ईरान: इस्फहान यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के बमबारी स्थल पर बनेगा 'वॉर म्यूजियम', 1.1 करोड़ डॉलर का नुकसान
सारांश
Key Takeaways
ईरान ने इस्फहान यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में कथित अमेरिकी-इजरायली हमलों से क्षतिग्रस्त हिस्से को 'वॉर म्यूजियम' में तब्दील करने की योजना बनाई है। संस्थान के प्रमुख जफरोल्लाह कलांतरी ने यह जानकारी दी। सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, प्रारंभिक आकलन में विश्वविद्यालय के बुनियादी ढाँचे को करीब 1.1 करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ है।
मुख्य घटनाक्रम
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 फरवरी को ईरान के प्रमुख शहरों पर अमेरिका-इजरायल ने कथित तौर पर संयुक्त हमले किए, जो अगले 40 दिनों तक जारी रहे। मार्च माह में ईरान के एमआईटी (मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) के समकक्ष माने जाने वाले इस संस्थान को निशाना बनाया गया। ईरानी अधिकारियों का दावा है कि देशभर में 30 से अधिक विश्वविद्यालयों को इन हमलों में नुकसान पहुँचा, जिनमें राजधानी तेहरान के संस्थान भी शामिल हैं। इसके अलावा रिहायशी इलाकों और अन्य नागरिक ढाँचे को भी निशाना बनाए जाने की बात कही गई है।
वॉर म्यूजियम की योजना
संस्थान प्रमुख जफरोल्लाह कलांतरी ने कहा कि "मौजूदा क्षतिग्रस्त स्थल को संरक्षित किया जाएगा और इसे वॉर म्यूजियम के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि यह देश के वैज्ञानिक दमन का ऐतिहासिक दस्तावेज बन सके।" उन्होंने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय के अन्य हिस्सों में नए भवनों के निर्माण और उन्नत उपकरणों की व्यवस्था के लिए अलग से स्थान चिन्हित किया गया है।
संस्थान की पृष्ठभूमि
इस्फहान यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी की नींव 1974 में रखी गई थी। इसे अमेरिकी तकनीकी शिक्षा की तर्ज पर ईरान को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था। अमेरिका-इजरायल का मानना है कि इस प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में घातक बैलिस्टिक मिसाइलों और शाहेद ड्रोनों का ब्लूप्रिंट तैयार किया जाता है। गौरतलब है कि यह संस्थान ईरान के सैन्य-औद्योगिक परिसर का एक प्रमुख स्तंभ माना जाता है।
प्रतीकात्मक और कूटनीतिक संदेश
इस स्थल को संग्रहालय में बदलने का फैसला न केवल हमलों के नतीजे को दर्शाने के लिए है, बल्कि इसे एक प्रतीकात्मक कदम के तौर पर भी देखा जा रहा है। ईरान इसके ज़रिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक संस्थानों पर हमले के मुद्दे को उजागर करना चाहता है। यह ऐसे समय में आया है जब ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव अपने चरम पर बताया जा रहा है।