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ईरान-पाकिस्तान से एक दिन में 2,199 अफगान स्वदेश लौटे, शरणार्थी सुरक्षा पर एमनेस्टी की चेतावनी

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ईरान-पाकिस्तान से एक दिन में 2,199 अफगान स्वदेश लौटे, शरणार्थी सुरक्षा पर एमनेस्टी की चेतावनी

सारांश

एक ही दिन में ईरान और पाकिस्तान से 2,199 अफगान नागरिक चार सीमा मार्गों से स्वदेश लौटे — यह संख्या बढ़ती जा रही है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने जबरन निर्वासन को गैरकानूनी बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है।

मुख्य बातें

27 जुलाई को ईरान और पाकिस्तान से 431 परिवारों के 2,199 अफगान नागरिक एक ही दिन में स्वदेश लौटे।
सर्वाधिक 1,769 लोग तोरखम सीमा मार्ग से, 213 स्पिन बोलदक से, 167 पुल-ए-अब्रिशम से और 50 इस्लाम काला मार्ग से लौटे।
तालिबान के उप प्रवक्ता मुल्ला हमदुल्लाह फितरत ने उच्च आयोग की दैनिक रिपोर्ट साझा की।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने मेजबान देशों में मनमानी गिरफ्तारियों और परिवार-विच्छेद की घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई।
UNHCR और IOM ने सुरक्षित, स्वैच्छिक और सम्मानजनक वापसी सुनिश्चित करने की अपील की है।

काबुल, 27 जुलाईईरान और पाकिस्तान से 431 अफगान परिवारों के 2,199 नागरिक सोमवार को अफगानिस्तान वापस लौटे। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह एकल दिवसीय वापसी चार प्रमुख सीमा मार्गों से हुई, जो पड़ोसी देशों से अफगान शरणार्थियों की निरंतर बढ़ती वापसी की कड़ी में एक और बड़ा अध्याय है। यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन जबरन निर्वासन की बढ़ती घटनाओं पर गहरी चिंता जता रहे हैं।

मुख्य घटनाक्रम: चार सीमा मार्गों से हुई वापसी

तालिबान के उप प्रवक्ता मुल्ला हमदुल्लाह फितरत ने सोमवार को प्रवासियों की समस्याओं के समाधान के लिए गठित उच्च आयोग की दैनिक रिपोर्ट सार्वजनिक की। रिपोर्ट के अनुसार, सबसे बड़ी संख्या तोरखम सीमा मार्ग से आई, जहाँ 337 परिवारों के 1,769 लोग अफगानिस्तान में दाखिल हुए।

स्पिन बोलदक सीमा मार्ग से 39 परिवारों के 213 लोग लौटे, जबकि पुल-ए-अब्रिशम सीमा मार्ग से 42 परिवारों के 167 लोग वापस आए। इस्लाम काला सीमा मार्ग से 13 परिवारों के 50 लोग स्वदेश पहुँचे। इसके अतिरिक्त 294 अन्य यात्री भी अफगानिस्तान पहुँचे।

एमनेस्टी इंटरनेशनल की चेतावनी

पिछले महीने एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की थी कि अफगान शरणार्थियों को जबरन और गैरकानूनी तरीके से निकाले जाने पर तत्काल रोक लगाई जाए। संगठन ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, 'दुनिया भर में लाखों अफगान शरणार्थियों को बाहर निकाला जा रहा है और यह संख्या हर दिन बढ़ रही है। मेजबान देशों में उन्हें मनमानी गिरफ्तारियों और परिवारों से अलग होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।'

संगठन ने आगे कहा, 'अफगान लोगों को गैरकानूनी तरीके से निकाला जाना बंद होना चाहिए और जिन लोगों को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा की जरूरत है, उनकी सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों के अनुसार की जानी चाहिए।' मानवाधिकार संगठन ने यह भी रेखांकित किया कि अफगानिस्तान लौटने के बाद भी शरणार्थियों को मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर खतरों का सामना करना पड़ता है।

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों की अपील

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) और अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) कई अवसरों पर यह स्पष्ट कर चुके हैं कि अफगान शरणार्थियों की वापसी सुरक्षित, स्वैच्छिक और सम्मानजनक तरीके से होनी चाहिए। दोनों एजेंसियों ने लौटने वाले लोगों के पुनर्वास के लिए अधिक अंतरराष्ट्रीय सहायता की माँग की है। गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियाँ पड़ोसी देशों से अफगान वापसी की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज कर रही हैं।

आम जनता पर असर

मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, मेजबान देशों में अफगान शरणार्थियों को मनमानी गिरफ्तारियों, परिवार-विच्छेद और बुनियादी सुविधाओं के अभाव जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। वापसी के बाद भी अफगानिस्तान में मानवीय संकट की गहराती स्थिति उन्हें सुरक्षित भविष्य की कोई गारंटी नहीं देती।

क्या होगा आगे

अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद ईरान और पाकिस्तान से अफगान नागरिकों की वापसी का सिलसिला जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अफगानिस्तान में स्थिरता और मानवाधिकार सुनिश्चित नहीं होते, तब तक यह वापसी शरणार्थियों के लिए एक कठिन चुनौती बनी रहेगी। अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर दबाव बढ़ रहा है कि वह इस संकट के दीर्घकालिक समाधान के लिए ठोस कदम उठाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी कानून की सीमाओं को उजागर करती हैं। अफगानिस्तान में तालिबान शासन के तहत मानवाधिकार की स्थिति को देखते हुए 'घर वापसी' शब्द अपने आप में विरोधाभासी है। जब तक वापसी की प्रक्रिया की स्वतंत्र निगरानी नहीं होती, ये संख्याएँ राहत की नहीं, बल्कि चिंता की कहानी कहती हैं।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

27 जुलाई को कितने अफगान नागरिक स्वदेश लौटे और किन मार्गों से?
27 जुलाई को ईरान और पाकिस्तान से 431 अफगान परिवारों के कुल 2,199 नागरिक चार सीमा मार्गों — तोरखम, स्पिन बोलदक, पुल-ए-अब्रिशम और इस्लाम काला — से अफगानिस्तान लौटे। सबसे अधिक 1,769 लोग तोरखम मार्ग से आए।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अफगान शरणार्थियों के बारे में क्या कहा?
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा कि दुनिया भर में लाखों अफगान शरणार्थियों को जबरन और गैरकानूनी तरीके से निकाला जा रहा है। संगठन ने मेजबान देशों में मनमानी गिरफ्तारियों और परिवार-विच्छेद की घटनाओं पर चिंता जताते हुए अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों के तहत शरणार्थियों की सुरक्षा की माँग की।
UNHCR और IOM का अफगान शरणार्थियों की वापसी पर क्या रुख है?
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) और अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) ने कई बार कहा है कि अफगान शरणार्थियों की वापसी सुरक्षित, स्वैच्छिक और सम्मानजनक होनी चाहिए। दोनों एजेंसियों ने लौटने वाले लोगों के पुनर्वास के लिए अधिक अंतरराष्ट्रीय सहायता की अपील की है।
अफगानिस्तान लौटने के बाद शरणार्थियों को किन खतरों का सामना करना पड़ता है?
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, अफगानिस्तान लौटने के बाद शरणार्थियों को मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर खतरे बने रहते हैं। देश में जारी मानवीय संकट और तालिबान शासन के तहत विशेष रूप से महिलाओं और अल्पसंख्यकों की स्थिति अत्यंत कठिन बताई जाती है।
तालिबान सरकार ने शरणार्थियों की वापसी पर क्या कदम उठाए हैं?
तालिबान के उप प्रवक्ता मुल्ला हमदुल्लाह फितरत ने प्रवासियों की समस्याओं के समाधान के लिए बने उच्च आयोग की दैनिक रिपोर्ट साझा की। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि लौटने वाले परिवारों के पुनर्वास और सुरक्षा के लिए ठोस अंतरराष्ट्रीय समर्थन की अभी भी कमी है।
राष्ट्र प्रेस
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