20 जुलाई 2026
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नेपाल संसद की पहली बैठक में पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली की गिरफ्तारी पर हुई तीखी बहस

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नेपाल संसद की पहली बैठक में पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली की गिरफ्तारी पर हुई तीखी बहस

सारांश

नेपाल की संघीय संसद की पहली बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक की गिरफ्तारी पर जोरदार बहस हुई। जानिए इस विवाद के पीछे की सच्चाई और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ।

मुख्य बातें

नेपाल की संघीय संसद में पूर्व पीएम ओली की गिरफ्तारी पर बहस हुई।
आरएसपी पार्टी ने गिरफ्तारी का समर्थन किया।
सीपीएन-यूएमएल ने इसे एक साजिश बताया।
नेपाली कांग्रेस ने निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
आगामी राजनीतिक परिणामों पर चर्चा जारी है।

काठमांडू, २ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। नेपाल में ५ मार्च को सम्पन्न हुए संसदीय चुनाव के बाद गुरुवार को संघीय संसद की पहली बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में पिछले साल सितंबर में जेन-जी विरोध प्रदर्शन को नियंत्रित करने के मामले में पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक की गिरफ्तारी पर गरमा-गरम बहस हुई।

ओली, जो कि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट, सीपीएन-यूएमएल) के अध्यक्ष हैं, और लेखक रमेश, जो नेपाली कांग्रेस के नेता हैं, को २८ मार्च को पिछले साल सितंबर की शुरुआत में प्रदर्शन को दबाने से संबंधित एक गैर-इरादतन हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया था। इस प्रदर्शन में कई लोग अपनी जान गंवा चुके थे। इस बगावत के दौरान ७७ लोगों की मौत हुई थी, और एनपीआर के अनुसार ८४ बिलियन से अधिक की सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुँचा था।

सीपीएन-यूएमएल और नेपाली कांग्रेस के नेताओं ने गिरफ्तारी पर सरकार की निंदा की। वहीं, सत्ताधारी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के अध्यक्ष रबी लामिछाने ने इस कदम का समर्थन करते हुए कहा कि यह शहीदों के परिवारों के लिए न्याय की ओर एक कदम है। उन्होंने कहा कि शहीदों की माताओं को न्याय का पहला अधिकार है, और इसे प्रतिशोध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

आरएसपी ने ५ मार्च के चुनावों में प्रतिनिधि सभा की २७५ में से १८२ सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर पारंपरिक राजनीतिक दलों को भारी हार का सामना कराया।

लामिछाने ने यह भी कहा कि सत्ताधारी पार्टी अपनी संसदीय संख्या के बावजूद विपक्षी दलों के खिलाफ प्रतिशोध का अभियान नहीं चलाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब किसी के साथ विचारधारा के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को बचाने और विपक्ष को फंसाने के लिए पहले भी कानूनों में बदलाव किए गए थे। ऐसी खराब आदतों को जल्द से जल्द ठीक किया जाएगा। विपक्ष के खिलाफ घमंड और प्रतिशोध का कोई स्थान नहीं होगा।

बैठक के दौरान, सीपीएन-यूएमएल के नेताओं ने ओली और लेखक की गिरफ्तारी की आलोचना की और इसे एक बड़ी साजिश का भाग बताया। यूएमएल के संसदीय दल के नेता राम बहादुर थापा 'बादल' ने सवाल उठाया कि उन्हें 'गैर-कानूनी तरीके से' क्यों गिरफ्तार किया गया और इसे एक बड़ी साजिश का हिस्सा बताया।

उन्होंने आरएसपी की भारी जीत के लिए सरकारी मशीनरी, बारबरा फाउंडेशन की गतिविधियों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एल्गोरिदम और गोएबल्स-स्टाइल प्रोपेगैंडा के माध्यम से गलत जानकारी और फर्जी सूचनाओं के उपयोग को भी जिम्मेदार ठहराया।

नेपाली कांग्रेस के सांसद भीष्म राज अमदेन्गे ने हाई-लेवल कमीशन की निष्पक्षता पर सवाल उठाया और ९ सितंबर की घटनाओं पर चुप्पी के लिए लीक हुई रिपोर्ट की आलोचना की, जब सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को भारी नुकसान हुआ था। पिछले साल ८ और ९ सितंबर को दो दिन के विरोध प्रदर्शन के दौरान, पुलिस की गोलीबारी में कई लोग मारे गए थे।

उन्होंने पूछा कि संसद की बिल्डिंग राख में क्यों बदल गई? नेपाल सरकार का मुख्य प्रशासनिक केंद्र, सिंघा दरबार क्यों जलाया गया? उन्हें किसने आग लगाई? उन्होंने कहा कि ८ और ९ सितंबर की घटनाओं की एक-एक करके जांच होनी चाहिए।

संसद की बैठक में आरएसपी के अध्यक्ष लामिछाने ने दलित समुदाय से सदियों से हुए भेदभाव के लिए माफी भी मांगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की गिरफ्तारी क्यों हुई?
उनकी गिरफ्तारी पिछले साल सितंबर में जेन-जी विरोध प्रदर्शन को दबाने से संबंधित एक गैर-इरादतन हत्या के मामले में हुई।
आरएसपी पार्टी का क्या कहना है?
आरएसपी के अध्यक्ष रबी लामिछाने ने इस गिरफ्तारी का समर्थन किया और इसे न्याय की दिशा में एक कदम बताया।
सीपीएन-यूएमएल का क्या रुख है?
सीपीएन-यूएमएल ने इस गिरफ्तारी की आलोचना की है और इसे एक बड़ी साजिश का हिस्सा बताया है।
नेपाली कांग्रेस का क्या कहना है?
नेपाली कांग्रेस के सांसदों ने हाई-लेवल कमीशन की निष्पक्षता पर सवाल उठाया है।
इस राजनीतिक घटनाक्रम का नेपाल पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
यह घटनाक्रम नेपाल की राजनीतिक स्थिरता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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