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क्या बांग्लादेश में अवामी लीग पर बैन से मानवाधिकार संगठन चिंतित हैं?

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क्या बांग्लादेश में अवामी लीग पर बैन से मानवाधिकार संगठन चिंतित हैं?

सारांश

बांग्लादेश में अवामी लीग पर बैन के बाद मानवाधिकार संगठन की चिंताओं का बढ़ता सिलसिला, क्या यूएन इस मामले में हस्तक्षेप करेगा? पढ़ें इस महत्वपूर्ण खबर के पीछे की सच्चाई।

मुख्य बातें

अवामी लीग पर बैन का कारण आतंकवाद विरोधी अधिनियम है।
मानवाधिकार संगठन यूएन से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।
बांग्लादेश में आम चुनाव की तैयारी जारी है।
अवामी लीग के सदस्यों पर चल रही कार्रवाई का असर लोकतंत्र पर पड़ सकता है।
संगठन ने शांतिपूर्ण राजनीतिक गतिविधियों की अनुमति की अपील की है।

पेरिस, 8 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। बांग्लादेश में आम चुनाव की तैयारी अब शुरू हो चुकी है। इस सप्ताह किसी भी दिन बांग्लादेश के चुनावों का शेड्यूल जारी किया जा सकता है। इस बीच, अवामी लीग पर चुनावी बैन लगाने को लेकर एक प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने अपनी चिंता व्यक्त की है।

जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश इन फ्रांस (जेएमबीएफ) ने संयुक्त राष्ट्र संघ के विशेष प्रतिवेदक को पत्र लिखकर अवामी लीग पार्टी पर बैन लगाने और चुनाव आयोग द्वारा उसके रजिस्ट्रेशन को सस्पेंड करने पर चिंता जताई है।

इस संगठन ने बांग्लादेश में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को फिर से स्थापित करने के लिए तत्काल अंतर्राष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग की है।

मानवाधिकार संगठन ने कहा कि 12 मई को मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने देश के आतंकवाद विरोधी अधिनियम के तहत अवामी लीग पर बैन लगाया और उसके बाद पार्टी का रजिस्ट्रेशन सस्पेंड कर दिया। इसके परिणामस्वरूप अवामी लीग की सभी राजनीतिक गतिविधियों पर प्रभाव पड़ा है और सभी गतिविधियां रुक गई हैं।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि अवामी लीग के सदन, विरोध मार्च, प्रकाशन और सोशल मीडिया की गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है। इस कारण से पार्टी को बांग्लादेश में फरवरी 2026 के चुनावों में हिस्सा लेने से भी रोक दिया गया है।

अवामी लीग के नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर बड़े पैमाने पर हो रही कार्रवाई को लेकर जेएमबीएफ ने चेतावनी दी है कि पार्टी और उसके समर्थकों पर चल रहा दबाव नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर एक गंभीर हमला है।

स्वतंत्र पर्यवेक्षक रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा गया है कि पार्टी से जुड़े 3.5 लाख से अधिक लोगों पर राजनीतिक कारणों से मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा, बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग सरकार के तख्तापलट के बाद से कम से कम 1.3 लाख लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

जेएमबीएफ ने कहा कि डेविल हंट जैसे ऑपरेशन और देशभर में पुलिस की कार्रवाई ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों, अचानक रैलियों और पार्टी मीटिंग्स को निशाना बनाया है। इसके परिणामस्वरूप डर और दबाव का माहौल बना है। अंतरिम सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय अपराध (ट्रिब्युनल) एक्ट के तहत चल रहे ट्रायल का हवाला देकर अपने कार्यों का बचाव किया है।

संस्था ने इस बात पर जोर दिया कि “राजनीतिक विरोध को दबाने के लिए आतंकवाद विरोधी कानून का इस्तेमाल अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का उल्लंघन करता है, राजनीतिक बहुलवाद को कमजोर करता है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए खतरा है।”

जेएमबीएफ ने बांग्लादेशी अधिकारियों से अवामी लीग और उससे जुड़ी विंग्स पर लगे बैन को हटाने या कम से कम इसमें बदलाव करने की अपील की है ताकि पार्टी के सदस्यों या समर्थकों को शांतिपूर्ण राजनीतिक गतिविधि, इकट्ठा होने और अपनी बात कहने की अनुमति मिल सके।

इसके अलावा, संगठन ने अवामी लीग के सदस्यों और उससे जुड़ी विंग्स के खिलाफ सभी राजनीति से प्रेरित या मनमाने आरोपों और हिरासतों को खारिज करने या इसकी समीक्षा करने की अपील की है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह महत्वपूर्ण है कि हम इस मुद्दे पर ध्यान दें। बांग्लादेश में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का संरक्षण आवश्यक है। मानवाधिकार संगठनों की चिंताओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अवामी लीग पर बैन क्यों लगाया गया?
अवामी लीग पर बैन देश के आतंकवाद विरोधी अधिनियम के तहत लगाया गया है।
मानवाधिकार संगठन क्या मांग कर रहे हैं?
मानवाधिकार संगठन बांग्लादेश में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को बहाल करने के लिए तत्काल अंतर्राष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।
क्या बांग्लादेश में चुनाव होने वाले हैं?
हाँ, बांग्लादेश में आम चुनाव की तैयारी शुरू हो चुकी है और इस सप्ताह चुनाव शेड्यूल जारी होने की उम्मीद है।
अवामी लीग के सदस्यों पर क्या कार्रवाई की गई है?
अवामी लीग के सदस्यों पर बड़े पैमाने पर गिरफ्तारी और राजनीतिक कारणों से मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
क्या अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इस मामले में हस्तक्षेप करेगा?
मानवाधिकार संगठन ने यूएन से हस्तक्षेप करने की अपील की है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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