मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव पर ट्रंप की धमकियों पर क्रेमलिन का कड़ा जवाब
सारांश
Key Takeaways
- क्रेमलिन ने ट्रंप की धमकियों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
- मध्य पूर्व की स्थिति गंभीर है और आग की लपटों में है।
- यदि तनाव बढ़ता है, तो इसका प्रभाव एशिया और यूरोप तक जाएगा।
- रूस ने संयम बरतने की अपील की है।
- यह संघर्ष क्षेत्रीय युद्ध का कारण बन सकता है।
नई दिल्ली, 6 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। क्रेमलिन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उन धमकियों पर सख्त प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने ईरान को तबाह करने का अल्टीमेटम दिया था। रूस ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि वर्तमान में पूरा मध्य पूर्व "आग की लपटों में घिरा है" और इस क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने मास्को में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि हालिया घटनाएं संकेत देती हैं कि स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी है और यह केवल एक देश तक सीमित नहीं रह गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हालात पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो यह संघर्ष एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईस्टर रविवार को सोशल मीडिया पर एक विवादास्पद पोस्ट में धमकी दी कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से नहीं खोला गया, तो यूएस सेना मंगलवार को ईरान के पावर प्लांट और पुलों को निशाना बनाएगी।
जब ट्रंप की टिप्पणियों के बारे में पूछा गया, तो पेसकोव ने कहा कि रूस ने उनकी टिप्पणियों का अवलोकन किया है, लेकिन क्रेमलिन इस पर सीधे तौर पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता।
कई देशों का कहना है कि यदि होर्मुज में कोई रुकावट आती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ेगा। पहले से ही तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, जिससे आयात पर निर्भर देशों की चिंता बढ़ गई है।
रूस ने इस घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त की है और कहा है कि मौजूदा हालात न केवल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा हैं, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भी पड़ सकता है। मास्को ने सभी पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक उपायों को अपनाने की अपील की है।
पेसकोव ने कहा, "इस संघर्ष का दायरा बढ़ गया है, और अब हम सभी इसके परिणामों से अवगत हैं, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।"
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच, कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए सुरक्षा सलाह जारी की है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर एशिया और यूरोप तक महसूस किया जा सकता है।