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बलूचिस्तान के चमन में पोलियो टीम पर हमला, सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल

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बलूचिस्तान के चमन में पोलियो टीम पर हमला, सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल

सारांश

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में पोलियो टीम पर एक और हमला — चमन के इशाकजई किला इलाके में सुरक्षाकर्मी गंभीर रूप से घायल। फरवरी से अब तक इसी तरह के कई हमलों में पुलिसकर्मियों की जान जा चुकी है, जो दुनिया के आखिरी पोलियो-प्रभावित देशों में से एक में टीकाकरण अभियान के लिए गहरे खतरे की ओर इशारा करता है।

मुख्य बातें

25 मई को बलूचिस्तान के चमन जिले के इशाकजई किला इलाके में पोलियो टीम की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी पर अज्ञात हमलावरों ने गोलीबारी की।
घायल पुलिसकर्मी को अस्पताल में भर्ती कराया गया; पोलियो टीम के अन्य सदस्य सुरक्षित रहे।
18 मई को बाजौर जिले में इसी तरह के हमलों में दो पुलिसकर्मियों की मौत हो चुकी है।
13 अप्रैल को हंगू जिले में हमले में एक पुलिसकर्मी की मौत और चार घायल हुए थे।
फरवरी में चमन में ही पोलियो टीम की सुरक्षा में तैनात एक पुलिस अधिकारी की मौत हो गई थी।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान दुनिया के एकमात्र दो देश हैं जहाँ वाइल्ड पोलियो वायरस अभी भी सक्रिय है।

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के चमन जिले के इशाकजई किला इलाके में 25 मई को अज्ञात हमलावरों ने पोलियो वैक्सीनेशन टीम की सुरक्षा में तैनात एक पुलिसकर्मी पर गोलीबारी की, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस के अनुसार, हमले के दौरान पोलियो टीम के अन्य सदस्य सुरक्षित रहे।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि रविवार को अज्ञात हमलावरों ने इशाकजई किला क्षेत्र में पोलियो टीम के साथ तैनात पुलिसकर्मी को निशाना बनाया। घायल पुलिसकर्मी को तत्काल नज़दीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। हमले के बाद पोलियो टीम को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया गया और इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया। हमलावरों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया है।

हमलों का बढ़ता सिलसिला

यह घटना अकेली नहीं है — पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तान में पोलियो कर्मियों और उनकी सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों पर हमलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। 18 मई को खैबर पख्तूनख्वा के बाजौर जिले में अलग-अलग घटनाओं में पोलियो टीमों की सुरक्षा कर रहे कम से कम दो पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी। उस हमले में अज्ञात बंदूकधारियों ने सलारजई के तब्बाई और दाग किला इलाकों में पोलियो दलों को निशाना बनाया था।

इससे पहले 13 अप्रैल को खैबर पख्तूनख्वा के हंगू जिले की थल तहसील में चल रहे पोलियो टीकाकरण अभियान के दौरान पुलिस पार्टी पर हमला हुआ था। हंगू जिला पुलिस के बयान के अनुसार, इस हमले में एक पुलिस अधिकारी की मौत हो गई और चार अन्य घायल हो गए। फरवरी में भी बलूचिस्तान के चमन जिले में ही पोलियो टीम की सुरक्षा में तैनात एक पुलिस अधिकारी की अज्ञात हमलावरों की गोलीबारी में मौत हो गई थी।

पाकिस्तान में पोलियो उन्मूलन की चुनौती

गौरतलब है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान दुनिया के एकमात्र दो देश हैं जहाँ अभी भी वाइल्ड पोलियो वायरस सक्रिय है। पाकिस्तान में विशेष रूप से खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान के आदिवासी और सीमावर्ती इलाकों में पोलियो कर्मचारियों पर हमले एक गंभीर और पुरानी समस्या बन चुके हैं। इन इलाकों में सक्रिय चरमपंथी समूह पोलियो टीकाकरण अभियानों को निशाना बनाते रहे हैं, जिससे वैश्विक पोलियो उन्मूलन प्रयासों को बड़ा झटका लगता है।

सरकार और सुरक्षा की प्रतिक्रिया

पाकिस्तानी अधिकारियों ने हर हमले के बाद सर्च ऑपरेशन और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करने की बात कही है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि ये उपाय दीर्घकालिक समाधान नहीं हैं। पोलियो कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना टीकाकरण अभियान की सफलता संदिग्ध बनी रहती है।

आगे क्या

चमन जिले में सर्च ऑपरेशन जारी है और अधिकारियों ने हमलावरों की जल्द गिरफ्तारी का भरोसा दिलाया है। पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम के तहत आगामी टीकाकरण दौर में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी किए जाने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक खतरनाक पैटर्न की अगली कड़ी है — फरवरी से मई के बीच तीन महीनों में बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में पोलियो टीमों पर कम से कम चार बड़े हमले हो चुके हैं। हर बार सर्च ऑपरेशन और अतिरिक्त बल तैनाती की घोषणा होती है, लेकिन हमले नहीं रुकते। असली सवाल यह है कि जब तक पाकिस्तान इन इलाकों में चरमपंथी नेटवर्क को निष्प्रभावी नहीं करता, पोलियो उन्मूलन का लक्ष्य महज कागज़ी वादा बना रहेगा — और दुनिया के आखिरी पोलियो-मुक्त न हो पाए देशों में से एक का दर्जा पाकिस्तान के साथ चिपका रहेगा।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बलूचिस्तान के चमन में पोलियो टीम पर हमला कब और कहाँ हुआ?
यह हमला 25 मई को बलूचिस्तान प्रांत के चमन जिले के इशाकजई किला इलाके में हुआ। अज्ञात हमलावरों ने पोलियो वैक्सीनेशन टीम की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी पर गोलीबारी की, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
पाकिस्तान में पोलियो टीमों पर हमले क्यों होते हैं?
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय चरमपंथी समूह पोलियो टीकाकरण अभियानों को निशाना बनाते रहे हैं। ये समूह कथित तौर पर पोलियो वैक्सीनेशन का विरोध करते हैं, जिससे इन क्षेत्रों में टीकाकरण कर्मियों और उनकी सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों के लिए गंभीर खतरा बना रहता है।
2025 में पाकिस्तान में पोलियो टीमों पर कितने हमले हो चुके हैं?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, फरवरी से मई 2025 के बीच कम से कम चार बड़े हमले हुए हैं — फरवरी में चमन में एक पुलिसकर्मी की मौत, अप्रैल में हंगू में एक की मौत और चार घायल, 18 मई को बाजौर में दो पुलिसकर्मियों की मौत, और 25 मई को चमन में एक पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल।
क्या पाकिस्तान में अभी भी पोलियो वायरस मौजूद है?
हाँ, पाकिस्तान और अफगानिस्तान दुनिया के एकमात्र दो देश हैं जहाँ वाइल्ड पोलियो वायरस अभी भी सक्रिय है। पाकिस्तान में विशेष रूप से खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान के इलाकों में टीकाकरण अभियानों को बाधित करने की कोशिशें पोलियो उन्मूलन के वैश्विक प्रयासों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
हमले के बाद पाकिस्तानी अधिकारियों ने क्या कदम उठाए?
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हमले के तुरंत बाद पोलियो टीम को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया गया, इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और हमलावरों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। घायल पुलिसकर्मी को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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