25 अक्टूबर 2026
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ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की माँग — अमेरिका-इजरायल हमलों का मुआवजा दिलाओ

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ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की माँग — अमेरिका-इजरायल हमलों का मुआवजा दिलाओ

सारांश

ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई ने न्यायपालिका को निर्देश दिया है कि अमेरिका-इजरायल के 28 फरवरी के हमलों से हुए नुकसान की भरपाई कानूनी रास्ते से सुनिश्चित की जाए। उधर ट्रंप ने एक और 'एपिक फ्यूरी' अभियान के संकेत दे दिए हैं — यह टकराव अब सैन्य के साथ-साथ कानूनी मोर्चे पर भी खिंच रहा है।

मुख्य बातें

ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने 25 अक्टूबर 2026 को न्यायपालिका प्रमुख गोलामहुसैन मोहसेनी-एजेई से बैठक में अमेरिका-इजरायल हमलों के नुकसान का मुआवजा दिलाने की माँग की।
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने तेहरान समेत ईरान के कई शहरों पर संयुक्त हमले किए थे; ईरान ने जवाबी मिसाइल-ड्रोन हमले किए और होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण मजबूत किया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा — 'हम ईरान का सारा तेल अपने नियंत्रण में ले सकते हैं, पूरे देश पर भी कब्जा कर सकते हैं।' ट्रंप ने फ्लोरिडा रैली में एक और 'एपिक फ्यूरी' अभियान चलाने के संकेत दिए।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका-इजरायल मिडटर्म चुनावों के बाद ईरान पर नए हमलों की योजना बना रहे हैं, हालाँकि ट्रंप की अंतिम मंजूरी अनिश्चित है।

ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने देश की न्यायपालिका से आग्रह किया है कि अमेरिका और इजरायल के हमलों से ईरान को हुए आर्थिक और गैर-आर्थिक नुकसान की भरपाई सुनिश्चित करने तथा ईरानी नागरिकों के अधिकारों की पुनर्स्थापना के लिए ठोस और गंभीर कदम उठाए जाएँ। 25 अक्टूबर 2026 को सर्वोच्च नेता की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी बयान के अनुसार, यह बात उन्होंने न्यायपालिका प्रमुख गोलामहुसैन मोहसेनी-एजेई के साथ हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में कही। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के विरुद्ध एक और सैन्य अभियान चलाने के संकेत दिए हैं।

बैठक में उठाए गए मुख्य मुद्दे

खामेनेई और न्यायपालिका प्रमुख मोहसेनी-एजेई के बीच हुई इस बैठक में न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ करने के कई पहलुओं पर चर्चा हुई। इनमें लोगों के अधिकारों की रक्षा, भ्रष्टाचार और उसके मूल कारणों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई, अदालतों में लंबित मामलों का त्वरित और सटीक निपटारा तथा न्यायिक फैसलों को समय पर और कड़ाई से लागू करना शामिल था।

बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि ईरान की न्याय व्यवस्था में ऐसे व्यापक बदलाव लाए जाएँ जो आम नागरिकों को व्यावहारिक रूप से महसूस हों। अपराधों पर सख्त रोक के लिए ठोस कार्यक्रम बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।

28 फरवरी का संयुक्त हमला: पृष्ठभूमि

रिपोर्टों के अनुसार, 28 फरवरी 2026 को इजरायल और अमेरिका ने तेहरान समेत ईरान के कई शहरों पर समन्वित सैन्य हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों व संपत्तियों को लक्ष्य बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमलों की कई लहरें चलाईं। साथ ही ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी सामरिक पकड़ और मजबूत कर ली — जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत संवेदनशील जलमार्ग है।

गौरतलब है कि यह टकराव अब केवल सैन्य स्तर पर नहीं, बल्कि कानूनी और राजनयिक मोर्चों पर भी लड़ा जाने लगा है। ईरान की न्यायपालिका को मुआवजे की माँग के लिए एक नए हथियार के रूप में उपयोग करने की यह रणनीति ध्यान खींचती है।

ट्रंप की चेतावनी और नए अभियान के संकेत

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार, 24 अक्टूबर 2026 को फ्लोरिडा में एक रैली के लिए रवाना होते समय पत्रकारों से कहा, 'फिलहाल ईरान ज्यादा कुछ नहीं कर सकता। अगर हम चाहें तो उसका सारा तेल अपने नियंत्रण में ले सकते हैं। हम पूरे देश पर भी कब्जा कर सकते हैं।'

जब उनसे संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वॉल्ट्ज की उस टिप्पणी के बारे में पूछा गया जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान के साथ संघर्ष एक वर्ष और चल सकता है, तो ट्रंप ने कहा, 'हम इसे बहुत जल्दी खत्म कर सकते हैं। सवाल यह है कि क्या हम इसे पूरी तरह खत्म करना चाहते हैं या फिर धीरे-धीरे कमजोर होने देना चाहते हैं।'

फ्लोरिडा की उसी रैली में ट्रंप ने एक और सैन्य अभियान की संभावना का संकेत देते हुए कहा, 'हो सकता है हम एक और छोटा 'एपिक फ्यूरी' अभियान चलाएँ।' यह उसी बड़े अभियान का संदर्भ था जो 28 फरवरी 2026 को इजरायल के समन्वित हमले के साथ शुरू किया गया था।

मिडटर्म चुनावों के बाद नए हमले की आशंका

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और इजरायल की सेनाएँ अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के बाद ईरान पर संभावित नए हमलों की योजनाएँ तैयार कर रही हैं। हालाँकि, अमेरिकी मीडिया के मुताबिक यह अभी स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप वास्तव में किसी नए सैन्य अभियान को मंजूरी देंगे या नहीं।

यह स्थिति ऐसे समय में और पेचीदा हो गई है जब ईरान की न्यायपालिका को अमेरिका-इजरायल के कथित 'अपराधों' के मुआवजे की कानूनी माँग का माध्यम बनाया जा रहा है — जो इस क्षेत्रीय संघर्ष में एक नया आयाम जोड़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ ईरान की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत दिखती है। दूसरी तरफ, ट्रंप की 'पूरे देश पर कब्जे' की भाषा घरेलू राजनीतिक रैली के लिए उपयुक्त हो सकती है, लेकिन यह अमेरिकी विदेश नीति में खतरनाक अनिश्चितता पैदा करती है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि दोनों पक्ष युद्धविराम की बजाय अगले सैन्य चरण की योजना बना रहे हैं — और होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की बढ़ी हुई पकड़ वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक अनदेखा जोखिम है जिस पर मुख्यधारा की कवरेज पर्याप्त ध्यान नहीं दे रही।
RashtraPress
25 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई ने मुआवजे की माँग क्यों उठाई?
खामेनेई ने न्यायपालिका प्रमुख से बैठक में माँग की कि 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों से ईरान को हुए आर्थिक और गैर-आर्थिक नुकसान की भरपाई कानूनी रास्ते से सुनिश्चित की जाए। यह ईरान की उस रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है जिसमें संघर्ष को सैन्य के साथ-साथ कानूनी मोर्चे पर भी लड़ा जाए।
28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर कैसा हमला किया था?
रिपोर्टों के अनुसार 28 फरवरी 2026 को इजरायल और अमेरिका ने तेहरान समेत ईरान के कई शहरों पर समन्वित सैन्य हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमलों की कई लहरें चलाईं और होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी सामरिक पकड़ मजबूत की।
ट्रंप ने 'एपिक फ्यूरी' अभियान के बारे में क्या कहा?
फ्लोरिडा में एक रैली के दौरान ट्रंप ने संकेत दिया कि एक और 'एपिक फ्यूरी' अभियान चलाया जा सकता है — यह उसी बड़े अमेरिकी सैन्य अभियान का संदर्भ था जो 28 फरवरी 2026 को शुरू किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका चाहे तो ईरान के सभी तेल संसाधनों पर नियंत्रण कर सकता है।
क्या अमेरिका मिडटर्म चुनावों के बाद ईरान पर नए हमले की योजना बना रहा है?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका और इजरायल की सेनाएँ मिडटर्म चुनावों के बाद ईरान पर संभावित नए हमलों की योजनाएँ तैयार कर रही हैं। हालाँकि, अमेरिकी मीडिया के मुताबिक अभी यह स्पष्ट नहीं है कि राष्ट्रपति ट्रंप वास्तव में इसे मंजूरी देंगे या नहीं।
ईरान-अमेरिका संघर्ष का होर्मुज स्ट्रेट पर क्या असर पड़ा है?
ईरान ने अमेरिका-इजरायल के हमलों के जवाब में होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी सामरिक पकड़ मजबूत कर ली है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत संवेदनशील है, और इस पर ईरान का बढ़ा हुआ नियंत्रण अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा बाजार के लिए एक बड़ा जोखिम माना जा रहा है।
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