ऐतिहासिक फैसला: इजरायल ने सोमालीलैंड में नियुक्त किया पहला राजदूत, सोमालिया भड़का
सारांश
Key Takeaways
- इजरायली कैबिनेट ने 26 अप्रैल 2025 को माइकल लोटेम को सोमालीलैंड के लिए इजरायल का पहला राजदूत नियुक्त करने की मंजूरी दी।
- यह नियुक्ति 'नॉन-रेजिडेंट' आधार पर होगी — लोटेम यरुशलम से ही सोमालीलैंड के साथ द्विपक्षीय संबंध संभालेंगे।
- विदेश मंत्री गिदोन सार ने 15 अप्रैल 2025 को लोटेम के नाम की पहले ही घोषणा कर दी थी।
- सोमालिया ने इस फैसले को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए इसे खारिज किया।
- सऊदी अरब, तुर्की, मिस्र, पाकिस्तान, बांग्लादेश और इंडोनेशिया ने संयुक्त बयान में इजरायल के इस कदम की निंदा की।
- इजरायल ने 26 दिसंबर 2024 को सोमालीलैंड को स्वतंत्र देश की मान्यता दी थी, जो 1991 से सोमालिया से अलग है।
यरुशलम/तेल अवीव, 26 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। इजरायली कैबिनेट ने रविवार, 26 अप्रैल 2025 को एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए वरिष्ठ राजनयिक माइकल लोटेम को सोमालीलैंड के लिए इजरायल का पहला राजदूत नियुक्त करने की मंजूरी दे दी। इस फैसले ने हॉर्न ऑफ अफ्रीका क्षेत्र में एक नया कूटनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। इजरायली मीडिया संस्थान जेएनएस ने इस नियुक्ति की पुष्टि की है।
कौन हैं माइकल लोटेम?
इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने 15 अप्रैल 2025 को ही माइकल लोटेम के नाम की सार्वजनिक घोषणा कर दी थी। लोटेम इजरायल के अनुभवी और वरिष्ठ राजनयिक हैं जिन्होंने अगस्त 2025 तक केन्या, युगांडा, तंजानिया, मलावी और सेशेल्स में राजदूत के रूप में सेवाएं दी हैं।
इसके अतिरिक्त, लोटेम अजरबैजान और कजाकिस्तान में भी इजरायल का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उनका यह व्यापक राजनयिक अनुभव उन्हें इस संवेदनशील पद के लिए उपयुक्त उम्मीदवार बनाता है।
उल्लेखनीय है कि यह नियुक्ति फिलहाल "नॉन-रेजिडेंट" आधार पर होगी, यानी लोटेम यरुशलम में रहते हुए ही सोमालीलैंड के साथ द्विपक्षीय संबंधों का संचालन करेंगे।
सोमालीलैंड का इतिहास और इजरायल की मान्यता
सोमालीलैंड ने 1991 में सोमालिया से अलग होकर खुद को एक स्वतंत्र राष्ट्र घोषित किया था। तीन दशकों से अधिक समय बाद भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय के अधिकांश देशों ने इसे राजनयिक मान्यता नहीं दी है।
इजरायल ने 26 दिसंबर 2024 को सोमालीलैंड को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देने की घोषणा की थी। उस समय प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा था कि इजरायल कृषि, स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी और अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों में सोमालीलैंड के साथ सहयोग का विस्तार करेगा। अब राजदूत की नियुक्ति उसी नीति की अगली कड़ी है।
सोमालिया और मुस्लिम देशों की कड़ी प्रतिक्रिया
सोमालिया ने इजरायल के इस कदम को अपनी संप्रभुता का सीधा उल्लंघन करार दिया है। सोमालिया गार्डियन के अनुसार, सोमालियाई विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कहा कि वह अपने क्षेत्र के किसी भी हिस्से को अलग कूटनीतिक मान्यता देने की किसी भी कोशिश को "सिरे से खारिज" करता है।
मंत्रालय ने यह भी चेतावनी दी कि इस प्रकार के कदम क्षेत्रीय स्थिरता को कमजोर करने का काम करते हैं। इसके साथ ही सऊदी अरब, तुर्की, मिस्र, बांग्लादेश, पाकिस्तान और इंडोनेशिया सहित कई मुस्लिम बहुल देशों ने संयुक्त बयान जारी कर इजरायल के इस निर्णय की कड़ी निंदा की और इसे सोमालिया की संप्रभुता का "स्पष्ट उल्लंघन" बताया।
रणनीतिक महत्व और व्यापक संदर्भ
इजरायल का यह कदम महज कूटनीतिक औपचारिकता नहीं है — इसके पीछे एक सुनियोजित भू-राजनीतिक रणनीति दिखती है। हॉर्न ऑफ अफ्रीका में अदन की खाड़ी के निकट स्थित सोमालीलैंड का बंदरगाह बरबेरा वैश्विक व्यापार मार्गों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इजरायल इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज कर ईरान समर्थित ताकतों और हूती विद्रोहियों के प्रभाव को संतुलित करने की कोशिश कर रहा है।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि जब इजरायल गाजा संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर अलगाव का सामना कर रहा है, ऐसे में अफ्रीकी देशों के साथ नए संबंध बनाना उसकी कूटनीतिक पुनर्स्थापना की रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है। आलोचकों का कहना है कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों के विरुद्ध है।
आने वाले हफ्तों में अरब लीग और अफ्रीकी संघ की प्रतिक्रिया और संभावित कूटनीतिक कदम इस विवाद की दिशा तय करेंगे।