ईरान-पाकिस्तान से एक दिन में 2,199 अफगान स्वदेश लौटे, शरणार्थी सुरक्षा पर एमनेस्टी की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
काबुल, 27 जुलाई — ईरान और पाकिस्तान से 431 अफगान परिवारों के 2,199 नागरिक सोमवार को अफगानिस्तान वापस लौटे। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह एकल दिवसीय वापसी चार प्रमुख सीमा मार्गों से हुई, जो पड़ोसी देशों से अफगान शरणार्थियों की निरंतर बढ़ती वापसी की कड़ी में एक और बड़ा अध्याय है। यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन जबरन निर्वासन की बढ़ती घटनाओं पर गहरी चिंता जता रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम: चार सीमा मार्गों से हुई वापसी
तालिबान के उप प्रवक्ता मुल्ला हमदुल्लाह फितरत ने सोमवार को प्रवासियों की समस्याओं के समाधान के लिए गठित उच्च आयोग की दैनिक रिपोर्ट सार्वजनिक की। रिपोर्ट के अनुसार, सबसे बड़ी संख्या तोरखम सीमा मार्ग से आई, जहाँ 337 परिवारों के 1,769 लोग अफगानिस्तान में दाखिल हुए।
स्पिन बोलदक सीमा मार्ग से 39 परिवारों के 213 लोग लौटे, जबकि पुल-ए-अब्रिशम सीमा मार्ग से 42 परिवारों के 167 लोग वापस आए। इस्लाम काला सीमा मार्ग से 13 परिवारों के 50 लोग स्वदेश पहुँचे। इसके अतिरिक्त 294 अन्य यात्री भी अफगानिस्तान पहुँचे।
एमनेस्टी इंटरनेशनल की चेतावनी
पिछले महीने एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की थी कि अफगान शरणार्थियों को जबरन और गैरकानूनी तरीके से निकाले जाने पर तत्काल रोक लगाई जाए। संगठन ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, 'दुनिया भर में लाखों अफगान शरणार्थियों को बाहर निकाला जा रहा है और यह संख्या हर दिन बढ़ रही है। मेजबान देशों में उन्हें मनमानी गिरफ्तारियों और परिवारों से अलग होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।'
संगठन ने आगे कहा, 'अफगान लोगों को गैरकानूनी तरीके से निकाला जाना बंद होना चाहिए और जिन लोगों को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा की जरूरत है, उनकी सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों के अनुसार की जानी चाहिए।' मानवाधिकार संगठन ने यह भी रेखांकित किया कि अफगानिस्तान लौटने के बाद भी शरणार्थियों को मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर खतरों का सामना करना पड़ता है।
संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों की अपील
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) और अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) कई अवसरों पर यह स्पष्ट कर चुके हैं कि अफगान शरणार्थियों की वापसी सुरक्षित, स्वैच्छिक और सम्मानजनक तरीके से होनी चाहिए। दोनों एजेंसियों ने लौटने वाले लोगों के पुनर्वास के लिए अधिक अंतरराष्ट्रीय सहायता की माँग की है। गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियाँ पड़ोसी देशों से अफगान वापसी की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज कर रही हैं।
आम जनता पर असर
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, मेजबान देशों में अफगान शरणार्थियों को मनमानी गिरफ्तारियों, परिवार-विच्छेद और बुनियादी सुविधाओं के अभाव जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। वापसी के बाद भी अफगानिस्तान में मानवीय संकट की गहराती स्थिति उन्हें सुरक्षित भविष्य की कोई गारंटी नहीं देती।
क्या होगा आगे
अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद ईरान और पाकिस्तान से अफगान नागरिकों की वापसी का सिलसिला जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अफगानिस्तान में स्थिरता और मानवाधिकार सुनिश्चित नहीं होते, तब तक यह वापसी शरणार्थियों के लिए एक कठिन चुनौती बनी रहेगी। अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर दबाव बढ़ रहा है कि वह इस संकट के दीर्घकालिक समाधान के लिए ठोस कदम उठाए।