सीजफायर के 24 घंटे के भीतर इजरायल का लेबनान पर हमला, जबल अल-रफी में 5 की मौत
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण लेबनान में इजरायल ने हिज्बुल्लाह के साथ युद्धविराम लागू होने के 24 घंटों के भीतर ही हवाई हमला कर दिया, जिसमें 5 लोगों की मौत हो गई। लेबनान की नेशनल न्यूज एजेंसी (NNA) के अनुसार, दक्षिणी लेबनानी शहर सज्द के निकट स्थित जबल अल-रफी क्षेत्र को एयर स्ट्राइक में निशाना बनाया गया। युद्धविराम शुक्रवार, 20 जून को स्थानीय समयानुसार शाम 4 बजे से प्रभावी हुआ था।
मुख्य घटनाक्रम
युद्धविराम पर एक दिन पहले ही दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी थी। इसके बावजूद समझौता लागू होने के कुछ ही घंटों बाद इजरायली वायुसेना ने जबल अल-रफी क्षेत्र पर हमला किया, जिससे युद्धविराम की वास्तविक स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब दोनों पक्षों ने सार्वजनिक रूप से समझौते का पालन करने की प्रतिबद्धता जताई थी। हिज्बुल्लाह के संसदीय गुट 'लॉयल्टी टू द रेजिस्टेंस' के सदस्य इब्राहिम अल-मूसावी ने कहा था कि यदि इजरायल भी समझौते की शर्तों का पालन करता है, तो हिज्बुल्लाह युद्धविराम का सम्मान करता रहेगा।
हिज्बुल्लाह प्रमुख की चेतावनी
हिज्बुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने शुक्रवार को अल-मनार टीवी पर प्रसारित अपने संबोधन में कहा, 'हिज्बुल्लाह को खत्म करने और कब्जे को स्थायी बनाने की परियोजना विफल हो चुकी है, और इजरायल हमारी जमीन के अंतिम हिस्से तक से पीछे हटेंगे।'
कासिम ने स्पष्ट किया कि यदि संगठन पर हमला किया गया तो वह हथियारों के बल पर इजरायल का मुकाबला करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि मौत की धमकियाँ उनके सदस्यों को डराने में सफल नहीं होंगी।
कासिम ने यह भी आरोप लगाया कि लेबनान इस समय एक 'अमेरिकी-इजरायली अभियान' का सामना कर रहा है, जो देश के भविष्य और राजनीतिक सत्ता को निशाना बना रहा है। उनके अनुसार, इजरायल संघर्ष-प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण में भी बाधाएँ पैदा कर रहा है।
मानवीय क्षति का आँकड़ा
लेबनान के पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशंस सेंटर के आँकड़ों के अनुसार, 2 मार्च से अब तक इजरायली हमलों में कुल 3,980 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 12,001 लोग घायल हुए हैं। ये आँकड़े संघर्ष की गहराती मानवीय त्रासदी को रेखांकित करते हैं।
क्या होगा आगे
युद्धविराम के उल्लंघन के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव फिर से बढ़ने की आशंका है। हिज्बुल्लाह ने जवाबी कार्रवाई का अधिकार सुरक्षित रखने का संकेत दिया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस नाजुक युद्धविराम की स्थिरता पर टिकी हैं। समझौते की शर्तों के पालन को लेकर दोनों पक्षों के बीच विश्वास की कमी क्षेत्रीय शांति के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।