क्या ईरान और पाकिस्तान से एक ही दिन में 11,000 से अधिक अफगान शरणार्थियों की जबरन वापसी हुई?

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क्या ईरान और पाकिस्तान से एक ही दिन में 11,000 से अधिक अफगान शरणार्थियों की जबरन वापसी हुई?

सारांश

ईरान और पाकिस्तान से एक ही दिन में 11,000 से अधिक अफगान शरणार्थियों की जबरन वापसी की घटना ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचा है। क्या यह कदम अफगानिस्तान में मानवाधिकारों के उल्लंघन का संकेत है? जानिए इस स्थिति के पीछे की कहानी और इसके संभावित नतीजे।

मुख्य बातें

ईरान और पाकिस्तान से 11,000 से अधिक अफगान शरणार्थियों की जबरन वापसी।
तालिबान शासन के तहत मानवाधिकारों का उल्लंघन।
पेशावर उच्च न्यायालय में जबरन निर्वासन रोकने की मांग।

काबुल, 23 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। ईरान और पाकिस्तान से एक ही दिन में 11,000 से अधिक अफगान शरणार्थियों को जबरन वापस भेजा गया है। यह जानकारी रविवार को तालिबान के एक अधिकारी ने दी और स्थानीय मीडिया ने इसकी पुष्टि की।

तालिबान के उप प्रवक्ता हम्दुल्लाह फित्रत ने प्रवासियों से जुड़े उच्च आयोग की रिपोर्ट को प्लेटफ़ॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किया। रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार को कुल 2,102 अफगान परिवार यानी 11,855 लोग अपने देश लौटे हैं।

ये अफगान नागरिक निमरोज स्थित पुल-ए-अबरिशम, कंधार के स्पिन बोलदक, हेलमंद के बहरामचा, हेरात के इस्लाम क़ला और नंगरहार के तोरखम सीमा मार्ग से अफगानिस्तान में दाखिल हुए।

फित्रत ने बताया कि देश लौटे 2,287 शरणार्थियों (कुल 13,246 लोगों) को उनके गृह प्रांतों तक पहुंचाया गया, जबकि 1,760 लोगों को मानवीय सहायता उपलब्ध कराई गई। इसके साथ ही लौटने वालों को 1,060 सिम कार्ड भी वितरित किए गए।

इस बीच, इस सप्ताह करीब 400 अफगान नागरिकों ने पेशावर उच्च न्यायालय का रुख किया और जबरन निर्वासन रोकने की मांग की। उन्होंने तर्क दिया कि यदि उन्हें अफगानिस्तान भेजा गया तो उनका उत्पीड़न किया जाएगा, जो अंतरराष्ट्रीय कानून और ‘नॉन-रिफाउलमेंट’ सिद्धांत का उल्लंघन है।

याचिकाकर्ताओं में ज़किया दु्निया ग़ज़ल समेत कई अन्य कलाकार शामिल हैं। उन्होंने अदालत से 13 दिसंबर 2024 के उस फैसले के अनुसार निर्णय देने की मांग की, जिसमें कुछ कलाकारों और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को निर्वासन से संरक्षण दिया गया था।

याचिका में पाकिस्तान के संघीय गृह मंत्रालय, कैबिनेट डिवीजन के सचिव, एनएडीआरए, इमिग्रेशन और एफआईए के महासंचालकों सहित खैबर पख्तूनख्वा के मुख्य सचिव और गृह सचिव को प्रतिवादी बनाया गया है।

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि तालिबान शासन के बाद अफगानिस्तान में कलाकारों और गायकों के लिए रहना बेहद खतरनाक है, क्योंकि संगीत और सांस्कृतिक गतिविधियों पर खुला प्रतिबंध लगाया गया है। उन्होंने दावा किया कि वे अपनी जान बचाने के लिए पेशावर में बस गए थे।

उन्होंने पाकिस्तान के जबरन निर्वासन अभियान को संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के समझौतों और पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के खिलाफ बताया।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह आवश्यक है कि हमारे देश और अंतरराष्ट्रीय समुदाय अफगान शरणार्थियों की स्थिति पर ध्यान दें। तालिबान शासन के तहत, इन नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है, और हमें उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या अफगान शरणार्थियों की वापसी मानवाधिकारों का उल्लंघन है?
हां, जबरन वापसी मानवाधिकारों के उल्लंघन के रूप में देखी जा सकती है, खासकर तब जब शरणार्थियों की सुरक्षा को खतरा हो।
तालिबान के शासन के तहत अफगानिस्तान में क्या स्थिति है?
तालिबान शासन के बाद, अफगानिस्तान में संगीत और सांस्कृतिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, जिससे कलाकारों और शरणार्थियों के लिए रहना कठिन हो गया है।
राष्ट्र प्रेस
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