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म्यांमार की इनसेइन जेल में 97 दिन बाद रिहा हुए पूर्व अमेरिकी मरीन एडम कैस्टिलो, ट्रंप को बताया 'जीवनदाता'

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म्यांमार की इनसेइन जेल में 97 दिन बाद रिहा हुए पूर्व अमेरिकी मरीन एडम कैस्टिलो, ट्रंप को बताया 'जीवनदाता'

सारांश

97 दिन म्यांमार की कुख्यात इनसेइन जेल में बिताने के बाद पूर्व अमेरिकी मरीन एडम कैस्टिलो आज़ाद हुए — और उन्होंने अपनी जान बचाने का श्रेय सीधे राष्ट्रपति ट्रंप को दिया। साथ ही अमेरिकी विदेश मंत्रालय पर बाधा डालने का गंभीर आरोप लगाकर कैस्टिलो ने एक बड़ा राजनयिक सवाल खड़ा कर दिया है।

मुख्य बातें

पूर्व अमेरिकी मरीन एडम कैस्टिलो को म्यांमार की इनसेइन जेल में 97 दिन की हिरासत के बाद रिहा किया गया।
कैस्टिलो ने रिहाई का श्रेय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को दिया, कहा — 'अंतिम आदेश ट्रंप ने दिया।' गिरफ्तारी की वजह अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स, म्यांमार का आंतरिक विवाद बताया गया।
कैस्टिलो ने अमेरिकी विदेश मंत्रालय और दूतावास पर रिहाई की कोशिशों में बाधा डालने का आरोप लगाया।
कैस्टिलो करीब 13 साल तक म्यांमार में रहे; उन्होंने वहाँ के लोकतंत्र समर्थक प्रतिरोध को बिखरा हुआ और नेतृत्वहीन बताया।
ICRC और जेल प्रशासन के सुधार प्रयासों की सराहना की, लेकिन कहा कि यह उनका निजी अनुभव है।

पूर्व अमेरिकी मरीन एडम कैस्टिलो को म्यांमार की कुख्यात इनसेइन जेल में 97 दिन की हिरासत के बाद रिहा किया गया है। कैस्टिलो ने अपनी रिहाई का पूरा श्रेय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को देते हुए कहा कि यदि ट्रंप ने व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप न किया होता तो वे आज जीवित नहीं होते। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्रालय पर उनकी रिहाई की कोशिशों में बाधा डालने का गंभीर आरोप भी लगाया।

हिरासत का क्रम और जेल का अनुभव

कैस्टिलो के अनुसार, उन्हें म्यांमार में गिरफ्तार किए जाने के बाद शुरुआती 14 दिन सामान्य हिरासत में रखा गया, जिसके बाद उन्हें देश की सबसे कुख्यात जेलों में शुमार इनसेइन जेल भेज दिया गया। वहाँ उन्होंने अगले 83 दिन बिताए, जिससे कुल हिरासत की अवधि 97 दिन रही। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें किसी अपराध में दोषी नहीं ठहराया गया था, बल्कि हिरासत में रखा गया था।

जेल के अनुभव के बारे में कैस्टिलो ने बताया कि वहाँ की वास्तविक परिस्थितियाँ लोगों की पारंपरिक धारणा से भिन्न हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति (ICRC) और जेल प्रशासन ने वर्षों से वहाँ की परिस्थितियों को बेहतर बनाने के लिए काम किया है, जिसे पर्याप्त श्रेय नहीं दिया जाता। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से अपने आसपास किसी मारपीट, दुर्व्यवहार या यातना की घटना नहीं देखी, हालाँकि उन्होंने यह जोड़ा कि यह उनका निजी अनुभव है और इससे अन्य कैदियों की परिस्थितियों पर कोई व्यापक निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए।

गिरफ्तारी की वजह

कैस्टिलो के मुताबिक, उनकी गिरफ्तारी का कारण उनके पूर्व संगठन अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स, म्यांमार के भीतर चल रहा एक आंतरिक विवाद था। यह विवाद धीरे-धीरे पुलिस तक पहुँचा और बाद में एक अंतरराष्ट्रीय मामले का रूप ले गया, जिसके बाद व्हाइट हाउस और राष्ट्रपति ट्रंप को सीधे हस्तक्षेप करना पड़ा।

ट्रंप को दिया 'जीवनदाता' का दर्जा

अपनी रिहाई में राष्ट्रपति ट्रंप की भूमिका को निर्णायक बताते हुए कैस्टिलो ने कहा, 'मैं अपनी जिंदगी के लिए राष्ट्रपति का ऋणी हूँ। अंतिम आदेश राष्ट्रपति ट्रंप ने दिया।' उन्होंने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और उनके कार्यालय, फेथ काउंसिल, पॉला व्हाइट, कार्डिनल डोलन तथा ग्लोबल रीच से जुड़े मिकी और कैरेन सहित कई लोगों का भी आभार व्यक्त किया।

विदेश मंत्रालय पर गंभीर आरोप

कैस्टिलो ने अमेरिकी विदेश मंत्रालय पर बेहद कड़े शब्दों में निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'विदेश मंत्रालय ने मेरी मदद के लिए कुछ नहीं किया। मदद करने में असफल रहने और मदद करने की इच्छा ही न रखने के बीच अंतर है।' उनके अनुसार, रिहाई के लिए प्रयास कर रहे कई लोगों ने विभाग के साथ मिलकर काम करने की कोशिश की, लेकिन विदेश मंत्रालय ने उन कोशिशों में बाधा डाली। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी दूतावास और वहाँ के मिशन प्रमुख ने भी कोई सहायता नहीं की।

म्यांमार की स्थिति पर कैस्टिलो का नजरिया

करीब 13 साल तक म्यांमार में रहे कैस्टिलो ने वहाँ की राजनीतिक स्थिति पर भी बात की। उन्होंने कहा कि यांगून जैसे बड़े शहरों में आम लोग अब युद्ध से उपजी थकान के कारण बस अपने जीवन को सामान्य बनाने और परिवार के लिए रोटी जुटाने पर ध्यान देना चाहते हैं। उनके अनुसार, लोकतंत्र समर्थक सशस्त्र प्रतिरोध बेहद बिखरा हुआ और विकेंद्रीकृत है — जातीय सशस्त्र समूहों के अपने-अपने लक्ष्य हैं और कोई साझा नेतृत्व नहीं है जो सभी को एकजुट कर सके। गौरतलब है कि म्यांमार में फरवरी 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद से देश में राजनीतिक अस्थिरता और मानवाधिकार हनन की रिपोर्टें लगातार आती रही हैं। कैस्टिलो की रिहाई ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और म्यांमार के बीच राजनयिक संबंध अत्यंत तनावपूर्ण बने हुए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरी तरफ विदेश मंत्रालय पर बाधा डालने का आरोप लगता है — यह विरोधाभास ट्रंप प्रशासन में कार्यकारी शाखा और पेशेवर राजनयिक तंत्र के बीच की खाई को उजागर करता है। म्यांमार जैसे सैन्य शासन वाले देश में किसी अमेरिकी नागरिक की बिना दोषसिद्धि के 97 दिन की हिरासत यह भी बताती है कि अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा के लिए आधिकारिक राजनयिक चैनल कितने अपर्याप्त साबित हो सकते हैं। मुख्यधारा की कवरेज रिहाई के नाटक पर केंद्रित है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या अमेरिकी विदेश मंत्रालय की संस्थागत जवाबदेही तय होगी।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एडम कैस्टिलो को म्यांमार में क्यों हिरासत में लिया गया था?
कैस्टिलो के अनुसार, उनकी गिरफ्तारी की वजह उनके पूर्व संगठन अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स, म्यांमार के भीतर चल रहा एक आंतरिक विवाद था। यह विवाद पुलिस तक पहुँचा और बाद में अंतरराष्ट्रीय मामला बन गया। उन्हें किसी अपराध में दोषी नहीं ठहराया गया था, केवल हिरासत में रखा गया था।
एडम कैस्टिलो को म्यांमार से रिहा कराने में ट्रंप की क्या भूमिका थी?
कैस्टिलो ने कहा कि अंतिम और निर्णायक आदेश राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दिया। उन्होंने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, पॉला व्हाइट और कार्डिनल डोलन सहित कई लोगों का आभार भी जताया, लेकिन ट्रंप को 'जीवनदाता' बताया।
कैस्टिलो ने अमेरिकी विदेश मंत्रालय पर क्या आरोप लगाए?
कैस्टिलो ने आरोप लगाया कि अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने उनकी रिहाई के लिए कोई मदद नहीं की, बल्कि प्रयास कर रहे लोगों के काम में बाधा डाली। उन्होंने अमेरिकी दूतावास और मिशन प्रमुख पर भी सहायता न करने का आरोप लगाया।
इनसेइन जेल में कैस्टिलो के अनुभव कैसे थे?
कैस्टिलो ने बताया कि इनसेइन जेल की वास्तविक परिस्थितियाँ पारंपरिक धारणाओं से अलग हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से मारपीट या यातना नहीं देखी, और ICRC व जेल प्रशासन के सुधार प्रयासों की सराहना की — हालाँकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह उनका निजी अनुभव है।
म्यांमार की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर कैस्टिलो का क्या कहना है?
करीब 13 साल म्यांमार में रहे कैस्टिलो ने कहा कि वहाँ की जनता युद्ध से थकी हुई है और बुनियादी जरूरतों पर ध्यान देना चाहती है। उन्होंने लोकतंत्र समर्थक सशस्त्र प्रतिरोध को बिखरा हुआ और विकेंद्रीकृत बताया, जहाँ कोई साझा नेतृत्व नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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