UP सैनिक पुनर्वास निधि: शहीदों के आश्रितों और दिव्यांग सैनिकों को कल्याण योजनाओं में मिलेगी प्राथमिकता
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सैनिक पुनर्वास निधि की प्रबंधन समिति की 52वीं बैठक में 12 जून 2026 को जन भवन, लखनऊ में युद्ध या सैन्य कार्रवाई में शहीद हुए सैनिकों के आश्रितों और दिव्यांग सैनिकों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं में प्राथमिकता देने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। यह बैठक उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के विशेष कार्याधिकारी डॉ. सुधीर महादेव बोबडे की अध्यक्षता में आयोजित हुई। सैनिक परिवारों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में इसे एक ठोस कदम माना जा रहा है।
बैठक में लिए गए मुख्य निर्णय
प्रबंधन समिति ने शहीद सैनिकों के आश्रितों और दिव्यांग सैनिकों को कल्याणकारी योजनाओं में प्राथमिकता देने के स्पष्ट निर्देश जारी किए। इसके साथ ही वार्षिक शैक्षिक सहायता अनुदान योजना की समीक्षा की गई और निर्देश दिए गए कि उत्तर प्रदेश पुलिस एवं आर्म्ड फोर्सेज सहायता संस्थान, लखनऊ द्वारा संचालित योजना के तहत स्वीकृत पाठ्यक्रमों को अपनाया जाए।
बैठक में यह भी तय किया गया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अंतर्गत विभिन्न विश्वविद्यालयों में प्रारंभ किए जा रहे नए पाठ्यक्रमों को भी इस शैक्षिक सहायता योजना में सम्मिलित किया जाए, ताकि सैनिक परिवारों के बच्चे समकालीन शिक्षा अवसरों से वंचित न रहें।
परिसंपत्तियों के संरक्षण पर जोर
समिति ने निधि की परिसंपत्तियों की सुरक्षा को लेकर भी कड़े निर्देश दिए। यह स्पष्ट किया गया कि यदि सैनिक पुनर्वास निधि की भूमि किसी विभाग या संस्था को किसी विशेष प्रयोजन के लिए उपलब्ध कराई जाती है, तो उसके बदले उचित प्रतिकर निधि को प्राप्त होना अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए। इससे निधि के दीर्घकालिक हितों की रक्षा होगी।
हरदोई के जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति की संस्तुति के आधार पर प्रदेश के 20 जनपदों में स्थित निधि की 49 दुकानों के मासिक किराए के निर्धारण संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। यह किराया आयकर विभाग द्वारा प्रतिवर्ष घोषित कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स के फार्मूले के अनुसार तय किया जाएगा।
वित्तीय प्रबंधन और बजट अनुमोदन
बैठक में 22 मार्च 2025 को आयोजित 51वीं प्रबंधन समिति की बैठक के कार्यवृत्त की पुष्टि की गई। 24 फरवरी 2026 को आयोजित बजट उप समिति की बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए तैयार बजट के अनुमोदन प्रस्ताव पर विचार किया गया। निधि मुख्यालय के वित्तीय वर्ष 2024-25 के लाभ-हानि खाते और बैलेंस शीट पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
समिति ने बजट उप समिति में सैनिक कल्याण अनुभाग के विशेष सचिव को सदस्य नामित किए जाने के प्रस्ताव पर भी विचार-विमर्श किया। निधि द्वारा संचालित तीन प्रमुख योजनाओं के नामकरण से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा कर आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए।
आम सैनिक परिवारों पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में पूर्व सैनिकों और शहीद परिवारों के पुनर्वास की माँग लगातार उठती रही है। प्राथमिकता-आधारित योजनाओं का सीधा लाभ उन परिवारों को मिलेगा जिनके सदस्यों ने सशस्त्र बलों में सेवा करते हुए अपना जीवन या स्वास्थ्य खोया। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश देश के उन राज्यों में शुमार है जहाँ से सबसे अधिक सैनिक सेना में भर्ती होते हैं, इसलिए यह निर्णय व्यापक सामाजिक प्रभाव रखता है।
आगे की राह
अधिकारियों ने संकेत दिया कि निधि की योजनाओं को समयानुकूल और परिणामोन्मुख बनाने की प्रक्रिया जारी रहेगी। बैठक में उपस्थित सदस्यों और अधिकारियों ने सैनिकों, पूर्व सैनिकों तथा उनके आश्रितों के कल्याण हेतु संचालित योजनाओं को अधिक प्रभावी और व्यापक बनाने के सुझाव प्रस्तुत किए। NEP-आधारित नए पाठ्यक्रमों को शैक्षिक सहायता योजना में शामिल करने की प्रक्रिया शीघ्र आगे बढ़ाई जाएगी।