ईरान-पाकिस्तान के हालात बिगड़े: 104 अफगान परिवार (448 लोग) स्वदेश लौटे
सारांश
मुख्य बातें
ईरान और पाकिस्तान की बिगड़ती परिस्थितियों के बीच 104 अफगान परिवार, जिनमें कुल 448 लोग शामिल हैं, 11 अक्टूबर 2026 को अफगानिस्तान वापस लौट आए। इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान (IEA) के डिप्टी प्रवक्ता मुल्ला हमदुल्लाह फितरत ने यह जानकारी साझा की। अमेरिका से तनाव के कारण ईरान में अस्थिरता और पाकिस्तान में कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति को इस वापसी की प्रमुख वजह बताया जा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
मुल्ला हमदुल्लाह फितरत ने अपने एक्स अकाउंट पर वापसी प्रबंधन आयोग की रिपोर्ट साझा करते हुए बताया कि तोरखम क्रॉसिंग से 28 परिवार (138 लोग) लौटे और उनका विधिवत पंजीकरण किया गया। इसी क्रॉसिंग से लौटे 25 परिवारों (112 लोग) को विभिन्न प्रांतों में भेजा गया और उनके परिवहन खर्च के लिए 86,970 अफगानी की राशि दी गई।
इसके अतिरिक्त, तोरखम में 29 परिवारों को कुल 2,32,000 अफगानी की नकद सहायता प्रदान की गई। इन परिवारों को स्वास्थ्य सेवाएं और दूरसंचार सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं।
स्पिन बोल्डक क्रॉसिंग से भी हुई वापसी
कंधार प्रांत के स्पिन बोल्डक क्रॉसिंग से 11 परिवार (51 लोग) अफगानिस्तान लौटे। इनमें से 10 परिवारों (45 लोग) को अलग-अलग प्रांतों में भेजा गया और उनके परिवहन के लिए 99,200 अफगानी दिए गए। रिपोर्ट के अनुसार, वापस लौटे लोगों की मदद के लिए कुल 43 सिम कार्ड भी वितरित किए गए।
कुल मिलाकर 43 परिवारों (187 लोगों) को विभिन्न प्रांतों में स्थानांतरित किया गया, जबकि 51 परिवारों को नकद और अन्य सहायता प्रदान की गई।
65 लाख से ज़्यादा अफगान पहले ही लौट चुके हैं
यह ऐसे समय में आया है जब इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM) ने 8 अक्टूबर 2026 को एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें दावा किया गया कि पिछले तीन वर्षों में ईरान और पाकिस्तान से 65 लाख से अधिक अफगान नागरिक स्वदेश लौट चुके हैं। IOM ने चिंता व्यक्त की कि अफगानिस्तान में इतनी बड़ी संख्या में लोगों को पुनर्वासित करने की पर्याप्त क्षमता नहीं है।
गौरतलब है कि IOM ने अपनी रिपोर्ट के तीसरे चरण में उन प्रवासियों का अध्ययन किया, जो वापसी के बाद अफगानिस्तान में कम-से-कम आठ महीने तक रहे। ये वे लोग थे जिनके पास उचित दस्तावेज़ नहीं थे।
आम जनता पर असर
IOM की रिपोर्ट के अनुसार, वापस लौटने वाले अफगान नागरिकों के सामने पुनर्वास में गरीबी, बेरोज़गारी, रहने की जगह की कमी और बुनियादी सुविधाओं तक सीमित पहुंच जैसी गंभीर चुनौतियां हैं। आलोचकों का कहना है कि IEA सरकार के पास इन परिवारों के दीर्घकालिक पुनर्वास की कोई ठोस नीति नहीं है।
क्या होगा आगे
अफगानिस्तान की ओर प्रवासियों की यह वापसी आने वाले महीनों में और तेज़ होने की आशंका है, क्योंकि ईरान और पाकिस्तान दोनों में स्थितियां सामान्य नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के लिए यह ज़रूरी होगा कि वे अफगानिस्तान की पुनर्वास क्षमता बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाएं, अन्यथा मानवीय संकट और गहरा हो सकता है।