पाकिस्तान: पोलियो अभियान में <b>भरोसे की कमी</b> और <b>हमलों</b> का सामना
सारांश
मुख्य बातें
इस्लामाबाद, 18 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान पोलियो के खिलाफ चल रही जंग में लगातार पिछड़ता जा रहा है। एक मीडिया रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि इसके पीछे भरोसे की कमी मुख्य कारण है। आम जनता को एंटी-पोलियो अभियान पर विश्वास नहीं है। इतना ही नहीं, जो कर्मी इस अभियान में सक्रिय होते हैं, उनकी सुरक्षा भी संदिग्ध रहती है। कई कर्मियों ने तो इस दौरान अपनी जान भी गंवा दी है।
रिपोर्ट में सरकारी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि अभियान में शामिल लोग अक्सर उग्रवादियों के निशाने पर रहते हैं। हमलों के बाद इसे इंटेलिजेंस फ्रंट या विदेशी साजिश के रूप में पेश किया जाता है। गरीब और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग के लोग टीके पर भरोसा नहीं करते। अभिभावक अपने बच्चों के टीकाकरण में रुकावट डालते हैं, जिससे अभियान अपने लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर पा रहा है।
हर हमले के बाद चुनौती और बढ़ जाती है, और वैक्सीन लगाने वालों के पीछे हटने से पूरे क्षेत्र की सुरक्षा पर खतरा
ये समस्याएँ आंकड़ों में भी स्पष्ट हैं, क्योंकि पाकिस्तान उन दो देशों में से एक है जहाँ पोलियो पर काबू नहीं पाया जा सका है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल के वर्षों में मामलों में गिरावट आई है, लेकिन यह अपर्याप्त है। समय-समय पर छूटे हुए बच्चों की वजह से बढ़ोतरी होती है, और यही छोटे गैप वायरस को फिर से उभरने का मौका देते हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फ्रंट-लाइन वर्कर्स की सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता, लेकिन सरकार को केवल उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कराने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। भरोसेसंपर्क बढ़ाना आवश्यक है। इसमें धर्म गुरु, मस्जिद के कर्ता-धर्ता और मौलवी भी शामिल हैं, क्योंकि ये लोग एक खास तबके पर गहरा असर डालते हैं।
पिछले एक साल में कई घटनाएँ हुई हैं जो पोलियो टीमों पर हमलों को दर्शाती हैं। 13 अप्रैल को, खैबर पख्तूनख्वा के हंगू जिले में पोलियो टीमों की सुरक्षा में लगी एक पुलिस टीम को निशाना बनाया गया। इस हमले में एक पुलिस कांस्टेबल की मौत हो गई और चार अन्य कर्मी घायल हो गए।
यह घटना 13-19 अप्रैल को होने वाले वैक्सीनेशन कैंपेन के पहले दिन हंगू की थल तहसील में हुई। पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डॉन ने पुलिस के हवाले से बताया कि अज्ञात हमलावरों ने पुलिस पार्टी पर गोलियाँ चलाईं, जिसमें एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई और चार अन्य घायल हो गए।
फरवरी में, पाकिस्तान के बलूचिस्तान के चमन जिले में पुलिस वैक्सीनेशन टीम पर अज्ञात हमलावरों ने गोलियाँ चलाईं, जिसमें एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई थी।
फरवरी में कई और वारदातें हुईं। पाकिस्तान के लाहौर के विभिन्न इलाकों में पोलियो टीमों पर हमला किया गया था। ये उन अभिभावकों द्वारा किया गया जो अपने बच्चों को पोलियो ड्रॉप्स नहीं पिलाने देना चाहते थे।