IMF की चेतावनी: युद्ध, व्यापार तनाव और बढ़ता कर्ज — वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़े खतरे बरकरार
सारांश
मुख्य बातें
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की नीति-निर्धारक समिति इंटरनेशनल मॉनेटरी एंड फाइनेंशियल कमिटी (IMFC) ने 18 अक्टूबर 2026 को चेतावनी दी कि वैश्विक अर्थव्यवस्था अभी भी युद्धों, व्यापारिक तनावों, ऊर्जा आपूर्ति बाधाओं और बढ़ते सार्वजनिक कर्ज के गंभीर जोखिमों के साये में है — भले ही आर्थिक विकास दर अपेक्षाओं से अधिक मजबूत रही है। बैंकॉक में आयोजित अपनी 54वीं बैठक के बाद जारी बयान में समिति ने स्पष्ट किया कि आर्थिक स्थिरता को स्थायी नहीं माना जा सकता।
मुख्य चेतावनियाँ
समिति ने अपने बयान में कहा, 'वैश्विक अर्थव्यवस्था ने हाल के झटकों का सामना उम्मीद से बेहतर तरीके से किया है, लेकिन इसे हमेशा ऐसा ही मान लेना उचित नहीं होगा।' सऊदी अरब के वित्त मंत्री मोहम्मद अल-जदान की अध्यक्षता में जारी इस बयान ने चल रहे संघर्षों के आर्थिक नतीजों, अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन में रुकावटों और कमजोर देशों पर बढ़ते दबाव को प्रमुख चिंताओं के रूप में चिह्नित किया।
समिति के अनुसार, युद्ध और सशस्त्र संघर्षों के कारण भारी मानवीय और आर्थिक क्षति हो रही है, और इसका सर्वाधिक दुष्प्रभाव निम्न-आय वाले देशों पर पड़ रहा है। बढ़ती भू-राजनीतिक तनाव से अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों में और व्यवधान, वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि तथा ऊर्जा एवं खाद्य असुरक्षा के गहराने का खतरा है।
वित्तीय स्थिरता पर खतरे
IMFC ने कई वित्तीय जोखिमों की पहचान की — इनमें सॉवरेन बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, भारी सार्वजनिक ऋण और रिफाइनेंसिंग का दबाव शामिल हैं। समिति के अनुसार, ये परिस्थितियाँ उन देशों के लिए विशेष कठिनाई पैदा कर सकती हैं जिन्हें अधिक उधार लेने की आवश्यकता है या जिनकी अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजारों तक पहुँच सीमित है। गौरतलब है कि यह आकलन ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और दीर्घकालिक संघर्षों के वित्तीय नतीजों को लेकर अनिश्चितता पहले से बनी हुई है।
तकनीकी प्रगति: अवसर और अनिश्चितता
समिति ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर उन्नत बुद्धिमत्ता तकनीकों के बढ़ते प्रभाव पर भी विचार-विमर्श किया। माना गया कि तीव्र तकनीकी प्रगति निवेश और व्यापार को गति दे रही है और उत्पादकता में सुधार की संभावना है। हालाँकि, चेतावनी दी गई कि इन तकनीकों के आर्थिक और वित्तीय प्रभावों को लेकर अनिश्चितता मौजूदा कमजोरियों को और बढ़ा सकती है।
बयान में 'बैंकॉक ब्लूप्रिंट' का स्वागत किया गया — यह एक पहल है जिसका उद्देश्य डिजिटल वित्त की सुरक्षा, साइबर सुरक्षा को मजबूत करना और डिजिटल धोखाधड़ी के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना है।
नीतिगत सुझाव और अपेक्षाएँ
IMFC ने मजबूत समष्टि आर्थिक नीतियों, विश्वसनीय राजकोषीय ढाँचों और सरकारों तथा अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं के बीच निरंतर सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। देशों से आग्रह किया गया कि वे राजकोषीय कमजोरियाँ दूर करें, साथ ही वंचित वर्गों की सुरक्षा करें और दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिए अनिवार्य निवेश बनाए रखें। समिति ने यह भी रेखांकित किया कि महंगाई की अपेक्षाओं को नियंत्रित रखने के लिए केंद्रीय बैंकों की स्वायत्तता अत्यंत जरूरी है।
क्या होगा आगे
समिति ने वैश्विक असंतुलन, व्यापारिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय वाणिज्य को प्रभावित करने वाली विसंगतियों को दूर करने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया। संप्रभु ऋण पुनर्गठन में सुधार — विशेष रूप से कम आय वाले देशों और कमजोर मध्यम-आय वाली अर्थव्यवस्थाओं के लिए — प्रतिबद्धता दोहराई गई। ऋणदाताओं और उधारकर्ताओं दोनों से अधिक पारदर्शिता और ऋण पुनर्गठन व्यवस्थाओं को अधिक पूर्वानुमान योग्य बनाने की माँग की गई। यह स्पष्ट संकेत है कि आगामी महीनों में बहुपक्षीय वित्तीय सहयोग की माँग और बढ़ेगी।