भारत-साइप्रस रणनीतिक साझेदारी मज़बूत: उच्चायुक्त मनीष ने राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलाइड्स से की मुलाकात
सारांश
मुख्य बातें
भारत और साइप्रस के बीच रणनीतिक साझेदारी को उच्च-स्तरीय राजनयिक संवाद के ज़रिए नई गति मिली है। साइप्रस में भारत के उच्चायुक्त मनीष ने 1 अक्टूबर 2026 को निकोसिया स्थित राष्ट्रपति भवन में साइप्रस गणराज्य के स्वतंत्रता दिवस की 66वीं वर्षगांठ के स्वागत समारोह में भाग लिया और राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की ओर से बधाई और शुभकामनाएँ दीं।
स्वतंत्रता दिवस समारोह में भारतीय प्रतिनिधित्व
निकोसिया स्थित भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि उच्चायुक्त मनीष ने स्वागत समारोह से पूर्व औपचारिक सैन्य परेड में भी भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने प्रथम महिला फिलिप्पा करसेरा क्रिस्टोडौलाइड्स, विदेश मंत्री डॉ. कॉन्स्टेंटिनोस कोम्बोस और मारिया हादजीसोलोमौ कोम्बोस का भी अभिवादन किया। उच्चायोग के अनुसार इस अवसर ने दोनों देशों के बीच मित्रता की गर्मजोशी को प्रतिबिंबित किया।
रक्षा सहयोग रोडमैप 2026-2031 पर चर्चा
गुरुवार को उच्चायुक्त मनीष ने रक्षा अताशे ग्रुप कैप्टन परमिंदर सी. अंतील से भी मुलाकात की। उच्चायोग के अनुसार इस चर्चा का केंद्र भारत-साइप्रस रक्षा सहयोग रोडमैप 2026-2031 और द्विपक्षीय रक्षा सहयोग कार्यक्रम को आगे बढ़ाना रहा। बैठक में आदान-प्रदान, प्रशिक्षण और समुद्री सहयोग के अवसरों पर विशेष ज़ोर दिया गया, जिन्हें दोनों देशों के नेताओं ने विकास के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया है।
कनेक्टिविटी और समुद्री क्षेत्र में सहयोग
उच्चायुक्त मनीष ने साइप्रस गणराज्य की परिवहन, संचार और कार्य मंत्री एवी त्सोलाकी से भी बैठक की। इस बातचीत में कनेक्टिविटी, परिवहन और समुद्री क्षेत्र में भारत-साइप्रस सहयोग को और मज़बूत करने के रास्तों पर विमर्श हुआ। उच्चायोग के अनुसार यह संवाद दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में बढ़ती गति का प्रमाण है।
भारत-साइप्रस संबंधों का व्यापक संदर्भ
यह कूटनीतिक सक्रियता ऐसे समय में आई है जब भारत पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र में अपनी उपस्थिति और साझेदारियों को नए सिरे से विस्तार दे रहा है। गौरतलब है कि साइप्रस यूरोपीय संघ का सदस्य होने के साथ-साथ भारत के लिए एक महत्त्वपूर्ण निवेश और समुद्री सहयोग केंद्र भी है। रक्षा, परिवहन और कूटनीतिक स्तर पर एक साथ हुई इन बैठकों से स्पष्ट है कि दोनों देश अपनी साझेदारी को बहुआयामी स्वरूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं। आगामी समय में रक्षा रोडमैप 2026-2031 के क्रियान्वयन पर दोनों पक्षों की नज़र रहेगी।