इजरायल ने क्रिटिकल मिनरल्स प्रस्ताव को दी मंजूरी, गिदोन सार बोले- 'AI और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा फैसला'

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इजरायल ने क्रिटिकल मिनरल्स प्रस्ताव को दी मंजूरी, गिदोन सार बोले- 'AI और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा फैसला'

सारांश

इजरायल सरकार ने क्रिटिकल मिनरल्स आपूर्ति प्रस्ताव को पूर्ण बहुमत से मंजूरी दी। विदेश मंत्री गिदोन सार ने इसे AI और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य बताया। यह कदम चीन की खनिज आपूर्ति पर निर्भरता घटाने की वैश्विक रणनीति का हिस्सा है।

Key Takeaways

  • इजरायल सरकार ने 26 अप्रैल 2025 को क्रिटिकल मिनरल्स आपूर्ति प्रस्ताव को पूर्ण बहुमत से मंजूरी दी।
  • विदेश मंत्री गिदोन सार ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उद्योग के लिए अनिवार्य बताया।
  • इजरायल ब्रोमीन, पोटाश, मैग्नीशियम और फॉस्फेट रॉक का उत्पादन करता है, मुख्यतः डेड सी और नेगेव की खदानों से।
  • 4 फरवरी 2025 को वाशिंगटन में 50 देशों के सम्मेलन में FORGE पहल लॉन्च की गई, जिसमें भारत के विदेश मंत्री जयशंकर भी शामिल हुए।
  • चीन दुर्लभ मृदा तत्वों के प्रसंस्करण में 85%25 तक की वैश्विक हिस्सेदारी रखता है — इसी निर्भरता को कम करना इस गठबंधन का मुख्य लक्ष्य है।
  • अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सहयोगी देशों के बीच Preferential Trade Zone बनाने का प्रस्ताव रखा था।

तेल अवीव, 26 अप्रैल 2025इजरायल सरकार ने रविवार, 26 अप्रैल को क्रिटिकल मिनरल्स की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को पूर्ण बहुमत से पारित कर दिया। इजरायली विदेश मंत्री गिदोन सार ने इस फैसले को देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उद्योग के भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक करार दिया।

गिदोन सार का बयान — क्यों जरूरी है यह कदम?

विदेश मंत्री गिदोन सार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर लिखा कि सरकार ने क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में इजरायल के सामरिक हितों को पूरा करने के उनके प्रस्ताव को पूर्ण बहुमत से स्वीकृति दे दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन खनिजों की निर्बाध आपूर्ति अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे उभरते उद्योगों की रीढ़ है।

सार ने यह भी याद दिलाया कि फरवरी 2025 में वाशिंगटन डीसी में आयोजित क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल सम्मेलन में उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मेजबानी में इजरायल का प्रतिनिधित्व किया था। उन्होंने कहा कि इजरायल इस वैश्विक चुनौती से निपटने में अमेरिका के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।

इजरायल की खनिज संपदा और तकनीकी क्षमता

इजरायल भले ही दुनिया का सबसे बड़ा खनिज उत्पादक देश न हो, लेकिन वह ब्रोमीन, पोटाश, मैग्नीशियम और फॉस्फेट रॉक जैसे महत्वपूर्ण खनिजों का उत्पादन करता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार ये खनिज मुख्यतः डेड सी (मृत सागर) और नेगेव रेगिस्तान की खदानों से निकाले जाते हैं।

इजरायल की असली ताकत उसकी तकनीकी दक्षता में है। वह खनन तकनीक, पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) और सामग्री विज्ञान (Material Science) में अत्याधुनिक समाधान देने वाला एक प्रमुख वैश्विक केंद्र माना जाता है। यही कारण है कि वैश्विक खनिज आपूर्ति श्रृंखला की पुनर्संरचना में इजरायल की भूमिका रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो जाती है।

वाशिंगटन सम्मेलन और FORGE पहल — वैश्विक संदर्भ

4 फरवरी 2025 को वाशिंगटन डीसी में 50 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने एक ऐतिहासिक सम्मेलन में भाग लिया। इसमें भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर भी शामिल हुए थे। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस अवसर पर सहयोगी देशों के बीच क्रिटिकल मिनरल्स के लिए एक प्राथमिक व्यापार क्षेत्र (Preferential Trade Zone) स्थापित करने का प्रस्ताव रखा।

वेंस ने कहा कि यह ट्रेड जोन बाहरी व्यवधानों से सुरक्षित रहेगा और उत्पादन के हर चरण पर निर्धारित संदर्भ कीमतों पर आधारित होगा। उनका स्पष्ट लक्ष्य था — कीमतों को स्थिर करना, निजी निवेश को बढ़ावा देना और दीर्घकालिक योजना को व्यावहारिक बनाना।

इस सम्मेलन में FORGE (Framework for Operationalizing Resilient Global Ecosystems) नामक एक नई बहुपक्षीय पहल की घोषणा की गई, जिसका उद्देश्य लिथियम, कोबाल्ट और दुर्लभ मृदा तत्वों (Rare Earth Elements) के खनन और प्रसंस्करण में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को संस्थागत रूप देना है।

चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति

विशेषज्ञों के अनुसार इस पूरी पहल का केंद्रीय उद्देश्य चीन के एकाधिकार वाली खनिज आपूर्ति श्रृंखला पर पश्चिमी देशों की निर्भरता को घटाना है। वर्तमान में दुर्लभ मृदा तत्वों के वैश्विक उत्पादन में चीन की हिस्सेदारी 60%25 से अधिक है, जबकि प्रसंस्करण में यह आंकड़ा 85%25 तक पहुंचता है।

विदेश मंत्री गिदोन सार ने भी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अत्यधिक एकाग्रता से उत्पन्न होने वाले भू-राजनीतिक जोखिमों पर गहरी चिंता व्यक्त की थी और संरचित अंतरराष्ट्रीय सहयोग की वकालत की थी। इजरायल का यह प्रस्ताव उसी दिशा में एक ठोस कदम है।

आगे क्या होगा?

इजरायल सरकार द्वारा इस प्रस्ताव की मंजूरी के बाद अब अमेरिका और अन्य सहयोगी देशों के साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय समझौतों की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है। FORGE फ्रेमवर्क के तहत आने वाले महीनों में और देश जुड़ सकते हैं। भारत की भागीदारी को देखते हुए इस वैश्विक खनिज गठबंधन में भारत-इजरायल-अमेरिका के बीच त्रिपक्षीय सहयोग की संभावनाएं भी प्रबल हो गई हैं।

Point of View

बल्कि वैश्विक खनिज भू-राजनीति में पश्चिमी खेमे की पुनर्संरचना का हिस्सा है। विडंबना यह है कि जो देश खनिज उत्पादन में बड़ा नहीं है, वही अपनी तकनीकी श्रेष्ठता के दम पर इस गठबंधन में केंद्रीय भूमिका निभाने जा रहा है। चीन के खनिज एकाधिकार को तोड़ने की यह कोशिश तब और महत्वपूर्ण हो जाती है जब AI की होड़ में हर देश को लिथियम और दुर्लभ मृदा तत्वों की सख्त जरूरत है। भारत की इस गठबंधन में मौजूदगी नई दिल्ली के लिए रणनीतिक अवसर है — लेकिन यह सुनिश्चित करना होगा कि हम केवल उपभोक्ता न रहें, बल्कि प्रसंस्करण और तकनीक में भी हिस्सेदार बनें।
NationPress
26/04/2026

Frequently Asked Questions

इजरायल ने क्रिटिकल मिनरल्स प्रस्ताव क्यों मंजूर किया?
इजरायल सरकार ने क्रिटिकल मिनरल्स की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपने सामरिक हितों को सुरक्षित करने के लिए यह प्रस्ताव पारित किया। विदेश मंत्री गिदोन सार के अनुसार यह राष्ट्रीय सुरक्षा और AI उद्योग के लिए अनिवार्य है।
गिदोन सार कौन हैं और उन्होंने क्या कहा?
गिदोन सार इजरायल के विदेश मंत्री हैं। उन्होंने कहा कि क्रिटिकल मिनरल्स की आपूर्ति अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उद्योग के लिए अत्यंत जरूरी है।
FORGE पहल क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
FORGE यानी 'Framework for Operationalizing Resilient Global Ecosystems' एक बहुपक्षीय पहल है जिसे फरवरी 2025 के वाशिंगटन सम्मेलन में लॉन्च किया गया। इसका उद्देश्य लिथियम, कोबाल्ट और दुर्लभ मृदा तत्वों के खनन व प्रसंस्करण में अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना है।
क्रिटिकल मिनरल्स पर चीन का क्या दबदबा है?
चीन वैश्विक दुर्लभ मृदा तत्व उत्पादन में 60%25 से अधिक और प्रसंस्करण में 85%25 तक की हिस्सेदारी रखता है। इसी एकाधिकार को कम करने के लिए अमेरिका की अगुवाई में 50 देशों का गठबंधन बन रहा है।
भारत इस क्रिटिकल मिनरल्स गठबंधन में कैसे शामिल है?
भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 4 फरवरी 2025 को वाशिंगटन में आयोजित क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल सम्मेलन में भाग लिया था। भारत इस वैश्विक खनिज गठबंधन का एक महत्वपूर्ण सदस्य है।
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