीमित नहीं है — इसका व्यापक उद्देश्य लाभार्थियों को सामाजिक कलंक से मुक्त कर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना भी है।

गौरतलब है कि कुष्ठ रोग से उबर चुके व्यक्ति अक्सर अंगों की विकृति के कारण रोज़गार से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में यह मासिक सहायता उनकी न्यूनतम आजीविका सुनिश्चित करती है।

पात्रता की शर्तें

योजना की एक विशिष्ट बात यह है कि दिव्यांगता का प्रतिशत पात्रता में बाधक नहीं है — कुष्ठ रोग के कारण किसी भी स्तर की दिव्यांगता से प्रभावित व्यक्ति आवेदन कर सकते हैं। आवेदक के लिए आवश्यक शर्तें इस प्रकार हैं:

आवेदक उत्तर प्रदेश का मूल निवासी हो; संबंधित जनपद के मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा जारी दिव्यांगता प्रमाणपत्र हो; परिवार की वार्षिक आय ₹2 लाख से अधिक न हो; और वह व्यक्ति किसी अन्य सरकारी पेंशन योजना का लाभार्थी न हो।

विभाग की प्रतिक्रिया

दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के उप निदेशक डॉ. अमित कुमार राय ने बताया कि विभाग यह सुनिश्चित कर रहा है कि योजना का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक समयबद्ध, पारदर्शी और प्रभावी ढंग से पहुँचे। उन्होंने कहा कि कोई भी पात्र आवेदक इस सामाजिक सुरक्षा योजना से वंचित न रहे, यह सुनिश्चित करना विभाग की प्राथमिकता है।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब कुष्ठ रोग से प्रभावित व्यक्तियों के पुनर्वास को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर नीतिगत जागरूकता बढ़ रही है। 30 जनवरी को मनाए जाने वाले विश्व कुष्ठ उन्मूलन दिवस के संदर्भ में यह आँकड़े उत्तर प्रदेश की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हैं।

आगे चलकर विभाग का लक्ष्य शेष पात्र लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें योजना से जोड़ना है, ताकि कोई भी हकदार व्यक्ति इस सुरक्षा कवच से बाहर न रहे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि उत्तर प्रदेश में कुल कितने कुष्ठजनित दिव्यांगजन हैं और उनमें से कितने अभी भी इस योजना की परिधि से बाहर हैं। ₹3,000 मासिक पेंशन महंगाई के इस दौर में पर्याप्त है या नहीं, यह भी विचारणीय है — विशेषकर जब शहरी क्षेत्रों में जीवनयापन की लागत तेज़ी से बढ़ रही है। सामाजिक सुरक्षा की दिशा में यह कदम सराहनीय है, परंतु योजना की वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी जब पात्र लाभार्थियों की पहचान और नामांकन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और स्वतंत्र रूप से सत्यापन-योग्य हो।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुष्ठावस्था पेंशन योजना क्या है?
यह उत्तर प्रदेश सरकार के दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा संचालित योजना है, जिसके तहत कुष्ठ रोग के कारण दिव्यांगता से प्रभावित व्यक्तियों को ₹3,000 प्रतिमाह की पेंशन दी जाती है। इसका उद्देश्य ऐसे लाभार्थियों को आर्थिक सहारा देना है जिनके परिवार की आय उनके भरण-पोषण के लिए पर्याप्त नहीं है।
2026-27 की पहली तिमाही में कितने लोगों को लाभ मिला?
वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 13,734 कुष्ठजनित दिव्यांगजन को इस योजना का लाभ मिला और इस पर ₹12.31 करोड़ की राशि व्यय की गई।
कुष्ठावस्था पेंशन योजना के लिए पात्रता क्या है?
आवेदक उत्तर प्रदेश का मूल निवासी हो, परिवार की वार्षिक आय ₹2 लाख से अधिक न हो, संबंधित जनपद के मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा जारी दिव्यांगता प्रमाणपत्र हो, और वह किसी अन्य सरकारी पेंशन योजना का लाभार्थी न हो। दिव्यांगता का प्रतिशत पात्रता में बाधक नहीं है।
इस योजना में आवेदन कैसे करें?
आवेदक को संबंधित जनपद के मुख्य चिकित्साधिकारी से दिव्यांगता प्रमाणपत्र प्राप्त करना होगा और दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के माध्यम से आवेदन करना होगा। विभाग यह सुनिश्चित कर रहा है कि कोई भी पात्र आवेदक योजना से वंचित न रहे।
यह योजना कुष्ठ रोगियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
कुष्ठ रोग से उबर चुके व्यक्ति अक्सर अंगों की विकृति के कारण रोज़गार से वंचित रह जाते हैं और सामाजिक कलंक का सामना करते हैं। यह योजना उन्हें न केवल आर्थिक सुरक्षा देती है, बल्कि सम्मानजनक जीवन और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने में भी सहायक है।
राष्ट्र प्रेस
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