ऐतिहासिक! चीनी नौसेना का 'सिल्क रोड आर्क' अस्पताल जहाज 234 दिन बाद स्वदेश लौटा
सारांश
Key Takeaways
- 'सिल्क रोड आर्क' अस्पताल जहाज 26 अप्रैल 2025 को 234 दिनों की यात्रा के बाद सान्या, हाईनान बंदरगाह पर लौटा।
- जहाज ने कुल 36,000 समुद्री मील की दूरी तय की और 8 देशों में चिकित्सा सेवाएं दीं।
- यह 2010 के बाद से 'सामंजस्यपूर्ण मिशन' श्रृंखला का 11वां मिशन और 'सिल्क रोड आर्क' की पहली विदेशी यात्रा थी।
- पहली बार किसी चीनी अस्पताल जहाज ने मैगलन जलडमरूमध्य पार करने का ऐतिहासिक कीर्तिमान बनाया।
- मिशन में 26,300 से अधिक चिकित्सा उपचार, 2,700 से अधिक ऑपरेशन और 136 मरीजों को अस्पताल में भर्ती किया गया।
- चिकित्सा सेवाओं के साथ-साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सैन्य सहयोग भी मिशन का हिस्सा रहा।
बीजिंग, 26 अप्रैल 2025। चीनी नौसेना का 'सिल्क रोड आर्क' अस्पताल जहाज 'सामंजस्यपूर्ण मिशन-2025' को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद 26 अप्रैल 2025 को दक्षिण चीन के हाईनान प्रांत के सान्या शहर स्थित नौसैनिक बंदरगाह पर वापस पहुंचा। यह जहाज 234 दिनों की लंबी समुद्री यात्रा के दौरान कई देशों में चिकित्सा सेवाएं प्रदान करते हुए लौटा है।
मिशन की शुरुआत और यात्रा का विवरण
'सिल्क रोड आर्क' अस्पताल जहाज 5 सितंबर 2024 को दक्षिण चीन के फूच्येन प्रांत के छुएनचो बंदरगाह से रवाना हुआ था। इस दौरान जहाज ने कुल लगभग 36,000 समुद्री मील की दूरी तय की, जो पृथ्वी की परिधि से भी डेढ़ गुना से अधिक है।
यह वर्ष 2010 के बाद से चीनी नौसेना द्वारा 'सामंजस्यपूर्ण मिशन' श्रृंखला में भाग लेने का 11वां अवसर है। साथ ही यह 'सिल्क रोड आर्क' जहाज की पहली विदेशी समुद्री यात्रा भी थी, जिसने इसे चीनी नौसैनिक इतिहास में एक विशेष स्थान दिलाया।
किन देशों में दी गई चिकित्सा सेवाएं
मिशन के दौरान 'सिल्क रोड आर्क' ने नौरू, फिजी, टोंगा, जमैका, बारबाडोस और पापुआ न्यू गिनी में चिकित्सा सेवाएं प्रदान कीं। इसके अतिरिक्त, जहाज ने ब्राजील और चिली में चिकित्सा आवाजाही की।
तकनीकी पड़ावों के रूप में जहाज निकारागुआ, उरुग्वे और फिजी में रुका। यात्रा के दौरान जहाज ने ऐतिहासिक मैगलन जलडमरूमध्य को भी पार किया — यह पहली बार था जब किसी चीनी अस्पताल जहाज ने इस जलमार्ग से गुजरने का कीर्तिमान स्थापित किया।
ऐतिहासिक उपलब्धि — मैगलन जलडमरूमध्य पार
मैगलन जलडमरूमध्य दक्षिण अमेरिका के सुदूर दक्षिणी छोर पर स्थित एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण समुद्री मार्ग है, जो अटलांटिक और प्रशांत महासागरों को जोड़ता है। यह पिछले 13 वर्षों में दूसरी बार है जब चीनी नौसेना ने इस बंदरगाह से आवागमन किया, जो चीन की बढ़ती वैश्विक नौसैनिक उपस्थिति का संकेत देता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस जलमार्ग से गुजरना चीन की नौसैनिक क्षमता और रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं दोनों को रेखांकित करता है। यह कदम चीन की 'मैरीटाइम सिल्क रोड' नीति के व्यापक ढांचे में भी फिट बैठता है।
चिकित्सा सेवाओं का रिकॉर्ड — आंकड़े जो बोलते हैं
मिशन के दौरान चिकित्सा दल ने 26,300 से अधिक बार चिकित्सा उपचार किया। इसके अलावा 2,700 से अधिक ऑपरेशन और 17,000 से अधिक सहायक परीक्षण किए गए, जबकि 136 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर उपचार दिया गया।
चिकित्सा सेवाओं के साथ-साथ मिशन के दौरान सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सैन्य सहयोग के कार्यक्रम भी आयोजित किए गए, जो चीन की 'सॉफ्ट पावर' कूटनीति का अहम हिस्सा हैं।
वैश्विक संदर्भ और भारत के लिए निहितार्थ
चीन का यह 'सामंजस्यपूर्ण मिशन' कार्यक्रम केवल मानवीय सहायता तक सीमित नहीं है — यह उन देशों में चीन की कूटनीतिक पैठ बनाने का एक सुनियोजित प्रयास भी माना जाता है, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र और लैटिन अमेरिका में भारत और अमेरिका के प्रभाव क्षेत्र में आते हैं। आलोचकों का कहना है कि इस प्रकार के मिशन चीन की 'मेडिकल डिप्लोमेसी' के जरिए रणनीतिक भागीदारी को मजबूत करने की व्यापक योजना का हिस्सा हैं।
उल्लेखनीय है कि जिन देशों में यह जहाज गया — जैसे पापुआ न्यू गिनी, फिजी, टोंगा — वे सभी प्रशांत द्वीप राष्ट्र हैं, जहां चीन पिछले कुछ वर्षों में तेजी से अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। यह भारत और उसके रणनीतिक सहयोगियों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चीन इस सफल मिशन के बाद 'सामंजस्यपूर्ण मिशन' की अगली कड़ी में किन नए देशों को शामिल करता है और क्या भारत के पड़ोसी देश भी इस सूची में आते हैं।
(साभार — चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)