एयू की चेतावनी: मध्य-पूर्व का संघर्ष अफ्रीकी अर्थव्यवस्थाओं के लिए गंभीर चुनौती
सारांश
Key Takeaways
- मध्य पूर्व का संघर्ष अफ्रीकी अर्थव्यवस्थाओं के लिए बड़ा खतरा है।
- यदि संघर्ष लंबा चलता है, तो जीडीपी में कमी हो सकती है।
- महंगाई और खाद्य सुरक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
- गरीब परिवारों को सबसे अधिक प्रभावित किया जाएगा।
- ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना आवश्यक है।
नई दिल्ली, 6 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अफ्रीकी संघ (एयू) और उसके सहयोगियों ने चेतावनी दी है कि मध्य पूर्व में चल रहा संघर्ष अफ्रीकी अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक गंभीर खतरा बन सकता है।
सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, एक संयुक्त रिपोर्ट में एयू, संयुक्त राष्ट्र के अफ्रीका आर्थिक आयोग, अफ्रीकी विकास बैंक और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम ने यह बताया कि यदि यह संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है और जहाजों के मार्गों, ऊर्जा और खाद (फर्टिलाइजर) की आपूर्ति में रुकावट आती है, तो अफ्रीका की आर्थिक वृद्धि पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
रिपोर्ट के अनुसार, कई अफ्रीकी देश अभी भी कोविड-19 से पहले की विकास दर तक नहीं पहुँच पाए हैं। यदि यह संघर्ष छह महीने से अधिक समय तक चलता है, तो वर्ष 2026 में अफ्रीका की जीडीपी वृद्धि दर में 0.2 प्रतिशत की कमी आ सकती है।
संस्थाओं ने कहा कि यह संघर्ष पहले से ही व्यापार पर प्रभाव डाल चुका है और यह महंगाई का संकट भी उत्पन्न कर सकता है, क्योंकि ईंधन और खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसके अलावा, जहाजों का किराया, बीमा खर्च, मुद्रा पर दबाव और सख्त राजकोषीय स्थितियां स्थिति को और भी खराब कर सकती हैं। इसका सबसे अधिक असर गरीब और कमजोर परिवारों पर पड़ेगा।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि अफ्रीका के कुल आयात का 15.8 प्रतिशत और निर्यात का 10.9 प्रतिशत हिस्सा मध्य पूर्व से संबंधित है। इससे यह स्पष्ट है कि वहाँ की स्थिति का अफ्रीका पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
इसमें यह भी कहा गया है कि कुछ देशों के लिए तेल की तुलना में खाद की कमी का प्रभाव और भी बड़ा हो सकता है। यदि खाड़ी देशों से प्राकृतिक गैस की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो अमोनिया और यूरिया का उत्पादन घटेगा, जिससे खेती के महत्वपूर्ण मौसम (मार्च से मई) में खाद महंगी हो जाएगी।
इसका सीधा असर खाद्य कीमतों पर पड़ेगा और गरीब परिवारों के लिए भोजन प्राप्त करना और कठिन हो जाएगा। इससे अफ्रीका में खाद्य सुरक्षा पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
रिपोर्ट में यह चिंता भी व्यक्त की गई है कि इस संघर्ष का असर राजनीति और सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। यदि यह संघर्ष बढ़ता है, तो अफ्रीका में बाहरी देशों के प्रभाव की प्रतिस्पर्धा तेज हो सकती है। सूडान, सोमालिया और लीबिया जैसे देशों में पहले से ही ऐसे संकेत दिखाई दे रहे हैं।
अंत में रिपोर्ट में कहा गया है कि इस स्थिति से निपटने के लिए अफ्रीका को अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना होगा, सरकारी खर्च की स्थिति को संभालना होगा, 'अफ्रीकी महाद्वीपीय मुक्त व्यापार क्षेत्र' को तेजी से लागू करना होगा और आर्थिक सुरक्षा के उपाय तैयार करने होंगे, ताकि भविष्य में ऐसे झटकों का सामना बेहतर तरीके से किया जा सके।