नेपाल में बंदरों का आतंक: लालिगुरास नगरपालिका ने 15 मई को घोषित किया सार्वजनिक अवकाश, सामूहिक अभियान से भगाएंगे रीसस मकाक

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नेपाल में बंदरों का आतंक: लालिगुरास नगरपालिका ने 15 मई को घोषित किया सार्वजनिक अवकाश, सामूहिक अभियान से भगाएंगे रीसस मकाक

सारांश

नेपाल के तेहरथुम जिले की लालिगुरास नगरपालिका ने रीसस मकाक बंदरों के बढ़ते आतंक से परेशान होकर 15 मई को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है — ताकि पूरा समुदाय मिलकर बंदरों को खेतों और बस्तियों से खदेड़ सके। मेयर माबुहांग ने संघीय सरकार से इसे राष्ट्रीय मुद्दा घोषित करने की अपील की है।

मुख्य बातें

लालिगुरास नगरपालिका (तेहरथुम जिला) ने 15 मई 2025 को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया — बंदरों को सामूहिक रूप से खदेड़ने के लिए।
15 और 16 मई को दो दिवसीय अभियान; किसानों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय निवासियों की भागीदारी अपेक्षित।
बंदरों के हमलों से मक्का, आलू, कोदो, फल और सब्जियाँ नष्ट हो रही हैं; किसान रातभर खेतों की रखवाली करने को मजबूर।
कई स्कूली बच्चे फसल बचाने के लिए पढ़ाई छोड़ रहे हैं ।
मेयर माबुहांग ने संघीय सरकार से बंदरों की समस्या को राष्ट्रीय मुद्दा मानकर दीर्घकालिक नीति बनाने की अपील की।
रीसस मकाक नेपाल के राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित प्रजाति है; बिना अनुमति के इसे हानि पहुँचाना दंडनीय है।

नेपाल के तेहरथुम जिले की लालिगुरास नगरपालिका ने 15 मई 2025 (नेपाली पंचांग के अनुसार जेष्ठ 1) को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है, ताकि स्थानीय निवासी सामूहिक रूप से खेतों और बस्तियों से रीसस मकाक बंदरों को खदेड़ सकें। मेयर अर्जुन माबुहांग के हस्ताक्षर से जारी आधिकारिक सूचना में कहा गया है कि बंदरों के हमलों ने किसानों की आजीविका, बच्चों की शिक्षा और पारिवारिक दिनचर्या को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। यह कदम नेपाल के पहाड़ी जिलों में वर्षों से बढ़ती इस समस्या के बीच उठाया गया है, जिसका अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है।

मुख्य घटनाक्रम

लालिगुरास नगरपालिका ने 15 और 16 मई को दो दिवसीय सामूहिक अभियान की योजना बनाई है। इस अभियान में किसानों, जनप्रतिनिधियों, नगरपालिका कर्मचारियों और स्थानीय निवासियों को वार्ड कार्यालयों द्वारा तय स्थानों पर निर्धारित समय पर एकत्र होने का आग्रह किया गया है। स्थानीय भाषा में

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह नेपाल की उस गहरी नीतिगत विफलता को उजागर करता है जहाँ वन्यजीव संरक्षण कानून और कृषि सुरक्षा के बीच कोई संतुलन नहीं बनाया गया। रीसस मकाक को संरक्षित दर्जा देने के बाद सरकार ने यह नहीं सोचा कि जब ये जानवर मानव बस्तियों के लिए खतरा बनें तो क्या किया जाए। धार्मिक संवेदनशीलता और कानूनी बाधाओं के बीच फँसे किसानों को अब खुद ही अपनी फसल बचानी पड़ रही है — और नगरपालिकाएँ छुट्टी घोषित करने जैसे अस्थायी उपायों पर निर्भर हैं। जब तक संघीय स्तर पर कोई समन्वित नीति नहीं बनती, यह समस्या और विकराल होती रहेगी।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लालिगुरास नगरपालिका ने सार्वजनिक अवकाश क्यों घोषित किया?
लालिगुरास नगरपालिका ने 15 मई 2025 को सार्वजनिक अवकाश इसलिए घोषित किया ताकि स्थानीय निवासी एकजुट होकर रीसस मकाक बंदरों को खेतों और बस्तियों से खदेड़ सकें। बंदरों के हमलों से किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं और बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
नेपाल में बंदरों की समस्या कितनी गंभीर है?
नेपाल के पहाड़ी जिलों में रीसस मकाक बंदर मक्का, आलू, कोदो, फल और सब्जियों को लगातार नष्ट कर रहे हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। किसान रातभर खेतों की रखवाली करने को मजबूर हैं और कई स्कूली बच्चे पढ़ाई छोड़ रहे हैं। 2024 में एक अन्य नगरपालिका के मेयर ने इसी मुद्दे पर काठमांडू में भूख हड़ताल भी की थी।
रीसस मकाक बंदर को नेपाल में मारना या भगाना क्यों मुश्किल है?
रीसस मकाक नेपाल के राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित प्रजाति है, इसलिए सरकारी अनुमति के बिना इसे नुकसान पहुँचाना दंडनीय है। इसके अलावा हिंदू धर्म में बंदरों को भगवान हनुमान का रूप मानकर पूजा जाती है, जिससे सख्त कदम उठाना और भी जटिल हो जाता है।
नगरपालिका ने दीर्घकालिक समाधान के लिए क्या योजना बनाई है?
लालिगुरास नगरपालिका सामुदायिक जंगलों में अमरूद और नाशपाती जैसे फलदार पेड़ लगाने की योजना बना रही है ताकि बंदरों को जंगल में ही भोजन मिले और वे बस्तियों में कम आएँ। इसके अलावा अधिकारियों ने 'मंकी पार्क' स्थापित करने का सुझाव भी दिया है।
मेयर माबुहांग ने संघीय सरकार से क्या माँग की है?
मेयर अर्जुन माबुहांग ने संघीय सरकार से बंदरों की समस्या को राष्ट्रीय मुद्दा मानते हुए दीर्घकालिक नीति और कार्यक्रम लागू करने की अपील की है। उनका कहना है कि केवल स्थानीय सरकारों के लिए इस समस्या का समाधान संभव नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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