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क्या 1971 के मुक्ति संग्राम के बिना बांग्लादेश की कल्पना की जा सकती है: तारिक रहमान?

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क्या 1971 के मुक्ति संग्राम के बिना बांग्लादेश की कल्पना की जा सकती है: तारिक रहमान?

सारांश

बांग्लादेश के नेशनलिस्ट पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान ने 1971 के मुक्ति संग्राम को बांग्लादेश के अस्तित्व की नींव बताते हुए कहा कि इस संघर्ष के बिना देश की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने राजनीतिक एकता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने पर जोर दिया।

मुख्य बातें

1971 का मुक्ति संग्राम बांग्लादेश की नींव है।
तारिक रहमान की वापसी से बांग्लादेश की राजनीति में नई संभावनाएँ उभर सकती हैं।
लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता है।
सरकार और विपक्ष को मिलकर कार्य करना चाहिए।
जनमत संग्रह 12 फरवरी को होगा।

ढाका, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान ने कहा है कि पाकिस्तान के खिलाफ 1971 का मुक्ति संग्राम ही बांग्लादेश के अस्तित्व की नींव है। स्थानीय मीडिया ने इस बात की जानकारी दी।

बीएनपी अध्यक्ष कार्यालय, ढाका में वामपंथी दलों के संगठित डेमोक्रेटिक यूनाइटेड फ्रंट (डीयूएफ) के नेताओं के साथ बैठक के दौरान, तारिक रहमान ने कहा, “मुक्ति संग्राम बांग्लादेश और उसकी राजनीति का आधार है। 1971 के बिना देश के अस्तित्व की कल्पना नहीं की जा सकती।” सरकारी समाचार एजेंसी बीएसएस ने उनके हवाले से यह जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि हाल की जनउभार के बाद देश में जो नई राजनीतिक वास्तविकताएं और संभावनाएं उभरी हैं, उनका सही उपयोग होना चाहिए। उन्होंने कहा, “देश को प्रगति की ओर ले जाने के लिए सरकार और विपक्ष को मिलकर कार्य करना होगा।”

राष्ट्रीय एकता पर जोर देते हुए, तारिक ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक अवसर का उपयोग लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए किया जाना चाहिए।

बैठक के दौरान डीयूएफ नेताओं ने 30 दिसंबर को बीएनपी अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के निधन पर शोक व्यक्त किया।

रिपोर्टों के अनुसार, बैठक में देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर भी चर्चा की गई। वामपंथी दलों के नेताओं के अनुसार, बीएनपी नेता ने देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जताई।

इस बीच, तारिक रहमान ने निष्पक्ष, स्वतंत्र और विश्वसनीय राष्ट्रीय चुनाव के महत्व पर जोर देते हुए सभी से एकजुट रहने का आह्वान किया।

बैठक के बाद बांग्लादेश समाजतांत्रिक दल (बीएसडी) के महासचिव बाजलुर राशिद फिरोज ने कहा, “उन्होंने (तारिक) हमें बताया कि 25 दिसंबर को देश लौटने के बाद उन्होंने अपने भाषणों में स्पष्ट किया कि मुक्ति संग्राम हमारी नींव है। मुक्ति संग्राम के बिना बांग्लादेश का अस्तित्व नहीं होता।”

17 वर्षों के स्व-निर्वासन के बाद, तारिक रहमान 25 दिसंबर को बांग्लादेश लौटे। वह अपनी पत्नी जुबैदा रहमान और बेटी जैमा रहमान के साथ बिमान बांग्लादेश एयरलाइंस की उड़ान से ढाका के हजरत शाहजलाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचे।

उनकी वापसी ऐसे समय हुई है जब बांग्लादेश चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि देश का 13वां राष्ट्रीय संसदीय चुनाव और जुलाई चार्टर पर जनमत संग्रह अगले वर्ष 12 फरवरी को आयोजित किया जाएगा।

विश्लेषकों का मानना है कि फरवरी 2026 के चुनावों में तारिक रहमान की वापसी और भागीदारी, मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के तहत चल रहे राजनीतिक उथल-पुथल के बीच स्थिति की परीक्षा होगी, जहां सरकार पर निष्पक्ष, स्वतंत्र और विश्वसनीय चुनाव कराने का दबाव बढ़ता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि तारिक रहमान का बयान केवल ऐतिहासिक संदर्भ नहीं है, बल्कि आज की राजनीतिक चुनौतियों को भी उजागर करता है। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बांग्लादेश में लोकतंत्र मजबूत हो और सभी पक्ष मिलकर देश के विकास में योगदान दें।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तारिक रहमान ने 1971 के मुक्ति संग्राम के बारे में क्या कहा?
तारिक रहमान ने कहा कि 1971 का मुक्ति संग्राम बांग्लादेश के अस्तित्व की नींव है और इसके बिना देश की कल्पना नहीं की जा सकती।
तारिक रहमान कब बांग्लादेश लौटे?
तारिक रहमान 25 दिसंबर को 17 वर्षों के स्व-निर्वासन के बाद बांग्लादेश लौटे।
डेमोक्रेटिक यूनाइटेड फ्रंट (डीयूएफ) क्या है?
डेमोक्रेटिक यूनाइटेड फ्रंट (डीयूएफ) बांग्लादेश में वामपंथी दलों का एक गठबंधन है।
बांग्लादेश का 13वां राष्ट्रीय संसदीय चुनाव कब होने वाला है?
बांग्लादेश का 13वां राष्ट्रीय संसदीय चुनाव 12 फरवरी को आयोजित किया जाएगा।
क्या तारिक रहमान के लौटने से बांग्लादेश की राजनीति में कोई बदलाव आएगा?
विश्लेषकों का मानना है कि उनकी वापसी बांग्लादेश की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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