आईएमएफ प्रमुख की चेतावनी: वैश्विक अर्थव्यवस्था पर महंगाई, कर्ज और एआई निवेश जोखिम का तिहरा संकट
सारांश
मुख्य बातें
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने 21 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में स्पष्ट किया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था एक साथ तीन मोर्चों पर दबाव झेल रही है — लगातार बनी हुई महंगाई, कर्ज चुकाने की बढ़ती लागत और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में हो रहे निवेश से जुड़े वित्तीय जोखिम। हालांकि, उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वैश्विक आर्थिक वृद्धि की जो रफ्तार बनी हुई है, वह तमाम झटकों के बावजूद कई विश्लेषकों की अपेक्षा से बेहतर रही है।
महंगाई पर आईएमएफ की स्थिति
कतर इकोनॉमिक फोरम के एक विशेष सत्र में जॉर्जीवा ने कहा, 'महंगाई लगातार बनी हुई है। हमें इसके जल्द काबू में आने की उम्मीद नहीं है।' उन्होंने आगाह किया कि इसका सीधा परिणाम यह होगा कि कई केंद्रीय बैंकों को अपनी मौद्रिक नीतियाँ और सख्त करनी पड़ेंगी। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब दुनिया के अनेक देश ब्याज दरों को उच्च स्तर पर बनाए रखने की वजह से पहले से ही घरेलू खपत और निवेश में सुस्ती देख रहे हैं।
सरकारी कर्ज और बजट घाटे की चुनौती
जॉर्जीवा ने कहा कि मूल्य स्थिरता बनाए रखने की कोशिशों के कारण कर्ज का बोझ भारी होता जा रहा है। उन्होंने स्वीकार किया कि सरकारें अपने खर्च और बजट घाटे को नियंत्रित करने की जरूरत से भलीभांति परिचित हैं, 'लेकिन इस दिशा में अभी पर्याप्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।' विशेषज्ञों का मानना है कि यह टिप्पणी विकसित और उभरती, दोनों तरह की अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक अप्रत्यक्ष संकेत है।
एआई निवेश से उपजते वित्तीय खतरे
जॉर्जीवा ने एआई के लिए हो रही फाइनेंसिंग को लेकर विशेष चिंता व्यक्त की। उन्होंने उधार लेकर निवेश करने और परस्पर जुड़ी कंपनियों के बीच चक्राकार ऋण-प्रवाह को जोखिम का स्रोत बताते हुए कहा, 'यह ऐसी चीज है, जिस पर हमें ध्यान देने की जरूरत है।' उन्होंने यह भी चेताया कि यदि एआई की क्षमताओं के बारे में जो अपेक्षाएँ बनाई गई हैं, वे पूरी नहीं हुईं, तो 'इससे पैदा हुई निराशा पूरी व्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका बन सकती है।' यह जोखिम मुख्य रूप से अमेरिका में केंद्रित है, हालाँकि एशिया और यूरोप की कंपनियाँ भी एआई की आपूर्ति शृंखला से जुड़ी हैं।
तीन प्रतिशत वृद्धि दर और उम्मीद की किरण
इन सभी जोखिमों के बावजूद जॉर्जीवा ने कहा कि यदि वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर करीब तीन प्रतिशत बनी रहती है, 'तो यह अपने आप में बहुत बड़ी उपलब्धि है।' उन्होंने ऊर्जा आपूर्ति संकट के दौरान तेजी से उठाए गए कदमों को सकारात्मक उदाहरण के रूप में पेश किया। साथ ही उन्होंने स्वीकार किया कि भले ही दुनिया पहले के मुकाबले कम एकजुट हो, परस्पर निर्भरता और सहयोग अभी भी वैश्विक व्यवस्था की नींव बने हुए हैं।
अक्टूबर में आएंगे नए वैश्विक अनुमान
जॉर्जीवा के अनुसार अक्टूबर 2026 में जारी होने वाले आईएमएफ के वैश्विक आर्थिक परिदृश्य (World Economic Outlook) में भी यह संकेत मिलेगा कि 'जोखिम अभी ऊंचे बने हुए हैं।' उन्होंने अंत में कहा, 'हमें सावधान और सतर्क रहने की जरूरत है। अनिश्चितता अब नई सामान्य स्थिति बन गई है।' यह बयान वैश्विक नीति-निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है कि आने वाले महीने किसी राहत की गारंटी नहीं देते।