थाईलैंड में मजदूर दिवस पर कामकाजी ढांचे में बड़ा बदलाव, 'गुड जॉब इकोनॉमी' पर सरकार का जोर
सारांश
Key Takeaways
थाईलैंड सरकार ने 1 मई 2026 को राष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर देश के कामकाजी ढांचे में व्यापक बदलाव की घोषणा की। तेज़ी से बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों और तकनीकी क्रांति के बीच थाई सरकार ने श्रम नीति की दिशा बदलने का संकल्प लिया है, जिसमें आर्थिक विकास के साथ-साथ कामगारों की गरिमा और सुरक्षित आमदनी को प्राथमिकता दी जाएगी।
मुख्य घोषणाएँ और नीतिगत बदलाव
थाईलैंड के उप प्रधानमंत्री योडचानन वोंगसावत ने कहा कि देश के कामगारों के सामने दो स्तरों पर चुनौतियाँ हैं। बाहरी मोर्चे पर मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और वैश्विक सप्लाई चेन में अस्थिरता है, जबकि आंतरिक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), बढ़ती उम्र की आबादी और हरित ऊर्जा से जुड़ी ज़रूरतें प्रमुख चिंताएँ हैं। सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, इन चुनौतियों के मद्देनज़र सरकार अब अपनी नीतिगत प्राथमिकताएँ पुनर्निर्धारित कर रही है।
'गुड जॉब इकोनॉमी' की अवधारणा
योडचानन ने स्पष्ट किया कि अब थाईलैंड की सफलता केवल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि से नहीं मापी जाएगी। इसके बजाय सरकार 'गुड जॉब इकोनॉमी' के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करेगी, जिसका अर्थ है — बेहतर गुणवत्ता की नौकरियाँ, सुरक्षित और स्थिर आमदनी, तथा कामगारों की सामाजिक गरिमा में वृद्धि। यह अवधारणा परंपरागत विकास मॉडल से एक महत्त्वपूर्ण नीतिगत विचलन है।
राष्ट्रीय स्किल्स डेटाबेस और अंतरराष्ट्रीय प्रमाणपत्र
सरकार एक राष्ट्रीय स्किल्स डेटाबेस तैयार कर रही है, जिसमें विभिन्न मंत्रालय मिलकर काम करेंगे। इस प्रणाली के ज़रिए नियोक्ताओं की माँग और कामगारों की दक्षता को सीधे जोड़ा जाएगा। साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर के सर्टिफिकेट प्रदान किए जाएंगे, ताकि कामगारों को उनकी योग्यता के अनुरूप उचित वेतन मिल सके। योडचानन, जो उच्च शिक्षा, विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार मंत्री भी हैं, ने एक नई फंडिंग पहल —